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दिव्यांग भतीजी को लोग चिढ़ाते थे तो चार युवतियों ने शुरू कर दिया दिव्यांगों के लिए स्कूल

एक वर्ष पहले
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पहले जिसे लोग चिढ़ाते थे वही चंचल देश प्रदेश में नाम रोशन कर रही है। यह हकीकत है एक्जेट फाउंडेशन दिव्यांग स्कूल की। इसकी शुरुआत लक्ष्मी सोनी ने की। इसे 4 युवतियों का समूह चला रहा है। लक्ष्मी ने बताया कि उनकी भतीजी चंचल को लोग चिढ़ाते थे। वाले भी उसे बाहर निकलने नहीं देते थे। अपने ही घर में दिव्यांगों की हालत देख उसका मन भर गया। दिव्यांगों के लिए कुछ करने के लिए प्रयास शुरू किया। 2015 में डांडेसरा में लक्ष्मी की मुलाकात शशि निर्मलकर, देवश्री जोशी, रूबी कुर्रे से हुई। चारों ने मिलकर यहां एक छोटे से घर में स्कूल शुरू किया। यह भवन गांव के उमाशंकर साहू का था, यह भी काफी पुराना था। पहले यहां 15 बच्चे आते थे। अब ये संख्या 35 हो गई है। इन्हें ही बेहतर जीवन देने का काम शुरू कर दिया। दिव्यांग चंचल एक पैर से कमाल का डांस करने लगी। हर शासकीय, निजी आयोजनों उसके प्रस्तुति की मांग अाने लगी।

पिछले 3 साल से वह राजिम पुन्नी मेला में भी प्रस्तुति दे रही है। जिला मुख्यालय धमतरी के मुख्य समारोह में भी उसका विशेष कार्यक्रम होता है। एक पैर से डांस कर उसने साबित कर दिया कि दिव्यांगों में हौंसले की कमी नहीं थोड़ा प्रोत्साहन मिले तो ऊंचाइयां छू सकते हैं। नेशनल डांस फेस्टिवल गोवा में भी चंचल प्रस्तुति दे चुकी है। यहीं नहीं इस स्कूल की दृष्टि बाधित दिव्यांग रजनी जोशी स्वीमिंग में और सेवती ध्रुव नेशनल जूडो में गोल्ड जीत चुकी है। पिछले साल सेवती को शहीद कौशल यादव पुरस्कार छग शासन दिया। इनाम में एक लाख रुपए मिले।

दिव्यांग चंचल कार्यक्रम में प्रस्तुति देते हुए।

संस्था की नींव रखने वाली लक्ष्मी सोनी(सबसे बाएं) के साथ छात्राएं।

धमतरी। दिव्यांग बच्चों के साथ चारों सहेलियां और गांव के लोग।

ये अब मेरा परिवार है: लक्ष्मी

लक्ष्मी सोनी ने कहा कि पहले दिव्यांग बच्चों के घर जाते थे। उनके पालक से बच्चे भेजने के लिए आग्रह करते थे। अब तो दूसरे जिले के बच्चे भी एडमिशन ले रहे हैं। यहां के सभी दिव्यांग और मेरी तीनों सहेलियां ही मेरा परिवार है। दिव्यांगों में कुछ कमी होती है तो कुछ दबी हुई हुनर भी होती है। इन्हें बस प्रोत्साहन और प्यार की जरूरत है।

रूद्री में जगह मिली, सहयाेग के बढ़े हाथ

पूर्व कलेक्टर डॉ सीआर प्रसन्ना से संस्था ने धमतरी शहर या आसपास जमीन दिलाने की मांग की। कलेक्टर ने रूद्री में बंद पड़े एक सरकारी स्कूल भवन को दिया। इसमें शिक्षा विभाग के सहायक संचालक एलआर मगर ने भी सहयोग किया। यहां जगह मिलने के बाद से लोगों का सहयोग बढ़ा। आए दिन लोग यहां जन्मदिन सहित दिव्यांगों के साथ खुशियां मनाने आते हैं।
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