पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का पवित्र पितृपक्ष शुरू, दान व तर्पण से तृप्त होते हैं पितर

Jashpuranagar News - जशपुरनगर | अपने पितरों के प्रति विश्वास व श्रद्धा प्रकट करने का विशेष अवसर पितृपक्ष देता है। ऐसी मान्यता है कि...

Sep 14, 2019, 07:05 AM IST
जशपुरनगर | अपने पितरों के प्रति विश्वास व श्रद्धा प्रकट करने का विशेष अवसर पितृपक्ष देता है। ऐसी मान्यता है कि पूर्वजों के मृत्यु की तिथि को तर्पण करने से पितरों को वर्षभर का भोजन मिलता है और पितर तृप्त होकर अपने कुल पर आर्शीर्वाद बनाए रखते हैं। पितृपक्ष में घर के सबसे विरिष्ठ सदस्य को विशेष संयम बरतने की जरूरत होती है।

कुनकुरी शिव मंदिर के पुजारी पं.राहुल मिश्रा ने बताया कि पितृपक्ष में मृत्युलोक से पितर पृथ्वी पर आते हैं और आशीर्वाद देते हैं। पितृपक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनको तर्पण किया जाता है। पितरों के प्रसन्न होने पर घर पर सुख शांति आती है। पितरों की शांति के लिए इस पक्ष में श्राद्ध जरूरी है। बहुत से लोगों को अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि याद नहीं रहती। ऐसी स्थिति में आश्विन अमावस्या को तर्पण किया जा सकता है। शुक्रवार काे पहले दिन पूर्णिमा का श्राद्ध हुअा। इस बार तिथियों की घट-बढ़ तो है, लेकिन फिर भी सर्व पितृ अमावस्या 28 सितंबर को रहेगी और इस दिन श्राद्ध पक्ष का समापन हो जाएगा। 16 सितंबर को किसी भी तिथि का श्राद्ध नहीं है। वहीं, चतुर्दशी तिथि का क्षय भी है।

इसके साथ ही 13 को पूर्णिमा, 14 को सुबह 10.02 बजे तक पूर्णिमा है। ऐसे में उसके बाद प्रतिपदा का श्राद्ध रहेगा। 15 को द्वितीया का श्राद्ध रहेगा, लेकिन इस दिन दोपहर 12.23 बजे तक प्रतिपदा तिथि रहेगी। 16 को दोपहर 2.35 बजे तक द्वितीया रहेगी। ऐसे में इस अपराह्न काल में किसी भी तिथि का स्पर्श नहीं होने से श्राद्ध नहीं है। 17 को शाम 4.32 बजे तक तृतीया, 18 को शाम 6.18 बजे तक चतुर्थी, 19 को शाम 7.26 बजे तक पंचमी, 20 को रात 8.11 बजे तक षष्ठी, 21 को रात 10.20 बजे तक सप्तमी, 22 को शाम 7.49 बजे तक अष्टमी, 23 को शाम 6.37 बजे तक नवमी, 24 को शाम 4.42 बजे तक दशमी, 25 सितंबर को दोपहर 2.08 बजे तक एकादशी और उसके बाद द्वादशी का श्राद्ध शुरू हो जाएगा। 26 सितंबर को त्रयोदशी, 27 को चतुर्दशी और 28 को सर्व पितृ अमावस्या है।

X
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना