बाउंड्री का निर्माण नहीं होने 1314 स्कूल अब भी असुरक्षित,1181 में बिजली ही नहीं

Jashpuranagar News - बागबहार के दूरस्त गांव में स्थित स्कूल। 2265 स्कूलों में से 1181 में नहीं पहुंची बिजली जिले के स्कूलों में आहाता...

Dec 04, 2019, 08:10 AM IST
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बागबहार के दूरस्त गांव में स्थित स्कूल।

2265 स्कूलों में से 1181 में नहीं पहुंची बिजली

जिले के स्कूलों में आहाता के साथ-साथ बिजली की भी एक बड़ी समस्या है। जिले के 2265 स्कूलों में से 1084 स्कूलों में बिजली सप्लाई की व्यवस्था है। वहीं जिले के 1181 स्कूलों में अब तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। स्कूलों में बिजली की व्यवस्था नहीं होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी इन स्कूलों के शिक्षकों को होती है। शिक्षकों को बच्चो की गतिविधियों को ऑनलाइन इंट्री करनी पड़ती है और ऑनालाइन इंट्री करने के लिए उन्हंे शासन की ओर से बाकायदा टेबलेट भी दिया है पर बिजली की व्यवस्था नहीं रहने से शिक्षकों को टेबलेट लेकर अपने घर आना पड़ता है और घर से ही बच्चो की इंट्री करनी पड़ती है। शिक्षको के द्वारा स्कूल में इंट्री का काम करने के कारण टेबलेट का बैटरी लो हो जाने के कारण इंट्री का काम पूरा नहीं कर पाते हैं। इसलिए उन्हें घरांे में बैठकर बच्चांे की इंट्री करनी पड़ती है।

सबसे ज्यादा प्राइमरी स्कूल हैं बाउंड्रीविहीन

जिले के 1651 प्राथमिक शाला संचालित हैं इनमें से मात्र 608 स्कूलों में ही आहाता का निर्माण कराया गया है, वहीं 1043 प्राथमिक शाला जिले में ऐसे हैं जहां आज तक आहाता का निर्माण नहीं कराया गया है। जिसके कारण शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। आहाता का सबसे ज्यादा ज़रुरत प्राथमिक शालाओं में ही है। आहाता नहीं होने से शिक्षकों में हमेशा यह डर बना रहता है कि प्राथमिक स्कूल का कोई छात्र स्कूलों में खेलते खेलते कहीं बाहर ना चले जाए।

मध्याह्न भोजन के समय मवेशी झूठा कर देते हैं खाना

अहाता नहीं होने से स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उस वक्त होती है, जब वे मध्याह्न भोजन करने बैठते हैं। खासकर सूअर और कुत्तों से ज्यादा दिक्कत हो रही है। भोजन के लालच में बच्चों के आसपास विचरण करते रहते हैं। इससे बच्चे मध्याह्न भोजन भी ठीक ढंग से नहीं कर पाते हैं। सब कुछ जानते हुए भी शिक्षक कुछ कर पाने में असमर्थता जाहिर करते हैं। वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारी शासन को प्रस्ताव भेजने का रटा रटाया जवाब देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। कई स्कूल के बच्चों ने बताया कि बाउंड्रीवॉल नहीं होने से कुत्ते, सूअर और गाय बैल स्कूल परिसर में प्रवेश कर जाते हैं। मवेशियों को बार बार भगाना पड़ता है।

प्रस्ताव बनाकर भेजा है


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