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बरसाने की तर्ज पर युवतियों ने लोगों पर बरसाईं छड़ियां
बलौदा से 20 किलोमीटर दूर स्थित पंताेरा गांव में होली के पांच दिन बाद यानी धूल पंचमी पर लट्ठमार होली की परंपरा निभाई। गांव में स्थित मां भवानी मंदिर में पूजा के बाद दोपहर में 9 कुंवारी कन्याओं को बैगा ने अभिमंत्रित छड़ियां थमाई और उसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में लगी देवताओं की मूर्तियों को प्रतीकात्मक रूप से लट्ठ मारकर लट्ठमार होली की शुरुआत की। उसके बाद गांव की महिलाएं एवं युवतियां हाथों में लाठी लेकर लोगों को पीटने निकल पड़ी। महिलाओं और युवतियों से पीटने के बाद भी लोग नाराज नहीं हुए। गांव की गलियों में जब नाचते झूमते लोग पहुंचे तो युवतियाें और बालिकाओं ने उन्हें लाठियों से पीटना शुरू कर दिया।
पुरुष खुद को बचाते भागते नजर आए।
यह है मान्यता
ग्रामीणों का विश्वास है कि लठमार होली में जिस पर कन्याएं छड़ी का प्रहार करती हैं, उन्हें सालभर तक कोई बीमारी नहीं होती। जिले की यह अनूठी परंपरा सालों से चली आ रही है, जिसे देखने पहरिया, बलौदा, कोरबा, जांजगीर सहित आसपास के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित हुए। कन्याओं ने उन पर भी छड़ियों से प्रहार किया तो किसी ने विरोध नहीं किया।