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बारिश से फसल बर्बाद, किसानाें काे ~40 करोड़ से अधिक का नुकसान

एक वर्ष पहले
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समुद्री हवाओं से फरवरी में 4 बार बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। अब मार्च 2020 में भी 6 बार तेज बारिश के साथ ओले गिरे, जिसके चलते कबीरधाम जिले में रबी की 37,706 हेक्टेयर और उद्यानिकी की 64 हजार हेक्टेयर फसल चौपट हो चुकी है। फसलों के खराब होने से 40 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हआ है।

बची फसलों की क्वालिटी खराब होने की आशंका है, जिससे किसानों को फसल का वाजिब दाम नहीं मिल सकेगा। निश्चित ही इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। क्याेंकि जब ये 40 कराेड़ जिले के किसानाें तक पहुंचेंगे ही नहीं ताे वे अपनी जरूरताें के सामान की खरीदी के जरिए इसे बाजार तक नहीं पहुंचा पाएंगे। इस तरह अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ेगा। जहां उत्पादन कम हाेने के कारण चना, सब्जियों और पपीता, खरबूज व अन्य फलों के दाम बढ़ेंगे वहीं अनाज काे छाेड़कर बाजार के बाकी क्षेत्राें जैसे अाॅटाेमाेबाइल, इलेक्ट्राॅनिक्स अादि की मांग कम हाेने के हालात बनेंगे। किसान दानेश्वर सिंह परिहार बताते हैं कि जिले के किसान खरीफ फसलों से जो आमदनी होती है, उसे रबी फसल लगाने में खर्च करते हैं। रबी फसल बेचकर जो पैसा मिलता है, वहीं उनकी शुद्ध कमाई होती है। इस साल खरीफ सीजन में अतिवृष्टि से 30 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में लगी सोयाबीन खराब हो गई थी। करीब 12 हजार किसानों का अभी तक धान नहीं बिका है।

143 गांव के क्षति की रिपोर्ट शासन को भेजी


कृषि विभाग के उपसंचालक मोरध्वज डड़सेना बताते हैं कि जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 413 ग्राम पंचायतों के किसानों ने रबी फसल का बीमा कराया है। संयुक्त टीम ने बीमित किसानों के फसलों के क्षति का सर्वे रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य शासन को भेज दिया जिले में 19,516 किसानों के बीमित चना फसल 21,489 हेक्टेयर को क्षति पहुंची है।

ओले गिरने से 16 एकड़ में लगा पपीता चौपाट, प्रति एकड़ 40 हजार के हिसाब से 6.40 लाख का नुकसान


सहसपुर लोहारा: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से उद्यानिकी फसलों पर ऐसी मार पड़ी है कि खेत उजाड़ नजर आ रहे हैं। भास्कर ने ग्राम खड़ौदा का निरीक्षण किया, तो कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। यहां के किसान रुपेन्द्र जायसवाल ने अपने 16 एकड़ खेतों में खरबूज लगाया था। लेकिन बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि के कारण खेतों में पानी भर गया है। खरबूज की फसल डूब गई है। किसान रुपेन्द्र बताते हैं क प्रति एकड़ खरबूज लगाने में करीब 40 हजार रुपए खर्च किया था। 16 एकड़ की फसल खराब होने से प्रति एकड़ 40 हजार के मान से 6.40 लाख रुपए का नुकसान हआ लगभग यही स्थिति पपीता की भी है। 30 एकड़ में से 20 एकड़ पपीता की फसल चौपट हो गई है। शेष 10 एकड़ में पपीता है, जिसकी क्वॉलिटी खराब होने की आशंका है।

बीजाझोरी: यहां खराब चना फसल को मवेशियों के हवाले किया है। बेमौसम बारिश से रबी फसलें बुरी तरह से प्रभावित हुई है। कबीरधाम जिले में 87 हजार हेक्टेयर में चना फसल लगी थी। कृषि विभाग के सर्वे के मुताबिक 50 प्रतिशत चना फसल खराब हो चुकी है। ग्राम बीजाझोरी के किसान गयाराम साहू ने अपने 1 एकड़ खेत में लगी चना फसल को मवेशियों के हवाले कर दिया, क्योंकि बेमौसम बारिश से यह खराब हो चुकी थी। यही स्थिति ग्राम रबेली, सिंगपुर और लालपुर कला में चना फसलों की है।

ब्लाॅकवार फसल नुकसान की स्थिति

कवर्धा

प्रभावित गांव प्रभावित किसान प्रभावित रकबा नुकसान

110 5219 4034 हेक्टेयर 3.85 करोड़ रुपए

सहसपुर लोहारा

125 19384 24284 हेक्टेयर 25.08 करोड़ रुपए

बोड़ला

216 9147 6049 हेक्टेयर 6.54 करोड़ रुपए

पंडरिया

58 3658 3339 हेक्टेयर 2.88 करोड़ रुपए

13 को कवर्धा में हुई 31 मिमी बारिश


समुद्री हवाओं के चलते कबीरधाम जिले में जनवरी 2020 से अब तक तेज बारिश व ओलावृष्टि का सिलसिला जारी है। फरवरी में 26, 27, 28 व 29 फरवरी को तेज बारिश व ओलावृष्टि हुई। इस महीने भी 6, 7, 8, 11, 12, 13 व 14 मार्च को जिले के अलग-अलग हिस्सों में बारिश के साथ ओले गिरे। 13 मार्च को कवर्धा तहसील में सर्वाधिक 31 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इसी तरह पंडरिया तहसील में 22 मिमी, सहसपुर लोहारा में 20 मिमी और बोड़ला तहसील क्षेत्र में 3 मिमी बारिश हुई है।


0.9 किमी ऊंचाई पर हवा का चक्रवाती घेरा


रायपुर के मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा बताते हैं कि पश्चिम में विक्षोभ पंजाब और उसके आसपास 1.5 किलोमीटर से 7.6 किलोमीटर तक विस्तारित है। इसके प्रभाव से उत्तर पूर्व राजस्थान के ऊपर एक चक्रीय चक्रवाती घेरा बना है। एक द्रोणिका पंजाब से झारखंड तक हरियाणा और दक्षिण उत्तर प्रदेश पर स्थित है। एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती घेरा उत्तर छत्तीसगढ़ के ऊपर 0.9 किलोमीटर पर स्थित है। यहां से एक द्रोणिका मध्य महाराष्ट्र तक स्थित है।

बाजार में अनाज हाेंगे महंगे ताे बाकी क्षेत्राें में मांग कम हाेने से घट सकते हैं दाम

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बीजाझोरी में किसान ने खराब चना फसल को मवेशियों के हवाले किया।
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