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झुंड में घूम रही हथिनी का बालांलोगरी केपास मिला शव, मौत की वजह पता नहीं

एक वर्ष पहले
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कुनकुरी वन परिक्षेत्र के ग्राम पंचायत मटासी के बालांलोगरी गांव के पास मंगलवार को मिले हथिनी के शव के मामले में अब भी मौत के कारण का पता नहीं चल सका है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हथिनी के पेट में भ्रूण और एक कपड़े का टुकड़ा मिला है। लेकिन इस बात को लेकर अब भी स्थिति साफ नहीं हो पाई है कि मौत का कारण जहर है या कुछ और। वन मण्डलाधिकारी एसके जाधव ने बताया कि मृत हथिनी झुंड में थी। इसलिए किसी द्वारा जहर दिए जाने की संभवना कम है।

उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय से हाथियों का झुंड बादलखोल अभ्यारण क्षेत्र में मौजूद है। मृत हथिनी इसी झुंड की सदस्य थी। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद हाथी का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। विभाग मामले की जांच में जुट गया है। उन्होंने यह भी संभावना जताई कि हथिनी की मौत जहर के कारण भी हो सकती है। जैसे ही हाथी की मौत की खबर लोगों हो हुई, तो होली के दिनों में रंग न खेल कर हथिनी को देखने के लिए उमड़ पड़े। साहीडांड़, सरबकोम्बो, राजौटी, जामचुंवा, बनकोम्बो रेंगारघाट, केराडीह, चटकपुर बेने सहित दर्जनों गांव के हजारों लोग मृत हाथी को देखने पहुंचे और मृत हथिनी को रंग लगाकर श्रृंद्धाजलि दी। कुछ ने नया कपड़ा कफन के रूप में दिया। किसी ने आरती कर मृत हथिनी को अंतिम विदाई दी इसके साथ ही वन विभाग भी अपनी पुरी टीम के साथ अंतिम संस्कार में शामिल थे।

मृत हाथी को देखने पहुंचे और मृत हथिनी को रंग लगाकर श्रृंद्धाजलि दी। कुछ ने नया कपड़ा कफन के रूप में दिया। किसी ने आरती कर मृत हथिनी को अंतिम विदाई दी इसके साथ ही वन विभाग भी अपनी पुरी टीम के साथ अंतिम संस्कार में शामिल थे।


डब्ल्यूएआई की टीम पहुंचेगी जशपुर


वन्य प्राणियों की निगरानी और सुरक्षा को लेकर अधिकारियों की हुई चर्चा


बादलखोल अभयारण्य क्षेत्र की पास हुई हथिनी की मौत के मामले की जांच के लिए डब्ल्यूएआई की टीम जशपुर आएगी। बताया जा रहा है कि मौत के कारण की गहराई से जांच की जाएगी। वन विभाग के अफसर भी इस बात को लेकर परेशान नजर आ रहे हैं कि आखिर हाथी के पेट मे जहर आया कहां से? अधिकारियों का कहना है कि मृत हाथी के शरीर में कही भी चोट या जलने के निशान नही हैं। सम्भावना जताई जा रही है कि हथिनी ने अनजाने में जहरीला वनस्पति खा लिया होगा। अब तक कारण पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है।

मृत हाथी की पूजा करते ग्रामीण।

गुरुवार को प्रदेश के पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ अतुल शुक्ला और एडिशनल पीसीसीएफ अरुण पांडेय ने हाथी सहित वन्य प्राणियों की निगरानी और सुरक्षा के मामले को लेकर अधिकारियो से चर्चा की। हाथी और मानव द्वंद विषय पर आयोजित इस बैठक में सीसीएफ बी मिंज, एसएस कंवर, सरगुजा सर्कल के सभी 6 डीएफओ शामिल हुए। बैठक की शुरुआत कोरबा के डीएफओ गुरुनाथन के विजुअल प्रेजेंटेशन से शुरू हुई। इसमें रायगढ़, जशपुर, अम्बिकापुर, कोरबा, बलरामपुर जिले में हाथियों की निगरानी और सुरक्षा के विषय पर चर्चा हुई। पीसीसीएफ ने प्रेजेंटेशन के दौरान ही गौतमी दल के कॉलर गिरने की घटना को लेकर डीएफओ से सवाल जवाब किया। विभाग के आला अधिकारियों ने बैठक में मौजूद डीएफओ से जानना चाहा कि क्षेत्र में विचरण कर रहे हाथियों की निगरानी और सुरक्षा को लेकर क्या प्रयास किया जा रहा है।। प्रेजेंटेशन के बाद मानव हाथी द्वंद विषय पर इन आला अधिकारियों ने मंथन किया। बताया जा रहा है कि कॉलर आईडी गिरने और हाथी की मौत की घटना के बाद शासन ने पूरे प्रदेश में वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। आज हुए इस बैठक के बाद हाथियों की सुरक्षा के साथ मनुष्यों की जान और सम्पत्ति की सुरक्षा को लेकर वन विभाग के कर्मचारियों पर दबाव और बढ़ने की बात कही जा रही है
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