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अप्रैल से शहर को मिलने लगेगा पानी
शहर की जरूरत बन चुकी महानदी जलावर्धन योजना का कार्य राशि के अभाव में अधर में लटक गया था। कार्य 90 फीसदी पूरा हो चुका है लेकिन 12 साल पहले बनी योजना में वर्तमान में निर्माण कराने पर उसकी लागत में भी बढोत्तरी हो गई। इससे निर्माण एजेंसी को राशि कम पडऩे पर कार्य बंद होने की कगार पर पहुंच गया था। इसके लिए जिले के प्रतिनिधियों ने एक बार फिर मांग की और शासन ने 8 करोड़ रूपए स्वीकृत कर दिए। इसके बाद फिर से इसका कार्य शुरू हो गया। विभाग का दावा है जलावर्धन योजना के माध्यम से अप्रैल के पहले सप्ताह से शहर में जलापूर्ति शुरू हो जाएगी।
शहर में लगातार बढ़ती पानी की खपत व शहर में इसका नया स्रोत नहीं होने के कारण 12 साल पहले शहर के बाहर महानदी से शहर में जल आपूर्ति करने की योजना बनाई गई थी। जिसे महानदी जलआवर्धन योजना का नाम दिया गया था। इसकी लागत उस दौरान 24.56 करोड़ रूपए थी। साल 2008 से चल रही इस योजना को मूर्तरूप देने राज्य शासन ने योजना की प्रशासकीय स्वीकृति जून 2012 मेें दी थी।
कभी टेंडर ही नहीं भरा गया तो कभी रद्द हो गया, अंत में टुकड़ों में निकालना पड़ा टेंडर
स्वीकृति मिलने के पश्चात ग्राम बागोड़ के महानदी में इंटेकवेल के निर्माण के लिए टेस्टिंग बोर कराया गया जो सफल था। इसके साथ फरवरी 2013 में विभाग ने आनलाईन टेंडर कॉल किया था। निर्माण कार्य करने पूरा दो वर्ष का समय दिया गया लेकिन देश की किसी भी निर्माण एजेंसी ने टेंडर नहीं भरा। दोबारा फिर टेंडर निकाला गया लेकिन इस बार एक ही एजेंसी ने सभी काम को पूर्ण करने टेंडर भर दिया। लेकिन उस एजेंसी की क्षमता नहीं होने व टेंडर नियम विरूद्ध भरने के कारण इसे भी रद्द कर दिया गया था। जिसके बाद अलग अलग कामों को लेकर टेंडर निकाला गया था। जिसमें अलग अलग एजेंसी ने साल 2016 से इसके निर्माण का कार्य शुरू किया। लेकिन 12 साल पहले बनी योजना और वर्तमान में उसका निर्माण कराने से लागत भी बढ़ गई। जिससे काम अंतिम चरण में पहुंचने के बाद एक बार फिर से बंद होने के कगार पर पहुंच चुका था। जिसे देखते हुए 8 करोड़ रूपए दोबारा स्वीकृत किया गया है।
जानिए... कैसे होगी आवर्धन योजना से पानी की सप्लाई
कांकेर जल आवर्धन योजना के अनुसार ग्राम बागोड़ के समीप महानदी में एनीकट तथा इंटेकवेल का निर्माण किया गया है। यहां से पानी कोदाभाट में बनने वाले ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाएगा। जहां से पानी का उपचार कर उसे पीने योग्य बना पाइप लाइन के माध्यम से शहर की ओर भेजा जाएगा। शहर को चार जोन में बांट कर वहां अलग अलग क्षमता वाली उच्चस्तरीय ओवरहेड टंकियों का निर्माण किया गया है। जिसमें प्लांट से आए पानी को जमा कर वहां से घरों में अप्रैल से सप्लाई किया जाएगा। जोन एक की टंकी की क्षमता 660 किलो लीटर, जोन 2 में 1050 केएल, जोन 3 में 880 केएल तथा जोन 4 में 1100 किलो लीटर क्षमता की टंकी बनाई गई है। यहां से 40760 मीटर लंबे पाइप के माध्य से पानी सप्लाई की जाएगी।
पानी टंकी, ट्रीटमेंट प्लांट सहित 90 प्रतिशत काम पूरा
अब पंप फिटिंग व बिजली सब स्टेशन का काम पूरा करना ही बाकी
महानदी जल आवर्धन योजना के तहत शहर में पाइप लाइन विस्तार, ओवर हेड टेंक, कोदाभाट में ट्रीटमेंट प्लांट व बागोड़ में इंटेक वेल का निर्माण कराया जा चुका है। ट्रीटमेंट प्लांट व इनटेक वेल में पंप फिटिंग का कार्य चल रहा है। इसके साथ ही इन दोनों जगह पर बिजली सब स्टेशन का भी निर्माण कराया जा रहा है। जो मार्च अंत तक पूर्ण होने की संभावना है।
मार्च के अंत तक पूरे सिस्टम की टेस्टिंग कर ली जाएगी, फिर करेंगे सप्लाई
पीएचई विभाग के एसडीओ एके वर्मा ने बताया कि निर्माण दर बढऩे के कारण जल आवर्धन योजना की लागत भी बढ़ गई थी। शासन ने अतिरिक्त 8 करोड़ रूपए स्वीकृत किए हैं। वर्तमान में पंप फिटिंग व बिजली सब स्टेशन का कार्य चल रहा है। मार्च में यह कार्य पूरा कर टेस्टिंग कर ली जाएगी। अप्रैल के पहले सप्ताह से शहर में जलआवर्धन योजना के तहत पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।
30 वर्षो तक जनसंख्या के अनुसार
पानी की जरूरत का आंकलन
वर्ष जनसंख्या जल आवश्यकता (एमएलडी)
2013 48000 5.112
2028 75000 7.987
2043 116000 12.354
12 साल पहले बनाई गई थी योजना
फंड के अभाव में बंद होने वाला था जलावर्धन योजना का कामशासन से मिले 8 करोड़, पीएचई का दावा- नई व्यवस्था में...
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जलआवर्धन योजना के तहत कोदाभाट में बनाया जा रहा ट्रीटमेंट प्लांट।