मयाली नेचर कैंप में बनेगा चिल्ड्रन पार्क व कैंटीन, झील में बोटिंग की भी है व्यवस्था

Jashpuranagar News - भास्कर संवाददाता | जशपुरनगर जशपुर जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर की दूर और कुनकुरी से 15 किलोमीटर दूरी पर एनएच-43 के...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:06 AM IST
Jashpur News - chhattisgarh news boating will be done in the children39s park and canteen lake in mayali nature camp
भास्कर संवाददाता | जशपुरनगर

जशपुर जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर की दूर और कुनकुरी से 15 किलोमीटर दूरी पर एनएच-43 के पास चरई डांड के समीप मयाली नेचर कैंप में पर्यटकों के लिए और सुविधाएं दी जाएगी। वन विभाग ने यहां तीन चरणों में झूले, म्युजिकल फाउंटने, पैगौडा और थियेटर का निर्माण करायएगा। इससे यह क्षेत्र इको टूरिज्म सेंटर के रूप में नई पहचान बनाएगा। इसका लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

मयाली नेचर कैंप मधेश्वर पहाड़ के नीचे स्थित है। पहाड़ की आकृति शिवलिंग जैसी है। यहां पहले बड़ी मात्रा में बांस का उत्पादन होता था। ग्रामीणों द्वारा इसका निरंतर कटाई करने से वनों की स्थिति अत्यंत खराब हो गई। जब यहां बांस के पौधे नाम मात्र के बचे तो वन विभाग हरकत में आया और पर्यावरण चेतना केन्द्र के रूप में मयाली गांव को विकसित करने का फैसला लिया। वहां की बंजर जमीन में कृत्रिम झील का निर्माण कराया। इस नेचर पार्क में अब 3 चरणों में 36.22 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे, जिसमें पर्यटकों के निवास के लिए आधुनिक टेंट, भोजन के लिए कैंटीन, बच्चों के लिए चिल्ड्रंस पार्क, झील में भ्रमण के लिए आधुनिक बोट की व्यवस्था की जाएगी। प्रकृति से जुड़ने के लिए सैलानी यहां दूर-दूर से आते हैं। स्कूली बच्चों का कैंप भी यहां अक्सर लगता है। वे मधेश्वर पहाड़ पर पर्वतारोहण भी करते हैं।

समूह के सदस्य संभाल रहे इको पार्क की व्यवस्था- मयाली गांव के झील में सैर करने के लिए वोटिंग की व्यवस्था की गई है। पूरे नेचर पार्क का प्रबंधन देवबोरा पर्यावरण जागरूकता समूह कर रहा है। इस समूह में 20 सदस्य हैं। मधेश्वर नेचरपार्क की बदौलत मयाली गांव को नहीं पहचान मिली है। छुट्टी के दिन यहां बड़े मात्रा में सैलानी पहुंच रहे हैं। इसके कारण भंडरी ग्राम पंचायत में भी सैलानी घूमने पहुंच रहे हैं। इससे वहां के लोगों का भी जीवन स्तर ऊंचा उठा है। नेचर पार्क में अब पर्यटकों के लिए अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। इससे उनका खासा मनोरंजन होगा।

नेचर पार्क में झूले, म्यूजिकल फाउंटेन, पैगोडा, बटरफ्लाई पार्क, इंफोटेन वाइल्ड लाइफ ट्रेल, थियेटर हो रहा तैयार

वोटिंग का आनंद लेते प्रभारी मंत्री अमरजीत भगत।

ग्रामीणों पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक

मयाली और भंडरी में रहने वाले ग्रामीण पर्यावरण सुरक्षा के प्रति अब जागरूक हो गए हैं। गांव के हर ग्रामीण ने अपने घर में कम-से-कम 5 वृक्ष जरूर लगाए हैं। ज्यादातर पेड़ मुनगा, पपीता, नीबू, आंवला और आम के हैं। इससे ग्राम पंचायत में चारों ओर हरियाली नजर आ रही है। कृत्रिम झील में मछली पालन भी किया जा रहा है। इससे ग्राम पंचायत को हर साल अतिरिक्त आमदनी हो रही है। इसका उपयोग ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में किया जा रहा है। पहले कृषि कार्य के लिए पानी नहीं था, परन्तु पौधरोपण होने के बाद भंडरी ग्राम पंचायत में भूजल स्तर सुधरा है। वहां के सभी सूखे हैंडपंप में अब पानी आ गया है।

पर्यटकों के मनोरंजन की हो रही व्यवस्था

नेचर पार्क में बच्चों को पर्यावरण के विषय में जानकारी दी जाती है। यहां विभिन्न झूलों और म्यूजिकल फाउंटेन, पैगोडा, बटरफ्लाई पार्क, इंफोटेन वाइल्ड लाइफ ट्रेल,थियेटर ,तैयार किया जा रहा है जो बच्चो के साथ बड़ो के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। पर्यावरण प्रेमियों के ठहरने के लिए यहां खास टेंट की व्यवस्था की गई है। यहां पर्यावरण चेतना केंद्र के नाम पर रिजॉर्ट तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य कैंप में आए कॉलेज और स्कूली विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। आगंतुकों से प्रवेश शुल्क, नौका विहार शुल्क, ठहरने आदि का शुल्क लेकर पार्क की मेंटनेंस करने की व्यवस्था की गई है।

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