100 करोड़ का शक्कर जाम
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले गुरुवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2020-21 के आय-व्यय पर सामान्य चर्चा का जवाब देते हुए कहा था कि राज्य सरकार किसानों से 355 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर गन्ना खरीदेगी। सीएम के चर्चा के बाद जिले के 20 हजार से अधिक गन्ना किसानों को उम्मीद जगी है कि अगले पेराई सत्र में ग्राम राम्हेपुर व पंडरिया शक्कर कारखाना में 355 रुपए में खरीदी होगी। लेकिन जिले के दोनों शक्कर कारखाने में गन्ना भुगतान को लेकर स्थिति खराब है। दरअसल राम्हेपुर के शक्कर कारखाना में करीब 100 करोड़ रुपए से अधिक का शक्कर जाम है।
यह बीते पेराई सीजन व इस वर्ष में उत्पादन हुआ शक्कर है। 100 करोड़ का शक्कर होने के बाद भी किसानों को बोनस व गन्ना भुगतान नहीं किया जा रहा है। जानकारी अनुसार इस वर्ष पेराई सीजन में 11 हजार से अधिक किसानों से दो लाख मीट्रिक टन गन्ना खरीदी गई। लेकिन किसी भी किसान को गन्ना भुगतान नहीं किया गया। इन किसानों को 51 करोड़ रुपए दिया जाना है। वहीं दूसरी ओर बीते पेराई सीजन का करीब 3 करोड़ 69 लाख रुपए रुपए बोनस राशि भी लंबित है। वर्तमान में दोनों शक्कर कारखाने में प्रति क्विंटल 261 रुपए व 50 रुपए बोनस के हिसाब से खरीदी चल रही है।
बोनस राशि करीब 3 करोड़ रुपए बकाया: इसी प्रकार पंडरिया के सरदार वल्लभ भाई पटेल शक्कर कारखाना में भुगतान को लेकर स्थिति खराब है। यहां 4 लाख मीट्रिक टन गन्ना पेराई का लक्ष्य रखा गया। इस कारखाना में 8224 शेयरधारी किसान है। इन किसानों का बीते पेराई सत्र का बोनस राशि करीब 3 करोड़ रुपए बकाया है। कारखाना में इस पेराई सीजन का राशि जारी नहीं किया गया है। ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। किसान करीब 240 से 270 रुपए प्रति क्विंटल के रेट से निजी गुड़ फैक्ट्री में गन्ना बेच रहे हैं। किसानों को एक क्विंटल गन्ना में 50 से 70 रुपए का नुकसान हो रहा।
शेयरधारी को कम दर में शक्कर नहीं मिल रहा
इधर गन्ना खरीदी का भुगतान नहीं हो रहा तो, दूसरी ओर शेयरधारी किसानों को रियायती दर पर शक्कर भी बीते दो वर्ष से नहीं मिल रहा है। कारखाना द्वारा शेयरधारी कियानाें को शक्कर दिया जाता था। छग संयुक्त किसान मोर्चा पंडरिया के ब्लॉक अध्यक्ष रवि चंद्रवंशी बताते हैं कि जिले के दोनों शक्कर कारखाना में करीब 35 हजार शेयरधारी किसान हैं। इन्होंने 2100 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से 7.35 करोड़ रुपए सरकार व कारखाना प्रबंधन के पास जमा हैं। लेकिन इन्हें शक्कर वितरण नहीं हुआ। प्रबंधन इस पर गंभीरता से विचार करे। ये शेयरधारी कबीरधाम जिले के साथ-साथ प्रदेश के अन्य जिलों के भी है। ऐसे में शक्कर की जानकारी लेने कारखाना पहुंच रहे हैं।
जानिए, राम्हेपुर शक्कर कारखाने की स्थिति
{गन्ना पेराई - एक लाख 99 हजार 662 मीट्रिक टन।
{शक्कर उत्पादन-एक लाख 88 हजार 960 क्विंटल।
{बिजली उत्पादन - 33 लाख 79 हजार 404 यूनिट।
{गन्ने का कुल रकबा - 7 हजार 400 हेक्टेयर।
{इस वर्ष शक्कर तैयार करने का लक्ष्य- चार लाख क्विंटल
{कुल पंजीकृत किसान - 11 हजार 885
इस पूरी अव्यवस्था के बीच पिस रहे किसान
धान व गन्ना बोनस राशि नहीं मिली: ग्राम राम्हेपूर के किसान मूलचंद वर्मा ने बताया कि जनवरी माह में भोरमदेव शक्कर कारखाना में गन्ना बेचा। इसके बाद अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। इसके साथ ही धान खरीदी केन्द्र में 18 सौ रुपए के हिसाब से राशि मिल गई है। लेकिन बीते सत्र के गन्ना व इस सत्र के धान के बचे हुए राशि नहीं मिली है।
केस- 1
केस- 2
कब तक सहेंगे अन्नदाता: पिछले पेराई सत्र के 3 करोड़ 69 लाख रु. बोनस लंबित
कारखाने में गन्ना बेचने के बाद किसानों को 51 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं, दोनों कारखानों से जुड़े 20 हजार से अधिक किसान हो रहे परेशान
भुगतान नहीं होने पर गुड़ फैक्ट्री में गन्ना बेचा: राशि भुगतान की समस्या सभी किसानों के साथ है। ग्राम पिपरमाटी के किसान बैसाखु साहू ने बताया कि काखाना में अब तक तीन बार गन्ना ताैल किया है, लेकिन किसी भी तौल का राशि नहीं मिला। ऐसे में अब अपने गन्ने को निजी गुड़ फैक्ट्री में बेच रहे हैं। क्योंकि गुड़ फैक्ट्री में तौल के तुरंत बाद राशि देते हैं।
शक्कर नहीं बिक रहा इसलिए समस्या आ रही
इस मसले पर भोरमदेव शक्कर कारखाना एमडी भूपेन्द्र ठाकुर ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा शक्कर का निर्धारित रेट तय करने के चलते कारखाना में 100 करोड़ रुपए से अधिक का शक्कर पड़ा हुआ है। शक्कर नहीं बिक रहा, इस से किसानों को भुगतान में समस्या आ रही है। बीते पेराई सीजन का बोनस राशि 3 करोड़ रुपए लंबित है। बोनस राशि कृषि विभाग के माध्यम से जारी किया जाता है, राज्य सरकार को पत्र लिखा है।
**
कवर्धा. कारखाना में रोज 450 गन्ने से भरे ट्राॅली का तौलाई की जाती है।