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पीएचडी के लिए बताना होगा रिसर्च का सोसायटी को क्या फायदा
पीएचडी करने वाले शोधार्थियों को अब पंजीयन के दौरान ही बताना होगा कि उनके शोध से सोसायटी को क्या फायदा होगा। समाज के लिए वह कितना उपयोगी है। वायवा के पहले शोधग्रंथ को यूजीसी को भेजना होगा। वहां उसका मूल्यांकन होगा। इसमें सफल होने पर डिग्री अवार्ड किया जाएगा। पिछले दिनों एमएचआरडी और यूजीसी ने पीएचडी की नई गाइड लाइन जारी की है।
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{फायदा : रिसर्च का काम पूरा हो सकेगा, सिर्फ नाम की डिग्री नहीं रहेगी - यह भी देखने में आता है कि गाइड अपना सीआर बेहतर बनाए रखने के लिए शोधार्थियों को अपने पास रखता है। जैसे ही उसकी डिग्री पूरी होती है, अपने सीआर में एक और छात्र का पीएचडी कराना लिखकर संतुष्ट हो जाता है। इसी तरह शोधार्थी भी किसी तरह पीएचडी पूरा कर लेना चाहते हैं। जैसे ही उनकी पीएचडी पूरी होती है, काम रुक जाता है। इसकी वजह से जिस विषय में काम हो रहा होता है, वह आधे में ही रुक जाता है।
{गाइड और स्कॉलर सिर्फ रिकार्ड तक सीमित हैं- आमतौर पर देखा जाता है कि रिसर्च स्कॉलर का पूरा ध्यान किसी भी तरह शोधग्रंथ को पूरा करना और उसे अवार्ड के लिए जमा कर देना होता है। जैसे ही उसकी पीएचडी पूरी होती है, वह आगे काम करना बंद कर देता है। जूनियर्स से भी अपने शोध के आउटपुट को शेयर नहीं करते।
सभी लोगों तक नहीं पहुंच पाता है शोध के काम: विश्वविद्यालयों और शोध केंद्रों की प्रयोगशाला में कई प्रयोग होते हैं। इसमें कई चीजें लोगों के काम की होती है, लेकिन उसका व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं हो पाता, इसकी वजह से वह आम लोगों तक नहीं पहुंच पाता।