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जरूरी व हो सकने वाले कामों को ही बजट में जोड़ेंगे: महापौर
निगम में बजट की तैयारी शुरू हो गई है। इस बार शहर में कांग्रेस की सरकार है। महापौर का कहना है कि बजट में केवल वही काम शामिल किए जाएंगे जो संभव होंगे। पूरे किए जा सकेंगे।
इससे पहले भाजपा के कार्यकाल में बजट बनता रहा। काम शामिल किए जाते रहे लेकिन पूरे नहीं हुए। 5 साल तक शहर विकास से जुड़ी योजनाओं को बजट में शामिल किया। काम के वादे किए। विशेष योजनाओं के लिए सरकार को चिट्ठी भी लिखी गई। बस इससे ज्यादा कुछ नहीं हुआ। पहली बार अब कांग्रेस को मौका मिला है। प्रदेश में भी कांग्रेस की सत्ता है। ऐसे में शहर के लोगों को बेहतर काम होने की उम्मीद है। महापौर विजय देवांगन ने माना कि शहर में पिछले 15-20 साल से कोई ज्यादा काम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें विश्वास के साथ निगम में बैठाया है। बजट हवा हवाई नहीं होगा। धरातल पर उतरने वाला बजट पेश बनाएंगे। सभी पार्षदों के सहयोग से बजट बनाएंगे। शहर की प्रमुख जरूरतों को शामिल करेंगे। दो महीने में शहर की प्रमुख जरूरतें समझ में आ गई है। उन्हीं पर ज्यादा काम होगा।
तीन करोड़ से ज्यादा खर्च हुए, स्थिति नहीं सुधरी: पिछले 15 साल में तालाबांे पर लगभग तीन करोड़ रुपए खर्च हुए। मकई, रमसगरी तालाब पर सबसे ज्यादा 2 करोड़ रुपए खर्च हुए। ये दाेनों तालाब सूखे हैं। रामबाग, शीतला तालाब, महिमा सागर सूखा है। सुबन और देवान तालाब में एक तिहाई पानी ही बचा है। शहर में 19 तालाब हैं।
बजट में सिर्फ शामिल न कर उस पर काम भी करें: शहर के लक्की जैन ने कहा कि बजट में जिस काम को शामिल किया जाता है। उस पर अमल नहीं होता। अब तक ऐसा ही होता रहा है।
यह काम बजट में रहे शामिल, पूरे नहीं हुए
गोकुल नगर: 4 साल से बजट में शामिल रहा। शहर से बाहर ले जाने में निगम के जनप्रतिनिधि और अफसर असफल रहे। अब प्रयास तेज हुए हैं। अगले कुछ महीनों में परिणाम आ सकते हैं।
हाईटेक बस स्टैंड: 15 साल से इसके लिए सपना दिखाया जा रहा है। पूर्व महापौर ने तो इसके लिए 5 करोड़ रुपए पास होने का भी बयान दिया था। पांच साल तक लगातार बजट में शामिल भी किया गया। यह तैयार नहीं हो पाया।
गोल बाजार सौंदर्यीकरण: इसके लिए 5 साल पहले सर्वे किया गया। पार्किंग के साथ बाजार को विकसित करने का निर्णय लिया गया। पिछले पांच साल तक इसके लिए भी बजट में प्रावधान किया गया। अभी इसके लिए निगम के पास कोई योजना नहीं।
गौरवपथ निर्माण: र|ाबांधा, सिहावा रोड से बिलाई माता मंदिर तक गौरव पथ बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्वीकृति दिलाने के प्रयास नहीं हुए। अब फिर प्रस्ताव भेजने की तैयारी है।
ट्रांसपोर्ट नगर: इसके लिए हर साल बजट में प्रस्ताव किया गया। पूर्व विधायक इंदर चोपड़ा के समय चिटौद में जगह मिली। इसके जिला बालोद में होने के कारण काम नहीं हो सका। शहर से नेशनल हाईवे गुजरा है,इसलिए यह शहर की जरूरत है। साथ ही शहर में 60 से अधिक राइस मिल है।
तालाब में बोटिंग: शहर के रमसगरी और मकई तालाब में बोटिंग सेवा के लिए 10 साल से प्रयास हो रहा। सफलता नहीं मिली। सिर्फ इसके लिए योजना बनी। धरातल पर लाने के लिए निरीक्षण से आगे कुछ नहीं हुआ।
चौपाटी तक नहीं बना: चौपाटी के लिए भी जनता को सिर्फ सपना दिखाया गया। मकई तालाब का चिह्नांकन किया गया था। कलेक्टर और कमिश्नर ने शहर का निरीक्षण किया। तब मकई और रमसगरी में चौपाटी बनाने का निर्णय लिया गया। काम फिलहाल शुरू नहीं हो पाया है।
पेंटिन गंज: नया बस स्टैंड के पीछे करीब 43 एकड़ निगम की जमीन है। इसे पेंटिन गंज के नाम से जाना जाता है। इसमें रहने वालों का लीज समाप्त हो गई है। जमीन को कब्जे में लेने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। यह जमीन मिल जाए तो कई योजनाओं के लिए जमीन मिल जाएगी।