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मेडिकल कॉलेज पर भरोसा नहीं, हडि्डयों को जांच के लिए रायपुर भेजेंगे
सहसपुर लोहारा थाना क्षेत्र के ग्राम बिरोड़ा में डोनेश राणा हत्याकांड मामले में परिजन अब भी न्याय के इंतजार में हैं। बरामद हडि्डयों की जांच मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव में कराई गई।
रिपोर्ट के मुताबिक जो हडि्डयां पुलिस ने बरामद की है वह किसी बच्चे की नहीं, बल्कि बंदर या अन्य जानवर की है। मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव की रिपोर्ट पर पुलिस को भरोसा नहीं है। अब हडि्डयों को जांच के लिए रायपुर भेजी जा रही है।
इधर, डोनेश के पिता कौशल राणा मामले में आरोपियों को जेल से निकालकर उनका नार्को टेस्ट कराने और कड़ाई से पूछताछ करने की मांग कर रहे हैं। क्योंकि उन्हें शक है कि आरोपियों ने बयान दिया है, वह पुलिस को गुमराह करने के लिए हो सकता है। असल मामला कुछ और ही है।
सवाल उठाते हुए पिता कौशल ने कहा कि जब मौके से डोनेश का कपड़ा मिला तो कंकाल कैसे नहीं। जबकि पुलिस ने ग्राम टाटावाही के बाहर धनौरा मोड़ के आसपास 3 किमी के दायरे में तलाश
की थी। अगर शव को जानवर ले भी गए तो कोई अवशेष तो मिलना ही था।
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कवर्धा. न्याय के इंतजार में डोनेश के परिजन।
पहले से मरे हुए मवेशियों को फेंका जाता है वहां
डोनेश के पिता कौशल राणा ने बताया कि वारदात के एक महीने बाद पुलिस ने ग्राम टाटावाही के बाहर धनौरा मोड़ के पास घुरुवा में हडि्डयां बरामद की थी। उसी दिन शक हुआ था कि इतनी पतली हडि्डयां 9 साल के बच्चे की नहीं हो सकती। बड़ा सवाल तो यह है कि जहां से ये हडि्डयां मिली वहां पहले से मरे हुए मवेशियों के शवों को फेंका जाता रहा है। घुरुवा में कूड़ा डालने वाले आसपास के परिवारों को दुर्गंध क्यों नहीं आई।
बैडमिंटन रैकेट लेकर खेलने निकला था
डोनेश के हत्यारे अभी जेल में बंद हैं। पुलिस मामले की विवेचना में जुटी हुई है। वहीं परिजन न्याय के इंतजार में हैं। डोनेश की मां उसकी तस्वीर देखकर अक्सर रुआंसी हो जाती है। वो उस दिन को भुला नहीं पा रही, जिस दिन डोनेश बैडमिंटन रैकेट लेकर खेलने के लिए घर से निकला था। पिता कौशल राणा भी अपने काम में लग गए हैं, लेकिन रह-रहकर एक ही सवाल उसके मन में आता है कि आखिर क्यों और कैसे यह सब हुआ।