जितना अहंकार करेंगे उतना भगवान पर कम विश्वास होगा : गोपिकेश्वरी

Dhamtari News - रावणभाठा में शुरू हुई 15 दिवसीय प्रवचन शृंखला का रविवार को दूसरा दिन था। इसमें गोपिकेश्वरी देवी ने कहा कि भगवान को...

Jan 21, 2020, 07:25 AM IST
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रावणभाठा में शुरू हुई 15 दिवसीय प्रवचन शृंखला का रविवार को दूसरा दिन था। इसमें गोपिकेश्वरी देवी ने कहा कि भगवान को पाने के लिए विश्वास की जरूरत है। वे इंद्रियों, मन, बुद्धि से परे हैं। भगवान के राज्य में विश्वास का बड़ा महत्व है। दृढ़ विश्वास से भगवान की प्राप्ति होती है। कोई शास्त्र वेद न पढ़ो, न तपस्या करो, नाम भी न लो भगवान का, न पूजा-पाठ करो, बस विश्वास कर लो शत-प्रतिशत उन पर तो वे मिल जाएंगे। हमको विश्वास नहीं है, इसलिए देर हो रही है। विश्वास नहीं होने का कारण अहंकार है। जीव जितना अहंकार करेगा, उतना उसको भगवान पर कम विश्वास होगा। अहंकार को दूर करना होगा।

गोपिकेश्वरी देवी ने बताया कि वेद कहते हैं कि भगवान नहीं जाने जा सकते। ब्रम्हा, विष्णु, शंकर आदि भी कहते हैं कि उन्हें तो हम भी नहीं जानते, नारदजी भी नहीं जानते, न ही सनकादिक परमहंस जानते हैं, न इंद्र जानते हैं। कठोपनिषद कहता है कि इंद्रियों से परे होता है मन, मन से परे बुद्धि, बुद्धि से परे आत्मा, आत्मा से परे माया और माया से परे भगवान। हमारे पास जानने के साधन ज्ञानेंद्रियां हैं और वो माया के वश में हैं। ईश्वरीय राज्य में उनका प्रवेश नहीं। इस कारण इंद्रियों से भगवान नहीं जाने जा सकते। भगवान सर्वज्ञ हैं, हम अल्पज्ञ हैं, वे सर्वदेशीय हैं, हम एक जगह रहने वाले, वे समस्त जगत के जीवों के कर्मों का हिसाब किताब रखकर फल देने वाले हैं, सर्वान्तर्यामी हैं।

हमारी आस्तिकता डगमगाती रहती है

गोपिकेश्वरी देवी ने कहा कि हम आस्तिक होने का दावा तो करते हैं पर वह दावा सत्य नहीं है। हमारी आस्तिकता और विश्वास ऐसा है जो डगमगाता रहता है। राम नाम सत्य है - यह नारा हम लगाने से डरते हैं कि कुछ अनिष्ट हो जाएगा। हम मंदिरों में जाते हैं, ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों पर बैठी देवियों के दरबार में जाते हैं। हमारे घर के बगल में मंदिर है, वहां नहीं जाते हैं। यह मानते हैं कि पहाड़ों वाले भगवान बड़े हैं। भगवान के लिए शृंगार खरीदते समय सबसे सस्ता कपड़ा झीना वाला उनके लिए खरीदते हैं। रिश्तेदारों की शादी में अपने बेटे-बेटियों के लिए महंगे कपड़े खरीदते हैं। जितना विश्वास और भय हमें संसारी लोगों पर होता है उतना भी भगवान पर नहीं होता। रास्ते में पड़े दस हजार रुपए हम लोगों के भय से उठाने से कतराते हैं, लेकिन जहां कोई व्यक्ति न हो वहां उठा लेते हैं। यह भूल जाते हैं कि भगवान तो देख रहा है।

गोपिकेश्वरी देवी

नगरी. शहर के रावणभाठा में 15 दिवसीय प्रवचन शृंखला में उपस्थित नगरवासी।

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