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सरकारी अस्पताल का ड्रेसर घर में चलाता था क्लिनिक, 9 साल की छात्रा को दी दवा, मौत

Kanker News - उल्टी-दस्त से पीड़ित एक स्कूली छात्रा की मौत हो गई। चौंकाने वाली बात यह है कि सरोना में अस्पताल व सीनियर डॉक्टर...

Aug 22, 2019, 09:15 PM IST
उल्टी-दस्त से पीड़ित एक स्कूली छात्रा की मौत हो गई। चौंकाने वाली बात यह है कि सरोना में अस्पताल व सीनियर डॉक्टर होने के बावजूद परिजन छात्रा का इलाज एक ड्रेसर से करा रहे थे। ड्रेसर ने सरोना में निजी मकान में क्लिनिक भी बना रखी है जहां से इलाज कर ग्रामीणों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है।

सरोना नर्सरीपारा में अपने मामा के घर रहकर पढ़ाई करने वाली चौथी की 9 वर्षीय छात्रा शीतल सुरोजिया पिता श्रवण को मंगलवार शाम उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। छात्रा का मामा लालचंद उसे इलाज कराने सरोना तहसील कार्यालय के सामने निजी मकान में चल रही क्लिनिक ले गया। वह क्लिनिक सरकारी अस्पताल में ड्रेसर के रूप में पदस्थ छबिलाल नेताम चलाता है। ड्रेसर ने छात्रा का इलाज करते दवा देकर वापस घर लौटा दिया। परिजनों ने बच्ची की स्थिति को देखकर शंका भी जाहिर की लेकिन ड्रेसर उन्हें अपनी दी हुई दवा को बेहतर बताते कहा कि सुबह तक ठीक हो जाएगी। परिजन ड्रेसर की बात पर भरोसा कर लौट गए। ड्रेसर ने दस्त होने के बावजूद उसे ओआरएस घोल तक नहीं दिया। बुधवार सुबह छात्रा की घर पर मौत के बाद ड्रेसर द्वारा इलाज करने का मामला खुल गया। बुधवार दोपहर छात्रा का शव सारंडा ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने मामले की जांच की मांग की है।

मृतक छात्रा।

छात्रा को उल्टी-दस्त की शिकायत थी, परिजन ने मामले में जांच की मांग की

सारंडा में छात्रा की मौत के बाद उसके घर में जुटे परिजन व ग्रामीण।

जांच जारी, दोषी पर होगी कार्रवाई: बीएमओ

खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह ने कहा मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

क्षेत्र के लोग ड्रेसर को कहते हैं डॉक्टर

छबिलाल नेताम ग्राम देवरी बालाजी स्वास्थ्य केंद्र में ड्रेसर के रूप में पदस्थ है। वहां सरोना से आना जाना करता है। ग्रामीणों के अनुसार ड्रेसर इलाके में घूम-घूम कर इलाज करता है। लोग उसे डॉक्टर के नाम से पुकारते हैं। उसके इलाज में पहले भी घटनाएं हो चुकी है। दो साल पहले मुड़पार का एक युवक अपाहिज हो गया था। एक ग्रामीण की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद न जांच हुई और न ही कोई कार्रवाई।

नर्सरीपारा पहुंचकर विभाग की टीम ने लगाया कैंप

उल्टी-दस्त से छात्रा की मौत की खबर लगते ही डॉक्टरों की एक टीम तत्काल नर्सरीपारा पहुंची और कैंप लगाकर ग्रामीणों की जांच की। कुछ ग्रामीणों में सामान्य सर्दी-जुकाम व बुखार की शिकायत मिली जिन्हें मौके पर दवा दी गई। टीम में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरोना के डॉ. सुशील गुप्ता, स्वास्थ्य कार्यकर्ता बृजभूषण साहू, संगीता नेताम शामिल थे। डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि नर्सरीपारा में उल्टी-दस्त की कोई शिकायत नहीं मिली है।

15 दिन पहले जच्चा-बच्चा की गई थी जान

इस घटना के 15 दिन पहले उपस्वास्थ्य केंद्र दुधावा में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। नवजात की स्थिति खराब होने के बावजूद वहां नर्स ने लापरवाही बरतते शिशु को सीधे धमतरी रेफर कर दिया था। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण शिशु की मौत हो गई थी। प्रसव के बाद महिला की जब तबीयत बिगड़ी तो उसे कांकेर रेफर किया गया लेकिन उसकी भी रास्ते में मौत हो गई थी। इस मामले में भी जांच चल रही है।

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