किताबें पढ़ने की आदत पड़े इसलिए बनाया पुस्तकालय, अब रोज बैठकर पढ़ते हैं बच्चे

Dhamtari News - हिंदी को लोकप्रिय बनाने व बच्चों में पढ़ने की आदत डालने के लिए माध्यमिक शाला बठेना में पुस्तकालय बनाया है। इसमें...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 06:55 AM IST
Dhamtari News - chhattisgarh news used to read books this is why library was built now children sit and study every day
हिंदी को लोकप्रिय बनाने व बच्चों में पढ़ने की आदत डालने के लिए माध्यमिक शाला बठेना में पुस्तकालय बनाया है। इसमें हिंदी गद्य, पद्य के अलावा, विज्ञान, अंग्रेजी के साथ छत्तीसगढ़ी की पुस्तकें रखीं हैं।

बच्चे भोजन अवकाश में नियमित रूप से रोज पढ़ रहे हैं। कहानी, कविता सहित अन्य पाठ पढ़ने के बाद उसके अच्छे व बुरे पक्ष भी बताते हैं। ऐसा करने से विद्यार्थियों में पढ़ने की लगन पैदा हुई है। उनका परीक्षा परिणाम तो बेहतर हो ही रहा है। वे कहानी, कविता भी लिख रहे हैं। ऐसा यहां कार्यरत शिक्षकों की दूरदृष्टि से संभव हो पाया है। यहां प्रधानपाठक महेश्वरी नेताम सहित शिक्षक राजेंद्र प्रसाद सिन्हा, प्रेमराज भोई, घनश्याम साहू बच्चों में पढ़ने की लगन पैदा कर रहे हैं।

शिक्षक राजेंद्र प्रसाद सिन्हा ने बताया कि बच्चों में पढ़ने की आदत डालने के लिए रोज पढ़ाया जाता है। शिक्षक भी बैठकर पढ़ते हैं। बच्चों से कहानी, कविता या अन्य पढ़े हुए विषय पर चर्चा भी करते हैं। 6वीं, 7वीं और 8वीं कक्षा मिलाकर 400 पुस्तक हैं। बच्चों की हिंदी को सुधारने के लिए यहां आधे घंटे की कक्षा भी लगाई जाती है। शिक्षक राजेंद्र प्रसाद खुद एक कवि हैं। छत्तीसगढ़ी में पीरा और हिंदी में पावस की रात के नाम से कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं।

धमतरी. छात्र रोज पुस्तकालय में बैठकर पढ़ते हैं।

प्रार्थना के बाद बच्चे हिंदी में लिखते हैं सुविचार

स्कूल में प्रार्थना के बाद छात्र सुविचार हिंदी में बोलते है। बच्चों में सामान्य ज्ञान, महापुरुषों की जीवनी और ज्ञान कैलेंडर (प्रमुख दिवसों की जानकारी) दी जाती है। ज्ञानवर्धक प्रश्न देते है। उत्तर दूसरे दिन बच्चे घर से लाते हैं।

बच्चों से लिखवाई जाती कविता व कहानियां

बच्चों में लेखन शैली विकसित करने के लिए स्कूल में स्पर्धाएं कराई जाती हैं। उनकी कविताओं कहानियों को स्कूल की पत्रिका उड़ान में प्रकाशित किया जाता है। यह पत्रिका सालाना निकाली जा रही है। इसके अलावा कविता कहानियों को अखबारों में छपवाया जाता हैं। बच्चों को प्रोत्साहित किया जाता है बच्चों को अलग अलग विषयों पर लिखने के लिए कहा जाता है। इसमें गद्य पद्य दोनों होते हैं। यहां के छात्र सत्यम सिन्हा ने करीब 20 से अधिक रचनाएं अब तक लिखीं। इनमें भारत की शान, नशामुक्ति, स्वच्छ हमारा छत्तीसगढ़ प्रमुख है। अंग्रेजी में सेव-मी कविता भी लिखी। शिक्षक राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि हिंदी दिवस पर बच्चों के बीच स्पर्धा है। बच्चों को 20 अलग-अलग विषय दिए गए है। जिस पर वे लिखेंगे। यह स्पर्धा हिंदी दिवस के मौके पर करीब 6 साल से चल रही है।

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