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नशे का इंजेक्शन देेने फायरिंग की, निशाना चूका, भाग निकला भालू, 6 गांवों में दहशत
शनिवार की सुबह 7 बजे कुंडा के पास ग्राम हथमुड़ी में भालू देखा गया। ग्रामीणों ने इस संबंध में जानकारी वन विभाग को दी। वन विभाग ने भालू को पकड़ने के लिए रायपुर से रेस्क्यू टीम को बुलाया। यह टीम दाेपहर तीन बजे गांव पहुंची। इस दौरान जब भालू गांव के गन्ने के खेत से निकला तो टीम के सामने से ही भाग गया। दरअसल रेस्क्यू टीम ने भालू को बेहोश करने के लिए नशे का इंजेक्शन देने फायरिंग की। कर्मचारी का निशाना चूक गया, भालू फिर से खेत में जा घुसा।
रविवार को सुबह से ही जानकारी ली गई। तब पता चला कि भालू नवागांव की ओर भाग निकला है। ऐसे में विभाग ने टीम ने भालू के अचानकमार अभयारण्य की ओर भाग जाने का ग्रामीण लाल मुकुंद, आेंकार, महेन्द्र, हंसराम, राजेन्द्र से पंचनामा ले लिया है। लेकिन अभी भी ग्रामीण दहशत में हैं। क्षेत्र के गांवों में सरपंचों के माध्यम मुनादी भी कराई जा रही है।
भीड़ को नहीं रोक पाए भालू भी दहशत में था
जिले के ऐसा पहली बार हुआ है कि मैदानी क्षेत्र में जंगली जानवर पहुंच गया था। मौके पर करीब 500 से अधिक लोग थे। ऐसे में भालू एक खेत से दूसरे खेत में निकलता था। इस दौरान ग्रामीणों के पास कृषि संबंधित हथियार भी थे। भीड़ भी भालू को मारने उग्र होते जा रहीं थी, एक दो बार तो भीड़ भालू के पीछे दौड़ गई। ऐसे में भालू अपनी जान बचाकर खेत में जा घुसा। यह सब वन विभाग की टीम के सामने होते रहा।
सर्चिंग जारी, वनकर्मियों की लगाई गई ड्यूटी
वन विभाग के डीएफओ दिलराज प्रभाकर ने बताया कि भालू को पकड़ने शनिवार को ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन वह भाग निकला है। रविवार को क्षेत्र में वनकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है, भालू के संबंध में जानकारी नहीं मिली। लगता है भालू अचानकमार अभयारण्य की ओर भाग निकला होगा, ग्रामीणाें ने पंचनामा भी किया है। क्षेत्र में सर्चिंग जारी है।
कराई मुनादी: अचानकमार अभयारण्य की ओर भागा भालू
वन विभाग के पास भालू को पकड़ने कोई तैयारी नहीं, इस कारण भाग निकला
सुबह 7 बजे से ही भालू हथमुड़ी गांव के किसान संतोष चन्द्रवंशी के गन्ने के खेत में था। रेस्क्यू टीम जब मौके पर पहुंची थी तो ग्रामीणों को उम्मीद था कि भालू पकड़ा जाएगा, लेकिन टीम के आने के बाद भी भालू को पकड़ा नहीं जा सका। ग्रामीणों की मानें तो टीम ने भालू को पकड़ने की सहीं ढंग से तैयारी नहीं थी। टीम के पास भालू को पकड़ने जाल भी कम था, जिस जगह भालू को पकड़ना था वहां घेराबंदी भी नहीं की गई। यही कारण है कि भालू रेस्क्यू टीम के सामने से ही भाग निकला। भालू को नहीं पकड़े जाने से ग्रामीणों को दहशत का माहाैल है।
इसके पहले भी कई बार जंगली जानवर पकड़ने में विफल रहा है वन विभाग
जंगली जानवर को पकड़ने विभाग रुचि नहीं लेता। इसका उदाहरण कई बार मैदानी क्षेत्र में जंगली जानवर पहुंचने के बाद पता चलता है। हाल में ही कुकदुर क्षेत्र में वनभैंसा देखा गया था। वन भैंसा के पैर में चोट है लेकिन विभाग नहीं पकड़ सका। तब विभाग ने रायपुर से टीम बुलाई थी। पिछले साल अप्रैल में कवर्धा शहर के बीएसएनएल दफ्तर में भोरमदेव अभयारण्य से भागकर एक चीतल को देखा गया। तमाम कोशिशों के बावजूद विभाग की टीम उसे जीवित नहीं पकड़ सका। इसमें कर्माचारियों की लापरवाही भी उजागर हुई है। चीतल को पकड़ने घेराबंदी करने लगे।
कवर्धा. रायपुर से रेस्क्यू टीम शनिवार दोपहर तीन बजे पहुंची।
कवर्धा. जिस समय गन्ने के खेत से भालू निकला, उसके सामने रेस्क्यू टीम मौजूद थी।
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