वार्ड साफ तभी बढ़ेगी शहर की स्वच्छता रैकिंग; इस बार वार्ड स्तर पर टीम तय करेगी कितना साफ है हमारा जशपुर शहर

Jashpuranagar News - भास्कर संवाददाता | जशपुरनगर स्वच्छता के जरिए स्वरोजगार के मामले में जशपुर नगरपालिका को सिटी स्वच्छता...

Dec 04, 2019, 08:10 AM IST
भास्कर संवाददाता | जशपुरनगर

स्वच्छता के जरिए स्वरोजगार के मामले में जशपुर नगरपालिका को सिटी स्वच्छता लाइवलीहुड का देशभर में पहला स्थान प्राप्त हो चुका है। उसके बाद स्वच्छता रैंकिंग में भी जशपुर नगरपालिका ने राष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठ स्थान प्राप्त किया है, पर अब शहर की इस उपलब्धि को कायम रखने की जिम्मेदारी हम सबकी है। आपके घर और आंगन साफ होंगे तभी शहर को स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर अंक मिल पाएगा, क्योंकि पहली बार स्वच्छता रैंकिंग का निर्धारण वार्ड स्तर पर हो रहा है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में स्वच्छता की जांच वार्ड स्तर पर होगी। शहर की सड़क व चौराहे चाहे जितने भी साफ हों यदि वार्डों में गंदगी फैली रही तो अंक कटेगा।

स्वच्छता के मामले में शहर की उपलब्धि की बात करें तो 6 मार्च को पालिका परिषद को राष्ट्रीय स्वच्छता सम्मान से नवाजा जा चुका है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुए कार्यक्रम में भारत सरकार के आवास एवं शहरी विकास राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जशपुर नगरपालिका अध्यक्ष हीरूराम निकुंज एवं सीएमओ को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र दिया था। इससे पहले 15 फरवरी को लाइवलीहुड अवार्ड में पहले स्थान का प्रमाण पत्र, स्मृति चिह्न एवं 10 लाख रुपए पुरस्कार की राशि जशपुर पालिका को मिला था। कम संसाधन के बावजूद जशपुर ने यह उपलब्धि हासिल की है, पर वार्ड स्तर पर जांच में नगरपालिका को यह स्थान हासिल करना मुश्किल होगा, क्योंकि वार्डों में अभी भी नालियों की सफाई व प्रतिदिन कचरा कलेक्शन पर ध्यान नहीं है। खास तौर पर शहर के डीपाटोली, सरनाटोली व करबला रोड, चीरबगीचा एरिया को साफ करना पालिका के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है। डीपाटोली, सरनाटोली, गढ़ाटोली ऐसी बस्ती है जहंा आज भी खुले स्थानों पर कचरों के ढ़ेर देखे जा सकते हैं। डाेर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने वाली महिलाएं भी इन इलाकों के सिर्फ मुख्य मार्ग के किनारे वाले घरों से कचरा कलेक्शन कर पा रही हैं।

संसाधन कम हैं. नगरपालिका के पास संसाधनों की कमी है। इसके बावजूद जशपुर का नाम देशभर में रौशन हो चुका है। पूूरे 20 वार्ड से कचरा कलेक्शन के लिए नगरपालिका के पास सिर्फ 22 रिक्शा, 05 ऑटो पीटर, 3 ट्रैक्टर, ट्राली और कंटेनर हैं।

बना रहेगा स्थान


कचरे, आवारा मवेशी की शिकायत यहां करें. सड़क, कॉलोनी में कही कचरा दिखाई दे, आवारा मवेशी घूमते पाए तो पालिका के
शिकायतों के निपटान में ए-ग्रेड. शत प्रतिशत समस्याओं के निपटान के लिए भी जशपुर पालिका को एक ग्रेड मिल चुका है। गत माह ऑनलाइन जितनी समस्याएं पालिका को प्राप्त हुईं थी उनका निराकरण समय पर कर लिया गया था।

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ऐसे बढ़ी जशपुरनगर की रैंक, अब फिर नंबर-1 की तैयारी...

 2018  2019  2020

अंक बढ़ाने के लिए 20 बिंदु, इसमें से 12 बिंदुओं पर अमल, बाकी पर काम की जरूरत

पालिका द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण पर अंक बढ़ाने के लिए तय 20 बिंदुओं में से 12 पर अमल किया जा रहा है। सर्विस प्रोवाइडर जुड़ाव, होम कंपोस्टिंग यानी गीले कचरे को खाद में बदलने के लिए घरों में कंपोस्टिंग पर पालिका को काम करना होगा। इस मामले में पालिका शून्य है। हानिकारक कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेसिंग करने, निर्माण कचरे को समय पर हटाने, सेनिटेशन यानी महिला शौचालय और कलेक्टोरेट के सामने सुलभ शौचालय को सुधारकर उसे शुरू कराने की जरूरत है।

डोर टू डोर संग्रहण: 20 वार्डों में 22 कचरा कलेक्शन रिक्शा हैं। हर रिक्शों की निगरानी के लिए सुबह निकलते है सीएमआे।

स्रोत पर पृथकीकरण:

घर, दुकान, होटल, धर्मशाला पर ही गीला-सूखा कचरा अलग लेकर ही एसएलआरएम और कंपोस्ट यूनिट पहुंचा रहे हैं।

मॉनिटरिंग: निगम निजी स्रोतों से मॉनिटरिंग हो रही है, किसी भी क्षेत्र में निरीक्षण किया जा सकता है।

महिलाओं को आजीविका: कचरा लेने वाली 64 महिलाओं को स्वरोज से जोड़ने की योजना बनाई है।

पुराने कचरे की प्रोसेसिंग:

ट्रेंचिंग ग्राउंड पर लंबे समय से रखे कचरे को अलग विधि से उपयोगी बनाने का काम करना।

जीरो लैंड फील: ट्रेंचिंग ग्राउंड पर अनुपयोगी कचरे को जमीन में दबाने की जगह उसका उपयोग किया जा रहा है ।

सर्विस प्रोवाइडर का जुड़ाव: जो संस्थाएं इस क्षेत्र में काम करने की इच्छुक हैं, उन्हें कचरे के निपटान से जोड़ रहे हैं।

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सेनेटरी कर्मचारियों को लाभ: स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को दस्ताने, मास्क दिए हैं। उनका मासिक चैकअप नहीं करा रहे हैं।

वार्डों में 100 फीसदी सफाई: वार्डों में 100% झाडू लगवाना चुनौती है। वर्तमान में केवल मुख्य मार्गों पर ही सुबह-शाम झाडू लगवाई जाती है।

डस्टबिन फ्री सिटी: निगम 2018 और 2019 के सर्वेक्षण में पालिका 6200 परिवार को डस्ट बिन बांटा जा चुका है।

सिंगल यूज प्लास्टिक बेन: पालिका द्वारा सिंग्ल यूस पालििथन पूरी से बैन है। समोसे की चटनी के लिए भी टिफिन ले जानी होती है।

थ्री-आर के लिए प्रयास:

रिड्यूज, रि-यूज और रिसाइकिल पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन इन उत्पादों की सेल नहीं हो रही है।

थोक कचरा उत्पादन प्रोसेसिंग: जिन संस्थानों से थोक कचरा चाहे गीला हो या सूखा, प्रोसेसिंग सही तरीके से नहीं हाे रही है।

20 अंक होम कंपोस्टिंग: गीले कचरे को खाद में बदलने के लिए होम कंपोस्टिंग यूनिट लगाने के क्रम में अब तक नगर पालिका अब भी पीछे है।

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चार हजार अंकों का सर्वेक्षण

सिटीजन फीडबैक 1000

मुअायना 1000

प्रमाणीकरण 1000

सेवा स्तर पर सुधार 800

रैंकिंग में सुधार 200

गीला कचरा प्रोसेसिंग:

घरों, होटलों से निकलने वाले गीले कचरे को वहीं पर प्रोसेस करके उपयोगी बनाने के लिए प्रेरित कर रहे।

सूखा कचरा प्रोसेसिंग: सूखे कचरे को ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचाने के अलावा उसे उपयोगी बनाने में जुटे है।

हानिकारक कचरा प्रोसेसिंग: हानिकारक कचरे को ट्रेंचिंग ग्राउंड या कलेक्शन सेंटर पहुंचाने के स्थान पर वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेसिंग करने में पूरी कामयाबी नहीं मिली।

निर्माण कचरे की प्रोसेसिंग: जर्जर मकान टूटने या खुदाई के बाद निकले मटेरियल को उपयोगी बनाने के लिए एमआर-5 पर सीएंडडी प्लांट नहीं लगाया है।

स्वच्छता एप शिकायत: स्वच्छ भारत मिशन स्वच्छता एप पर आने वाली शिकायतों को हल कर फीडबैक जारी करना ताकि लोग संतुष्ट हो सकें। पालिका को ए-ग्रेड मिला।

सेनिटेशन: शौचालय में सफाई के अलावा कर्मचारियों की मौजूदगी। उनमें लोगों की सुविधा के लिए पानी, साबुन और महिलाओं के सेनेटरी नेपकिन बदलने की जगह मुहैया करवाने में सफलता नहीं मिली। कलेक्टोरेट के सामने सुलभ शौचालय पानी के अभाव में बंद पड़ा है, इसका असर पड़ेगा।

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