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जगह तय किए बिना ही प्रशिक्षण के लिए बुलाया, बच्चों संग भटकती रहीं मितानिनें
150 मितानिनों को 24वें चरण के 7 दिवसीय प्रशिक्षण के लिए 12 मार्च को बुलाया गया था। मितानिन तो पहुंच गई पर जिम्मेदारों ने प्रशिक्षण स्थल तय नहीं किया था। मितानिन पहले गोड़वाना भवन पहुंची जहां सामान्यत: प्रशिक्षण होता है लेकिन यहां सूचना बोर्ड पर लिखा था प्रशिक्षण सिंधु भवन में है तो वहां पहुंचे। यहां मितानिन पहुंचीं तो पता चला प्रशिक्षण यहां भी नहीं हो रहा है। काफी देर भटकने के बाद पता चला प्रशिक्षण बस स्टैंड के पीछे सांस्कृतिक भवन में होगा। आयोजकों की लापरवाही से मितानिन दिनभर एक से दूसरे स्थान में छोटे बच्चे लेकर भटकती रही, इसेक कारण पहले दिन प्रशिक्षण हुआ ही नहीं। आयोजकों की किरकिरी होने से शाम को वापस मितानिनों को गोंडवाना भवन शिफ्ट किया गया।
जैसे तैसे मितानिन वहां पहुंची तो यहां भी अव्यवस्था का आलम नजर आया। एक ही हाल में मितानिनों को ठूंस दिया गया। भोजन भी उन्हें चार बजे दिया गया। उन्हें चाय नाश्ता तक नहीं दिया गया।
150 मितानिनों के लिए एक ही शौचालय
पुराने प्रशिक्षण स्थल गोड़वाना भवन को बदलकर दूसरी जगह करने से अव्यवस्था उत्पन्न हो गई। बस स्टैंड के पीछे सांस्कृतिक भवन में महज एक शौचालय है। 150 मितानिनों के लिए एकमात्र शौचालय बेहद कम है। यही नहीं यहां के हाल में चार पंखे लगे हैं जिनमें से दो खराब पड़े हैं। इस संबंध में बीएमओ एचआर ठाकुर से बात की गई तो उनका कहना था मैं बाहर हंू। किसी दूसरे डॉक्टर को फोन लगाकर पता लगाओ।
दूर-दूर से पहुंचीं मितानिन
मितानिन ग्राम तरांदुल, धनेली, कच्चे, चिचगांव, बारवी मूंगवाल, चारगांव आदि से 20 से 30 किमी सफर तय कर यहां पहुंचीं थीं। मितानिनों को उनके कार्य के लिए कोई वेतन तक नहीं मिलता है। वे सेवाभाव से कार्य करती हैं।
बीपीएम ने कहा - अब समस्या ठीक कर दी है
मितानिन कार्यक्रम के बीपीएम प्रशांत मरसकोले ने बताया प्रशिक्षण स्थल बदला गया जिसके चलते थोड़ी परेशानी जरूर हुई। पहले दिन थोड़ी समस्या हुई जिसे ठीक कर लिया जाएगा।
प्रशिक्षण लेने पहुंची मितानिनें एक से दूसरी जगह भटकती रहीं।