अब सुलह भी हो सकेगी, ऑनलाइन कर सकेंगे शिकायत

Champa News - लोगों के लिए यह राहत भरी खबर है। 33 साल बाद उपभोक्ताओं के हितों से जुड़े अधिनियम में बदलाव किए गए हैं। अब उपभोक्ता...

Bhaskar News Network

Aug 14, 2019, 08:50 AM IST
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लोगों के लिए यह राहत भरी खबर है। 33 साल बाद उपभोक्ताओं के हितों से जुड़े अधिनियम में बदलाव किए गए हैं। अब उपभोक्ता विवाद प्रकरणों में सुलह से भी मामले निपटाए जाएंगे। एक करोड़ रुपए तक लेन-देन के प्रकरणों की सुनवाई अब जिले में ही होगी। इसके अलावा और भी राहत उपभोक्ताओं को मिलेगी।

उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए जिला उपभोक्ता फाेरम का गठन किया गया था। फोरम में 1986 में बने अधिनियम के हिसाब से प्रकरणों की सुनवाई हो रही थी, जिसे केंद्र सरकार ने बदला है। इससे काफी कुछ फायदा होगा। जिला उपभोक्ता आयोग में अब एक करोड़ रुपये तक की सुनवाई होगी। पहले 20 लाख रुपए तक के प्रकरणों की सुनवाई होती थी। उसके बाद राज्य फोरम रायपुर में जाना पड़ता था।

जहां निवास वहां करा सकेंगे प्रकरण दर्ज: उपभोक्ता अब जहां निवास करता है वहां के आयोग में प्रकरण दर्ज करवा सकता है। मसलन जांजगीर जिले के किसी गांव का व्यक्ति दिल्ली या कहीं और यदि ठगा जाता है तो यहां अब उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज करा सकेगा। यदि आयोग के पारित आदेश से पक्षकार व्यथित है तो उसे उच्च आयोग जाने के लिए 15 दिन ज्यादा समय मिलेगा।

पहले जुर्माने की रकम 2 से 10 हजार थी यह बढ़कर 25 हजार से एक लाख होगी। इससे आवेदकों को बड़ी राहत मिलेगी। पुराने नियम के हिसाब से ई पेमेंट व ऑनलाइन खरीदी, एटीएम विवाद जैसे प्रकरणों में सुनवाई के लिए दिक्कतें आती थी। नए नियम में इस तरह के मामलों पर आसानी से निपटारा हो सकेगा।

उपभोक्ताओं के हित के लिए किए गए बदलाव

उपभोक्ताओं के हित के लिए पुराने नियम उतने कारगर नहीं हो रहे थे। बाजार तकनीकी रूप से मजबूत हुआ है इसलिए उस तरह के प्रकरणों को देखकर नए नियम बने हैं। इसमें उपभोक्ता हित ज्यादा संरक्षित होंगे।'' मनरमन सिंह, सदस्य जिला उपभोक्ता फोरम

जानिए नए उपभोक्ता संरक्षण बिल की 10 प्रमुख बातें जो हैं आपके काम की

1. बिल में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव है। प्राधिकरण के पास अधिकार होगा कि वह उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और अनैतिक व्यापारिक गतिविधियों को रोकने हस्तक्षेप करे।

2. प्राधिकरण उत्पाद वापस लेने या रिफंड के आदेश के अलावा कंपनी के खिलाफ क्लास एक्शन ले सकेगी। क्लास एक्शन का मतलब है कि मैन्युफैक्चर्स या सर्विस प्रोवाइडर्स की जिम्मेदारी अब प्रत्येक ग्राहकों के प्रति होगी।

3. प्रोडक्ट के उत्पादन, निर्माण, डिजाइन,टेस्टिंग, सर्विस, इंस्ट्रक्शन, मार्केटिंग, पैकेजिंग, लेवलिंग आदि में खामी से ग्राहक की मौत या चोट लगती है तो मैन्युफैक्चरर, प्रोड्यूसर और विक्रेता जिम्मेदार होंगे।

4. अब तक ग्राहक, विक्रेता के खिलाफ उसी स्थान पर लीगल एक्शन ले सकता था, जहां लेन-देन हुआ हो। ऑनलाइन शॉपिंग में ऐसा संभव नहीं था।

5. पहली बार ई-कॉमर्स कंपनियों को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में लाया है। कंपनियों को उपभोक्ता का डाटा लेने के लिए ग्राहक की सहमति लेना जरूरी होगा। ग्राहक को ये बताना होगा कि उसके डाटा का इस्तेमाल किस तरह व कहां करेंगे।

6. ऑनलाइन शॉपिंग कराने वाली ई-कॉमर्स कंपनियों को अब अपने व्यापार का ब्योरा व सेलर एग्रीमेंट का खुलासा करना जरूरी होगा।

7. बिल में मैन्युफेक्चर के अलावा उत्पाद का प्रचार करने वाले सेलिब्रिटीज की जिम्मेदारी तय की है। भ्रामक या ग्राहकों को नुकसान पहुंचाने वाले विज्ञापन करने पर मैन्युफेक्चर को 2 साल की जेल और 10 लाख रुपए जुर्माना होगा।

8. लापरवाही के मामलों में मैन्युफेक्चर को 6 माह से आजीवन कारावास और एक लाख से 50 लाख रुपए तक का जुर्माना होगा।

9.बिंदु संख्या 11 व 12 के उल्लंघन पर उसका विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटीज से जुर्माना लेंगे।

10. अगर कोई जिला, राज्य या राष्ट्रीय आयोगों के आदेशों का पालन नहीं करता है तो उसे तीन वर्ष की जेल होगी।

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