6 साल बाद पशुओं की गिनती, जिले में गाय-बैलों की संख्या 14 हजार कम हुई

Kanker News - 20वीं पशुगणना में जिले में गाय-बैलों के अलावा भैंसों की संख्या में तेजी से कमी बेहद चौंकाने वाली है। पिछले कुछ...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:10 AM IST
Kanker News - chhattisgarh news after 6 years the number of cattle the number of cows and bulls in the district decreased by 14 thousand
20वीं पशुगणना में जिले में गाय-बैलों के अलावा भैंसों की संख्या में तेजी से कमी बेहद चौंकाने वाली है। पिछले कुछ वर्षों में जिले में तेजी से गाय-बैलों की संख्या में कमी आई है। दूसरी ओर बकरी, मुर्गियों और सुअरों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

19वीं पशुगणना 2012 में हुई थी जिसके 6 साल बाद 20वीं पशुगणना 1 अक्टूबर 2018 से शुरू होकर 1 मार्च 2019 तक चली। जिले में 40 प्रगणकों के अलावा 10 सुपरवाइजर और 10 स्क्रूटनी अफसरों ने यह कार्य किया। एक प्रगणक पर चार हजार परिवारों के पशुगणना कार्य का जिम्मा था। 20वीं पशुगणना के अनुसार जिले में गाय-बैलों की संख्या 3.43 लाख है जो 19वीं पशुगणना के मुकाबले 14 हजार कम है। 19वीं पशुगणना में जिले में 3.57 लाख गाय-बैल थे। जिले के 7 विकासखंडों में से 6 में गाय-बैलों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। केवल अंतागढ़ विकासखंड में 13 हजार गाय-बैलों की संख्या बढ़ी है।

भैंसों की संख्या 14661 घट गई, पहले 36 हजार थीं

गाय, बैल के साथ भैंस की संख्या में भी तेजी से कमी आई है। 19वीं पशुगणना के अनुसार जिले में 36,477 भैंस थीं जो 20वीं पशु गणना में घटकर 21,816 हो गई है।

गाय-बैलों की संख्या घटने के प्रमुख कारण

1. चारागान की कमी - गांवों में तेजी से मकान और अन्य निर्माण कार्य होने से चारागान के लिए जगह नहीं बचती। गाय-बैलों को चारा नहीं मिल पा रहा है।

2. दूध का बाजार नहीं मिलना- दूध की सही कीमत और बाजार नहीं मिलने से लोग गाय पालने में रुचि नहीं ले रहे हैं।

3. कृषि कार्य में ट्रैक्टर का उपयोग- बैलों का उपयोग कृषि कार्य में खेत जोतने और बैलगाड़ी में सामान ढोना होता था। इन कार्यों को ट्रैक्टर से कराए जाने से बैल पालन लोग कम कर रहे हैं।

इनकी संख्या घटी

पशु 19वीं पशुगणना 20वीं पशुगणना

गाय बैल 3,57,477 3,43,277

भैंस 36,477 21,816

कुत्ते 12,210 11755

भेड़ 7995 2103

बतख 13,825 5776

इनकी संख्या बढ़ी

इनकी संख्या बढ़ी

बकरी 164748 186019

मूर्गी 550716 890070

सुअर 45,573 63,139

गधा 0 6

घोड़ा 4 12

खरगोश 53 335

बकरी 164748 186019

मूर्गी 550716 890070

सुअर 45,573 63,139

गधा 0 6

घोड़ा 4 12

खरगोश 53 335

बकरी, मुर्गी, सुअर पालन में बढ़ रही रुचि

जिले में बकरी, मुर्गी के अलावा सुअरों की संख्या में बढ़ोतरी बता रही है कि जिले में इनके पालन के प्रति लोग रुचि ले रहे हैं। 20वीं पशुगणना में बकरियों की संख्या 22 हजार बढ़कर 1.86 लाख हो गई है। मुर्गियों की संख्या 3.40 लाख बढ़कर 8.90 लाख हो गई है। सुअरों की संख्या भी 45 हजार बढ़कर 63 हजार हो गई है।

पशुगणना के आधार बनती है पॉलिसी

जिला पशु चिकित्सक डॉ. संजय शर्मा ने कहा पशुगणना को आधार बनाकर ही शासन पॉलिसी लागू करती है। गोवंशीय पशुओं की संख्या में कमी तो बकरी, मुर्गी की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

चारागन की कमी प्रमुख कारण: उपसंचालक

उपसंचालक पशु चिकित्सा डॉ. नरेंद्र श्रीवास्तव ने कहा गोवंशीय पशुओं की संख्या में कमी का प्रमुख कारण अंचल में चारागन क्षेत्र की कमी होना है।

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