हर माह 15 लाख रु. खर्च, 156 स्वच्छता मित्र फिर भी नुक्कड़ से 7 दिन में उठाते हैं कचरा

Kawardha News - छग के मुख्य सचिव आरपी मंडल ने 8 नवंबर को राजधानी रायपुर समेत 5 बड़े शहरों में फैली गंदगी पर खासी नाराजगी जताई थी।...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:10 AM IST
Kawardha News - chhattisgarh news 15 lakhs per month spending 156 sanitation friends still pick up garbage from nook in 7 days
छग के मुख्य सचिव आरपी मंडल ने 8 नवंबर को राजधानी रायपुर समेत 5 बड़े शहरों में फैली गंदगी पर खासी नाराजगी जताई थी। उन्होंने इन महानगरों के आयुक्त और जोन कमिश्नरों की बैठक लेकर 7 दिनों में व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। दरअसल, ये स्थिति छोटे शहरों की भी है। यही कारण है कि ओडीएफ डबल प्लस का तमगा हासिल कर चुके कवर्धा नगर पालिका के 27 में से एक भी वार्ड सफाई के मामले में मॉडल नहीं बन पाया है।

हालांकि, इस पर होने वाले खर्च और संसाधनों के बारे में आप जानेंगे तो चौक जाएंगे। नगर पालिका में 156 स्वच्छता मित्र हैं। सफाई पर हर महीने 15 लाख रुपए के हिसाब से सालाना 2 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। इसके बावजूद चौराहों पर बने नुक्कड़ों पर कचरा आसानी से दिख जाता है। रविवार को भास्कर की टीम ने दो वार्ड दीनदयाल नगर वार्ड- 5 और महामाया वार्ड- 6 का का दौरा किया। वार्डवासियों ने बताया नुक्कड़ पर पड़ा कचरा सप्ताह में 1 दिन ही उठता है। इसी वजह से लोग परेशान हैं।

सचिव साहब.., एक नजर यहां भी देख लीजिए

यूं समझिए, दोनों वार्डों में सफाई की स्थिति को

1. नुक्कड़ पर पड़ा कूड़ा, एक हफ्ते से उठाने नहीं आए सफाईकर्मी: महामाया वार्ड- 6 में गंगानगर चौराहे पर बरगद पेड़ है। पेड़ के नीचे सीमेंट का चबूतरा बना है, जहां मोहल्ले का कूड़ा डंप होता है। मोहल्ले के लोग घरों का कूड़ा यहीं पर फेंकते हैं, जिसे नगर पालिका के सफाईकर्मी सप्ताह में 1 बार गाड़ी लेकर उठाते के लिए आते हैं। नियमित नहीं आते।

3 जोन में बंटा शहर, घर-घर कचरा इकट्ठा करने 8 ऑटो व 36 रिक्शा

नगर पालिका के पास संसाधन की कमी नहीं है। सफाई को लेकर शहर के 27 वार्डों को 3 जोन में बांटा गया है। हर जोन में 9-9 वार्ड आते हैं। इन वार्डों में 1-1 सफाईकर्मी तैनात किए गए हैं। नगर पालिका में कुल 83 सफाईकर्मी है, इनमें से 53 दैनिक वेतन भोगी और 30 नियमित सफाईकर्मी है। स्वच्छता विभाग में सफाई के लिए 3 जेसीबी, 1 डंफर, 1 ट्रैक्टर ट्राली, 8 आॅटो और 36 रिक्शा है। इसके अलावा महिला समूह में 73 महिलाएं हैं, जो डोर-टू-डोर कचरा इकट्‌ठा करती हैं। इसके लिए उन्हें हर माह 5 हजार रुपए मेहनताना दिया जाता है। बावजूद साफ-सफाई व्यवस्था की यह स्थिति है।

ओडीएफ डबल प्लस होने के बावजूद सफाई के मामले में कवर्धा के 27 में से एक भी वार्ड नहीं बन पाया मॉडल

2. बिना टोंटी के पाइप से सड़क पर व्यर्थ बहता पानी: दीनदयाल नगर वार्ड- 5 के देवार पारा माेहल्ले में सार्वजनिक नल में टोंटी नहीं लगी है। इसके कारण नल का पानी सड़क पर व्यर्थ बहते रहता है। सड़क किनारे कई जगह कचरे का ढेर लगा रहता है। 1600 की आबादी वाले इस वार्ड के लिए नगर पालिका ने सिर्फ 1 सफाईकर्मी दिया है, इस कारण यह दुर्गति है।

सर्वे टीम के आने पर उसी दिन सफाई कर्मियों को कर देते हैं तैनात

केंद्र सरकार की ओर से कराए जा रहे स्वच्छता सर्वे में कवर्धा नगर पालिका को ओडीएफ डबल प्लस का तमगा मिला है। दरअसल, जब क्यूसीआई (क्वाॅलिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया) दिल्ली की टीम सर्वे के लिए पहुंचती है, तो टीम को गंदगी न दिख जाए, इसलिए उस दिन सफाईकर्मियों को सभी वार्डों में तैनात कर देते हैं। यदि सर्वे टीम लगातार 1 हफ्ते तक रूककर सर्वे करे, तो उन्हें वास्तविकता का पता चले।

इसके लिए लोगों को भी जागरूक होना चाहिए


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