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आयोग ने लगाया बैन, कवर्धा-पिपरिया मारो के 5 नेता नहीं लड़ सकेंगे चुनाव

एक वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | कवर्धा/बेमेतरा

आदर्श आचार संहिता के खिलाफ काम करने वाले, तय नियमों का पालन न करने वाले और चुनाव खर्च का हिसाब-किताब आयोग को न देने वाले नेताओं पर राज्य निर्वाचन आयोग ने कार्रवाई की गाज गिराई है। इन नेताओं के चुनाव लड़ने को लेकर आयोग ने बैन लगा दिया है। बैन की मियाद 4 साल 8 महीने की रखी गई है। जिन नेताओं पर कार्रवाई की गई है, उनमें कबीरधाम जिले के 3 और बेमेतरा जिले के 2 शामिल हैं। हालांकि, चुनाव के पहले सूची एक बार फिर अपडेट होगी। लेकिन जो पहले से सूची में हैं, उनका नाम हटने की संभावना कम ही है।

इस साल प्रदेश में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव में 138 लोग चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने निकाय चुनाव के लिए डिसक्वालिफाई लोगों की सूची तैयार की है। इस सूची में प्रदेश के 168 नगरीय निकायों के 138 नेताओं के नाम शामिल हैं, जिन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहरा दिया गया है।

आयोग ने चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य लोगों की सूची में उनके नाम शामिल किए हैं, जिन्होंने पिछले चुनाव में आदर्श आचरण संहिता के विपरीत कार्य किया था और इन पर ऐसा करने के कारण प्रकरण दर्ज किए गए थे। इनमें वे नेता भी शामिल हैं, जिन्होंने चुनाव खर्च की जानकारी नहीं दी है या सही नहीं दी। कई तो आचरण के मामले में ही दोषी पाए गए हैं।

कवर्धा नपा क्षेत्र से ममता पाली और रहमत बी. मुराद का नाम: आयोग ने कवर्धा नगर पालिका क्षेत्र से ममता पाली व रहमत बी. मुराद को अयोग्य ठहराया है। इन दोनों ही नेताओं ने नपा अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था। ममता पाली समाजवादी पार्टी के बैनर तले मैदान में उतरी थीं, उन्हें 181 वोट मिले थे, जबकि रहमत बी. मुराद निर्दलीय के बतौर मैदान में थीं, उन्हें 427 वोट मिले थे। उनके साथ ही पिपरिया नगर पंचायत से टिबलू चौहान भी आयोग के तय समय तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। दूसरी ओर बेमेतरा जिले में मारो नगर पंचायत में फोहरा बाई व नीमा देशलहरे को भी आयोग ने अयोग्य ठहरा दिया है।

पार्षद का चुनाव तक नहीं लड़ सकेंगे, चुनाव से पहले अपडेट होगी सूची: चुनाव लड़ने पर नेताओं पर लगी रोक की समय सीमा 4 साल और 8 महीने तय की गई है। इन पर राज्य निर्वाचन आयोग के प्रावधानों के मुताबिक विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज हैं। 138 नेताओं के मामले अभी भी चल रहे हैं, चुनाव से पहले ये सूची एक बार फिर अपडेट होगी। ज्यादातर नेताओं पर 2020 तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाई गई है। ये नेता पार्षद का भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इतना ही नहीं चुनाव इसी साल आखिरी महीने में होना संभावित है, ऐसे में ये नेता नगरीय निकाय का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।

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