तात्कालीन जेलर अौर मुख्य प्रहरी ने कैदी की मजदूरी के पैसे को फर्जी खाते में करा दिए ट्रांसफर

Jashpuranagar News - भास्कर संवाददाता | जशपुरनगर िजला जेल में एक अनोखे तरीके से जेलर और मुख्य प्रहरी द्वारा पैसा गबन करने का मामला...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:06 AM IST
Jashpur News - chhattisgarh news the then jailer and chief sentinel transferred the money of the prisoner39s wages to a fake account
भास्कर संवाददाता | जशपुरनगर

िजला जेल में एक अनोखे तरीके से जेलर और मुख्य प्रहरी द्वारा पैसा गबन करने का मामला सामने आया है। जिसमें तात्कालीन जेलर उत्तम पटेल और मुख्य प्रहरी होतम सिंह मौर्या ने मिलकर फर्जीवाड़ा करते हुए पीड़ित पक्ष की राशि का गबन कर िदया। शिकायत के बाद जेल प्रशासन के साथ-साथ पुलिस द्वारा इसकी जांच की जा रही है। जांच के बाद जेलर और मुख्य प्रहरी के खिलाफ मामला दर्ज हो सकता है।

मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2005 में दुलदुला थाना क्षेत्र के िसमड़ा घटोरा के निरंजन राम ने अपनी मां की हत्या करने पर जेल चला गया था। निरंजन के जेल चले जाने के बाद उसके घर में उसके पिता सदई यादव और भाई निधि यादव ही बचे थे। हत्या के मामले में निरंजन यादव को न्यायालय से आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई थी। सजा सुना देने के बाद उसे जशपुर जेल से अंबिकापुर जेल भेज दिया गया था। जहां निरंजन यादव जेल में रहते हुए जेल के अंदर ही काम करता रहा। जिससे उसे काम के बदले में पारिश्रमिक भी मिलता था।

फर्जी सील साइन किया

जेल द्वारा पीड़ित पक्ष की राशि देने से पहले उसकी जानकारी और प्रमाण पत्र संबंधित थाना क्षेत्र से प्राप्त किया जाता है। निशा यादव का सदई यादव की फर्जी बेटी बनाने के लिए दुलदुला थाने का फर्जी सील-साइन का उपयोग किया। तत्कालीन जेलर और मुख्य प्रहरी ने मिलकर निशा यादव को सदई यादव की बेटी बनाने के लिए दुलदुला थाने का फर्जी सील और थाना प्रभारी का फर्जी हस्ताक्षर कर पीड़ित का प्रमाण पत्र जारी कर दिया था।

जेलर और मुख्य प्रहरी ने मिलकर बना दिया फर्जी बेटी

पीड़ित सदई यादव की कोई भी बेटी नहीं है उसके दो ही बेटे हैं। एक निधि यादव और एक निरंजन यादव। जिसमें से निरंजन यादव अपनी मां की हत्या के आरोप में सजा काट रहा था। सदई यादव को जेल से जानकारी मिली की उसके पीड़ित पक्ष की राशि का भुगतान उसकी बेटी को किया गया है तो उसने फर्जीवाड़े की शिकायत फिर से जिला जेल में की। जांच शुरू की गई तो पता चला कि तात्कालीन जेलर उत्तम पटेल और मुख्य प्रहरी होतम सिंह मोर्या द्वारा फर्जी शपथ पत्र तैयार करते हुए निशा यादव को बेटी बना दिया था। फर्जी शपथ पत्र में सदई यादव का अंगूठा का निशान भी फर्जी तरीके से लगाया था। सदई अंगूठा ना लगाते हुए हस्ताक्षर की जगह पर नाम लिखता है। फर्जी तरीके से पीड़ित पक्ष की राशि का भुगतान करने के लिए निशा यादव के नाम ने रायगढ़ के कोटक महेंद्रा बैंक में खाता खुलावा कर पिड़ित पक्ष की राशि का 21 हजार रुपए का भुगतान खाते में कर दिया गया था।

शिकायत होने के बाद मुख्य प्रहरी पहुंचाने गया था पीड़ित पक्ष की राशि

सदई यादव द्वारा मामले की शिकायत करने के बाद मुख्य प्रहरी होतम सिंह मोर्या पीड़ित पक्ष की राशि का भुगतान करने के लिए सदई यादव के घर एक अन्य व्यक्ति को लेकर फरवरी 2019 में गया था। उसके द्वारा सदई यादव के घर पहुंचने पर ग्रामीणों ने उन्हें घेर कर बंधक बना लिया गया था। जिसके बाद दुलदुला पुलिस ने मौके पर पहुंच कर जेल के मुख्य प्रहरी होतम सिंह मोर्या को पहचान कर उसे छुड़वाया था। इस मामले के बाद मुख्य प्रहरी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। जिसमें उसने कहा है कि तत्कालीन जेलर उत्तम पटेल के कहने पर ही वह पीड़ित पक्ष की राशि देने के लिए सदई यादव के घर गया था।

मामले की जांच कोतवाली में चल रही है


शिकायत की जांच की जा रही है


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