मेहनत, आत्मविश्वास के कारण नक्सलगढ़ से निकल राष्ट्रीयस्तर के खेल तक पहुंचीं छात्राएं

Kanker News - जिले का नाम रोशन कर रहीं कन्या क्रीड़ा परिसर की छात्राएं जहां से आई हैं वे गांव नक्सल संवेदनशील होने के कारण काफी...

Nov 14, 2019, 07:30 AM IST
Kanker News - chhattisgarh news due to hard work and confidence girls reached national level sports from naxalgarh
जिले का नाम रोशन कर रहीं कन्या क्रीड़ा परिसर की छात्राएं जहां से आई हैं वे गांव नक्सल संवेदनशील होने के कारण काफी पिछड़े हुए हैं। इसके बावजूद छात्राएं वहां से निकल राष्ट्रीय स्तर तक अपने जौहर का प्रदर्शन कर साबित कर रही हैं कि लगन और आत्मविश्वास बाधा नहीं बन सकते। इन छात्राओं ने भास्कर ने चर्चा की तो उनके चेहरे पर एेसा आत्मविश्वास झलक रहा था कि वे लग ही नहीं रहीं थी कि अंदरूनी संवेदनशील गांव से यहां तक पहुंची हैं।

दुर्गूकोंदल के ग्राम दीयागांव की 11वीं की छात्रा हेमींत कोमरा कबड्डी में 2 बार नेशनल खेल चुकी है। किसान परिवार में जन्मी छात्रा 10 साल की उम्र से कबड्डी खेल रही है। गांव में विपरीत परिस्थिति के बावजूद कबड्डी के प्रति लगन बनी रही। कभी गांव के छोटे बच्चों के साथ तो कभी स्कूल में सहेलियों के साथ कबड्डी खेलती थीं। अकेले में भी प्रयास करती जिसका नतीजा है हेमींत दो बार कबड्डी में पुणे व देवास में नेशनल खेल चुकी है। दोनों बार उसे सिल्वर मेडल मिला। खेल ही नहीं पढ़ाई में भी होनवार है। 10वीं में 78 प्रतिशत अंक से पास हुईं हेमींत ने कहा कि वह आगे कॉलेज में भी खेलना चाहती है। दोनों को एक साथ मैनेज करना आसान नहीं है फिर भी समय प्रबंधन कर संतुलित करके चलती हैं।

अंदरूनी गांव से आकर नेशनल खेलना बड़ी उपलब्धि: केशकाल क्षेत्र के ग्राम साल्हेभाठ की ममता उसेंडी खोखो में 6 बार नेशनल खेल चुकी हैं। 2015 में गोल्ड मेडल पर कब्जा करने वाली ममता ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी का अंदरूनी गांव से आकर कन्या क्रीड़ा परिसर के लिए चयन होना और नेशनल स्तर पर खेलना बहुत बड़ी उपलब्धि है। कन्या क्रीड़ा परिसर में रहने के बाद खेल में और भी निखार आता है। 10वीं की छात्रा कौशिल्या कोर्राम निवासी तरांदुल दो बार कबड्डी में नेशनल खेल चुकी है। 2015 व 2016 में उसे गोल्ड मेडल मिल चुका है। कौशिल्या ने कहा कि वह तीसरी कक्षा से खेलते आ रही है।

कांकेर. विभिन्न खेलों में क्षेत्र का नाम रोशन करने वाली नक्सल प्रभावित अंदरूनी गांव की छात्राएं।

रोज घंटों कड़े अभ्यास के बाद मिलती है सफलता

चारामा से 20 किमी दूर ग्राम जवरतरा की मनेश्वरी सेवता भी कबड्डी में रुचि रखती है। 2017 में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। मनेश्वरी ने कहा कि सुबह-शाम 4 घंटे अभ्यास करती हैं जिससे उसे सफलता मिली है। 11वीं की सुशीला गावड़े नक्सल संवेदनशील गांव आमाबेड़ा की रहने वाली है जो दो बार कबड्डी में नेशनल खेल चुकी हैं। 2014 में कवर्धा में उसकी टीम सेकंड पोजिशन में थीं। 2015 में उसे गोल्ड मेडल मिला था। सुशीला ने कहा कि उसे जो सम्मान मिला है वह खेल के कारण ही है। आगे भी खेल जारी रखेगी। 12वीं की छात्रा रूषा उइके दुर्गूकोंदल विकासखंड के दमकसा से है। रूषा तीरंदाजी में तीन बार नेशनल खेल चुकी हैं। 2016 में जबलपुर में गोल्ड मेडल पर कब्जा किया था।

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