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नवसंवत्सर 2077... 6 मई तक नाम प्रमादी फिर अानंद

एक वर्ष पहले
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चंद्रमा के मंत्री होने से महिलाओं के अधिकारों
में होगी बढ़ोतरी


अागामी 25 मार्च को गुड़ी पड़वा से प्रारंभ होने जा रहे नव संवत्सर 2077 का नाम इस बार प्रमादी है, परंतु खास बात यह है कि ये केवल 6 मई तक ही प्रभावी रहेगा और इसके बाद इस संवत्सर का नाम अानंद हो जाएगा। यद्यपि पंडित पूरे वर्ष विभिन्न मांगलिक कार्यों की पूजा अादि में संकल्प मंत्र व विनियोग अादि में प्रमादी नाम का ही उपयोग करेंगे। संवत्सर के 60 चक्रों में यह 47वां संवत्सर है। इसके बाद 48वें संवत्सर का नाम भी अानंद रहेगा, जो इसी वर्ष मई से प्रारंभ होगा, जबकि वर्तमान में 46वां संवत्सर चल रहा है, जिसका नाम परिधावी है।

शुभ कार्यों के लिए खास दिन

ज्योतिषी राघवेंद्र पांडेय के अनुसार 25 मार्च का दिन विभिन्न शुभ कार्यों के लिए अति श्रेष्ठ रहेगा। इस दिन बगैर मुहूर्त देखे किए गए मांगलिक कार्यों से लेकर खरीद-फरोख्त तक समृद्धिदायी रहेगी। इसी दिन चैत्र नवरात्र प्रारंभ होगा। इस दिन भगवान राम का राज्याभिषेक भी हुआ था। पंडितों ने इस दिन का विशेष महत्व बताया है।

25 को मनेगा झूलेलाल महोत्सव तैयारी पर चर्चा करने हो रही बैठक

भास्कर संवाददाता | रायगढ़

सिंधी समाज अपने आराध्य भगवान श्री झूलेलाल का जन्मोत्सव 25 मार्च को मनाएगा। श्री झूलेलाल मंदिर पर पूज्य पंचायत सिंधी समाज एवं सिंधी समाज के समस्त संगठनों ने मिलकर एक बैठक में आयोजन की रूपरेखा बनाई।

बैठक में तय किया गया है कि श्री झूलेलाल जन्मोत्सव अंतर्गत विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिता, जनेऊ संस्कार, भंडारा के साथ ही समापन दिवस पर शोभायात्रा को भव्य रूप देने के लिए समाज के सभी सदस्य मिलकर प्रयास करेंगे। सभी कार्यक्रम को सफलतापूर्वक कराने के लिए समिति के पदाधिकारी व सदस्यों को जिम्मेदारी दी गई। सभी कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए अपने-अपने विचार रखे। कुछ पर सर्वसम्मति से फैसला लेकर समारोह में शामिल कर लिया।ञ पंचायत सिंधी समाज के अध्यक्ष एवं संगठनों के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।

युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर

इस वर्ष के राजा बुध व मंत्री चंद्रमा होंगे, फिर अानंद योग शुरू होने पर वर्षा पर्याप्त मात्रा में होगी, वहीं धान अादि अनाज का उत्पादन भी गत वर्ष की अपेक्षा अधिक होगा। इसका कारण बुध का कृषि और हरी वस्तुओं पर अधिपत्य होना है। चंद्रमा रस प्रधान है, इसलिए रसीली वस्तुओं फल अादि की पैदावार भी अच्छी होगी। ग्रहों में बुध को युवा माना जाता है, इसलिए युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, जबकि चंद्रमा के मंत्री होने से महिलाओं के अधिकारों में भी बढ़ोतरी होगी।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सृष्टि की रचना

पं. प्यारेदेव पंडा ने बताया कि विक्रम नव संवत्सर का शुभारंभ 25 मार्च को चैत्र शुक्ल को गुड़ी पड़वा पर होगा। शास्त्रों में उल्लेख है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की थी। इस मास में देवी-देवताओं की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस नए संवत्सर का नाम प्रमादी है। इसका अर्थ अवसाद या दुख से भी जोड़ा जा सकता है। परंतु 6 मई से इस प्रमादी नवसंवत्सर का प्रभाव समाप्त हो जाएगा और इसी संवत्सर का नाम अानंद हो जाएगा।

सुख-समृद्धि के लिए खरीदी का विशेष दिन

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