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आज नहीं मिलेगी एक भी बस, कल भी नियमित रूटों पर कम चलेंगी गाड़ियां
{फूलों को पानी में उबालकर बना लेते
हैं कलर
{इस रंग से त्वचा को कोई नुकसान नहीं
आदिवासी बाहुल्य जशपुर में आज भी प्राकृतिक रंग गांव-गांव में बनाए जाते हैं। इस वर्ष भी धवई के फूलों से रंग कई गांव में तैयार किए जा रहे हैं। रंग बनाने के लिए दो दिन पहले ही फूलों को पानी में उबालकर छोड़ दिया गया है।
जिले के जशपुर, मनोरा, सन्ना, बगीचा, आस्ता के जंगलों में धवई फूलों की बहुलता है। वहीं नीचे घाट कहे जाने इलाके कुनकुरी, दुलदुला, पत्थलगांव, फरसाबहार के जंगलों में पलाश के पेड़ काफी संख्या में पाए जाते हैं। धवई फूल का समर्थन मूल्य 32 रुपए प्रति किलो तय किया गया है। जंगल में एक झाड़ीनुमा पौधों की शाखाओं पर लाल-लाल सुंदर फूल लड़ियों में लगा करते थे। गांव की औरतें इनके फूलों को इकट्ठे कर तथा सुखाकर गल्ला व्यापारियों को भी बेचा जाता है। हजारों सालों से हम फूलों कि सुंदरता को देखते और महक का आनंद लेते आए हैं। उनके इन्हीं रंगों में उनकी बहुत सारी खूबियां छिपी हुई हैं। अभी तक अधिकांश लोग यही जानते थे।
इन नंबरों पर मिलेगी मदद
थाना मोबाइल नंबर
{कोतवाली 07763-223322
{जशपुर 9479193608
{तपकरा 9479193609
{फरसाबहार 9479193610
{कुनकुरी 9479193613
{बागबहार 9479193611
{कांसाबेल 9479193612
{पत्थलगांव 9479193616
{बगीचा 9479193617
{सन्ना 9479193614
{आस्ता 9479193618
{लोदाम 9479193626
{मनोरा 9479193621
{पंड्रापाठ 9479193622
{कोतबा 9479193624
{दोकड़ा 9479193625
{सोनक्यारी 9479193627
होली में आज उड़ेगा गुलाल, फाग गीतों के बीच मोहल्लों में निकेलगी टोली
भास्कर संवाददाता | जशपुरनगर
होली पर आज समूचा शहर गुलाल से सराबोर होगा। शहर के बालाजी मंदिर में होली की विशेष व्यवस्था है। यहां पहुंचकर भी लोग होली का प्राकृतिक रंगों का आनंद ले सकते हैं। होली से पहले सोमवार की शाम को शहर में जगह-जगह होलिका दहन किया गया। मुख्य रूप से शहर के इंद्रडीपा में होलिका दहन किया गया।
होली पर्व को लेकर बसने अलग-अलग तैयारी कर रखी है। होली में शहर के विभिन्न मोहल्लों से टोलियां निकलेंगी। इन टोलियों का मिलन शहर के महाराजा चौक में होने की संभावना है। दोपहर 12 बजे टोलियां सभी मोहल्लों से निकल चुकी होंगी। रविवार और साेमवार को गुलाल की जमकर बिक्री हुई।
बालाजी मंदिर में भगवान के चरणों में गुलाल समर्पित करने के बाद लोग एक दूसरे को गुलाल लगाकर गले मिलकर पर्व की बधाई देेते हैं। होली पर सगे संबंधी व करीबी दोस्तों के घर आने-जाने का परंपरा आज भी कायम है।
हर्बल रंग बेहतर - हर्बल कलर को भी छुड़ाने में पानी का कम उपयोग होता है। इस प्रकार इस तरह के रंगों के उपयोग से पानी की काफी बचत होगी। होली खेलने के लिए केमिकल रंगों से बेहतर हर्बल रंग को माना जाता है। हर्बल रंगों से किसी प्रकार की एलर्जी की संभावना कम होती है। केमिकल युक्त रंगों के दुष्प्रभाव सामने आते रहते हैं। जिसे देखते हुए अब लोग हर्बल रंगों की तरफ आकर्षित होने लगे हैं।
होली पर भी कुनकुरी में जल संकट, इंटेक वेल सहित दो वार्डों की मोटर खराब
भास्कर संवाददाता | कुनकुरी
लम्बे समय से जल संकट से जूझ रहे कुनकुरी नगर को होली में भी इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। माह भर से चल रहे पेयजल संकट से सप्ताह भर पहले आंशिक रूप से निजात मिल पाई थी। वहीं दो दिन पहले इंटेक वेल की मोटर के काम नहीं करने तथा वार्ड क्रमांक 5 एवं 10 के बोर की मोटर पुनः खराब हो जाने से होली में नगर की पेयजल सप्लाई पुनः बाधिक हो गई है।
लगभग 25 दिनों तक इंटेक वेल से जल शोधन संयत्र तक पानी आने की व्यवस्था भंग होने से नगर के अधिकांश भाग में ओवर हेड टंकियों से पेयजल आपूर्ति बंद हो गई थी। भारी आंदोलन के बाद जैसे तैसे बहाल हुई व्यवस्था सप्ताह भर भी नही चल पाई और सप्लाई में लगी मोटरों के खराब होने का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। वार्ड क्रमांक 5 एवं 10 के बोर में लगी मोटरों को निकालकर सुधार कार्य सोमवार को शुरू किया गया है तथा इंटेक वेल के मोटर के भी काम नहीं करने की जानकारी मिली है। नगर में लगातार बाधित हो रही पेयजल सप्लाई से लोगों की परेशानियां बढ़ गई है। होली में जल आपूर्ति में आये व्यवधान से नगरवासियों में रोष व्याप्त है। इस संबंध में जानकारी लेने के लिए नगर पंचायत सीएमओ से मोबाइल पर सम्पर्क किया गया।
बेहतर रंग: प्रोफेसर अमरेंद्र
एनईएस कॉलेज के अर्थशास्त्र प्राध्यापक डॉ.अमरेंद्र सिंह कहते कि ग्रामीणों के लिए फूल काव्य का नहीं अर्थशास्त्र है। फूलों का समर्थन मूल्य तय होने से वनवासी संग्राहकों को भी इस योजना का पूरा लाभ मिलेगा जिससे उनकी आर्थिक उन्नति तो होगी ही साथ ही रोजगार के द्वार भी खुल सकेंगे। होली रंगों का त्योहार है। रंगों के इस त्योहार में सिंदूरी लाल धवई और पलाश के फूल का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है, क्योंकि लंबे समय से इसके फूलों का प्रयोग रंग बनाने के लिए किया जाता है। इन रंगों का प्रयोग होली खेलने के लिए किया जाता है।
ऐसा भी परंपरा कि अंगारों पर चलकर महिलाएं देश की समृद्धि की करती हैं कामना
प्राकृतिक रंगों से जशपुर में खेली जाती है होली, धवई के फूलों से बनाए हैं रंग
भास्कर संवाददाता | जशपुरनगर. होली को लेकर आज बस सेवा पूरी तरह से बंद रहेगी। जशपुर से किसी भी स्थान पर आज एक भी बसें रवाना नहीं होंगी। कल भी बसों की संख्या कम रहेगी। इसलिए यात्री दाे दिन यात्रा का कार्यक्रम टालें तो बेहतर होगा। मोटर कर्मचारी एसोसिएशन के सुनील मिश्रा ने बताया कि होली के कारण सुबह से एक भी बस नहीं चलेगी। क्योंकि सभी मोटर कर्मचारी छुट्टी पर रहेंगे। बुधवार को भी बस सेवा पूरी तरह से बहाल नहीं हो पाएगी। रात्रिकालीन लगभग सभी बसें बुधवार की शाम से चालू हो जाएंगी पर दिन में चलने वाली बसों की संख्या कम होगी। लंबी दूरी जैसे जशपुर से कोरबा, रायगढ़, अंबिकापुर चलने वाली बसों की संख्या कम रहेगी। रांची के लिए भी उतनी ज्यादा बसें नहीं मिलेंगी। दिनभर में 8 से 10 बसें ही रांची रूट के लिए रवाना होगी।
दो बार होगी पानी की सप्लाई: होली के दिन पानी की कमी महसूस नहीं होने दी जाएगी। नगरपालिका सीएमओ बसंत बुनकर ने बताया कि होली काे देखते हुए मंगलवार को दिन में दो बार पानी की सप्लाई की जाएगी। सुबह के नियमित समय के बाद दोपहर दो बजे फिर से पानी की सप्लाई की जाएगी।
होली खुशियों भरी हो इसके लिए यह व्यवस्था
पुलिस की 5 पेट्रोलिंग टीम, हर चौराहों पर तैनाती: पुलिस विभाग ने होली पर हुड़दंगियों को रोकने और शांतिपूर्ण होली मनाने के लिए सुरक्षा की खास व्यवस्था रखी है। एसडीओपी राजेन्द्र सिंह परिहार ने बताया कि शहर के सभी मुख्य चौराहों पर पुलिस के जवान तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा पांच पेट्रोलिंग पार्टी दिनभर शहर के विभिन्न मोहल्लों का भ्रमण करेगी। शराब के नशे में वाहन चलाने, होली पर शांति व्यवस्था को बिगाड़ने वालों को तत्काल हिरासत में लिया जाएगा।
आपातकाल वार्ड में तैनात रहेंगे डॉक्टर: होली के दिन यदि कोई बीमार पड़ जाएंगे तो घबराने की जरूरत नहीं है। आपातकाल सेवा के लिए संजीवनी व जिला अस्पताल के एंबुलेंस तैयार हैं। जिला अस्पताल के आपातकाल चिकित्सा वार्ड खुला रहेगा जहां चौबीस घंटे डॉक्टर व स्टाफ की टीम रहेगी। दवाओं का भी पर्याप्त स्टाक रखा गया है।
रात 6.30 बजे होलिका दहन।
जशपुर/शेखरपुर | अगर दहकते अंगारों में चलकर कोई देश के लिए सुख-शांति की कामना करे, यह सोचने में अजीब लगता है। पर होलिका दहन के दिन जिले के बंजारा समाज की यही परंपरा वर्षों से चली आ रही है। सोमवार की शाम बंजारा समाज के लोगों ने होलिका की अग्नि की परिक्रमा कर एवं फाग गीत गाकर पारंपरिक तरीके से होली मनाई। ढोलक व झांझ के साथ फाग गीतों ने होली के उत्साह को दोगुना कर दिया। फाल्गुन पूर्णिमा की रात समाज के सदस्य गांव में एक जगह एकत्र हुए। वहां उन्होंने रतजगा कर ढोलक व झांझ के साथ पारंपरिक फाग गीत गाया। ब्रह्म मुहूर्त में होलिका दहन किया गया। दिनभर होली खेलने के बाद में गांव व समाज के सदस्य होलिका दहन स्थान पर फिर से एकत्र हुए। जहां उन्होंने अग्निदेव को गुड़, घी, धूप, अगरबत्ती व नारियल अर्पित किया। इसके बाद होलिका की आग के अंगारे पर नंगे पांव में सात बार परिक्रमा किया। समाज के लोगो का कहना है कि यह परंपरा समाज में बरसों से चली आ रही है।
मान्यता यह भी: मोती बंजारा ने बताया कि ऐसा करने पर गांव व समाज के लोगों में अनहोनी घटना नहीं होती। आग से सात परिक्रमा करने के बाद दूध व गंगाजल से होलिका को ठंडा किया गया।
इंटेकवेल की मोटर खराब
नीलम टोप्पो, प्रभारी पेयजल, नगर पंचायत कुनकुरी
इंटेक वेल सहित दो वार्डो की मोटर खराब।
धवई फूल का पेड़।
यह भी जानें: हर साल 50 लाख के फूल लखनऊ भेजे जाते हैं
व्यवसायी गोपाल सोनी बताते है कि समर्थन मूल्य घोषित होने से पहले से सन्ना, बगीचा, पण्डरापाट, सोनक्यारी, मनोरा, बगीचा में बाहर के व्यापारी धवई फूल की खरीददारी करने पहुंचते है। लगभग 50 लाख का फूल प्रतिवर्ष लखनऊ के लिए जाता है। पंडरापाठ के मिथलेश कहते है कि स्थानीय लोगो को त्योहारों के मौसम में अच्छी आय हो जाती है। ग्रामीण बीरसाय राम , जगमोहन राम , धनमनी बाई , प्रमिला तिर्की बताते है कि उनके पूर्वज इस फूल को स्थानीय बाज़ार में बेचते रहे है। पहले इसकी अच्छी कीमत नहीं मिलती थी अब अच्छी मिलती है, जिससे होली का त्यौहार हम अच्छे से मना पाते है।
प्राकृतिक रंग लोगों के स्वास्थ्य के
लिए भी बेहतर: डॉ.प्रशंात
कन्या कॉलेज के वनस्पति शास्त्र के सहायक प्राध्यापक डॉ.प्रशांत सिंह कहते है कि कृत्रिम रासायनिक रंगों की सुलभता ने भले ही लोगों को प्रकृति से दूर कर दिया हो, लेकिन रासायनिक रंगों से होने वाले नुकसान और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के कारण लोग दोबारा प्रकृति की ओर रुख करते हुए लोग धवई और पलाश के फूलों का इस्तेमाल रंगों के लिए करने लगे हैं। इसको धवई या धंवई कहते हैं। इसके पेड़ों में इसी समय फूल लगता है। इसके लाल रंग के छोटे-छोटे फूल देखने में बहुत खूबसूरत तो होते ही हैं साथ ही इनका आयुर्वेदिक महत्व भी कम नहीं है। इसके फूल में अतिसार, प्रदर , पेचिस और बांझपन के साथ-साथ किडनी की लाइलाज बीमारियों को ठीक करने की क्षमता होती है।