तीन साल बाद जिले के 10 जलाशय ओवरफ्लो खेती के लिए इस बार नहीं होगी पानी की कमी

Kawardha News - बेमेतरा जिले में 3 साल बाद पहली बार अच्छी बारिश हुई है। इससे न केवल भू जल स्तर बढ़ा है। बल्कि बारिश से किसानों को राहत...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 06:42 AM IST
Berla News - chhattisgarh news after three years there will be no water shortage for 10 reservoir overflow farming this year
बेमेतरा जिले में 3 साल बाद पहली बार अच्छी बारिश हुई है। इससे न केवल भू जल स्तर बढ़ा है। बल्कि बारिश से किसानों को राहत भी मिली है। छत्तीसगढ़ राज्य में सबसे अधिक जलाशय बेमेतरा जिले में हैं। इस साल बारिश से पहली बार 10 जलाशय में 100 प्रतिशत तक भर चुके हैं। जिले में कुल 110 जलाशय है। जिसमें 30 जलाशय 50 प्रतिशत से अधिक है, 26 जलाशय 50 प्रतिशत से कम एवं 44 जलाशय खाली हैं।

जिले में 10 बड़े बांध हैं। जिससे किसानों को सिचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता हैं। बारिश होने से सभी जलाशय लबालब भर गए हैं। इसमें बहेरा, कुसमी, मुनरबोड़, सिरवाबांधा, कोड़ापुरी, बेतर, मुड़पार, भुरकी, पदुमसरा, खैरा एवं मुड़पार जलाशय शामिल हैं।

अल्प वर्षा वाले क्षेत्र बेमेतरा एवं थानखम्हरिया तहसील को छोड़कर बेरला, नवागढ़ एवं साजा क्षेत्र में इस साल बारिश जिले के अन्य तहसील क्षेत्रों की तुलना में कम हुई हैं। जिले के जलाशयों में जलभराव होने से फसलों की सिंचाई के लिए भरपूर मात्रा में पानी उपलब्ध हैं। अभी तक 13368 हेक्टेयर में फसलों के सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया गया है। इसके जलाशय के माध्यम से खेतों में सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जा रहा है।

यहां खुशी: 41 साल बाद सकरी नहर के फेस-2 में बनी जलभराव की स्थिति

बेमेतरा. बारिश से बेमेतरा जिले के एक जलाशय में भरा लबालब पानी, सिंचाई के लिए होगा इसका उपयोग।

जिले में संसाधन की कमी, खेती में नहीं मिलती मदद

जिले में खेती के लिए सरकारी संसाधन होने के बावजूद नियमित रूप से बारिश नहीं होने के कारण वृष्टि छाया से आच्छादित बेमेतरा जिले में केवल 13 प्रतिशत में सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं। कृषि प्रधान बेमेतरा जिले में छत्तीसगढ़ राज्य में सबसे कम सिंचाई साधन हैं। जिले मे तीन लाख एकड़ में रवि, एवं खरीफ की प्रमुख फसलों का उत्पादन जिले के किसान लेते हैं। इसके अतिरिक्त एक लाख एकड़ कृषि भूमि में उद्यानिकी एवं सब्जी की फसल किसानों के द्वारा ली जाती हैं। इसके बावजूद जिले बनने के बाद भी सरकारी संसाधन की कमी हैं। इससे किसान तकनीक के अभाव में खेती नही कर पाते हैं। जिससे किसानों को खेती से फायदा नही मिल पाता। पिछले 3 साल से बारिश नही होने से जिले में सूखे की स्थिति बनी हुई थी। इस साल भी थानखम्हरिया एवं बेमेतरा तहसील में अच्छी बारिश हुई हैं।

किसानों को जलाशयों से मिलेगा सिंचाई के लिए पानी

िजले का एकमात्र नवागढ़ ब्लाक में कम बारिश के कारण पिछले 3 साल से सूखे की स्थिति बनी हुई थी। जिससे किसान हताश हो चुके हैं। लेकिन इस साल ब्लाक के किसानों को जलाशयों के माध्यम से सिंचाई के लिए पानी मिलने से कुछ हद तक राहत मिलेगी। जिससे फसलों की स्थिति में सुधार होगा। साथ ही लोगो की निस्तारी की समस्या से भी दूर होगी।

सभी एनीकट में क्षमता से अधिक जलभराव

बेमेतरा जिले में जल संसाधन विभाग के माध्यम से शिवनाथ नदी, खारुन नदी के माध्यम से सिंचाई के पानी उपलब्ध कराई जाती हैं। यहां एनीकट में क्षमता से अधिक जलभराव की स्थिति हैं। शिवनाथ नदी में कुल 15 एनीकट का निर्माण किया गया हैं। जो कि 29.36 मिली घन मीटर पानी भरा हुआ है। इसी तरह खारुन नदी में 2 एनीकट बनाए गए हैं। जिनमें 2.35 मिलियन घनमीटर जल भरा हुआ हैं। हेम्प नदी में 4 एनीकट का निर्माण विभाग के द्वारा किया गया हैं। जिसमें 0.84 मिलियन घनमीटर पानी भरा हुआ हैं। सुरही नदी में 5 एनीकट हैं। जिसमे 1.30 मिली घनमीटर पानी भरा है।

लंबे समय बाद सकरी के किसानों को मिला पानी

बेमेतरा जिले की सबसे बड़ी 41 किमी लंबी सकरी नहर से बारिश से पर्याप्त मात्रा में जलभराव हुआ हैं। बारिश के पानी से सिंचाई के लिए चंदनु, झिरिया सहित दर्जनों गांवों के किसानों को पानी मिलेगा। जलसंसाधन विभाग के माध्यम से किसानों के खेतों तक पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। 41 साल बाद सकरी नहर के फेस 2 जलभराव की स्थिति बनी हैं। इससे किसानों को फसलों के सिंचाई के भरपूर मात्रा में पानी उपलब्ध हो पाएगा। 1980 के दशक में बने सकरी नहर कवर्धा के ग्राम केसली, बिटकुली से नहर का निर्माण किया गया हैं।

सिंचाई के लिए भरपूर मात्रा में पानी उपलब्ध हो पाएगा


केके नारंग, ईई जल संसाधन बेमेतरा

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