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प्रसव के दौरान नवजात की मौत, बिलखते परिजन से गार्ड ने बदसलूकी भी की, हंगामा

एक वर्ष पहले
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जिला अस्पताल कवर्धा में होली की रात प्रसव के दौरान नवजात बच्चे की मौत हो गई। मृत बच्चे को बीमार नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में रखा गया था। बिलखते परिजन उसे देखना चाहते थे, लेकिन वहां उपस्थित गार्ड ने उनके साथ बदसलूकी की। इस पर पीड़ित के परिजन नाराज हो गए और हंगामा कर दिया।

घटना 10 मार्च रात करीब साढ़े 9 बजे की है। उस वक्त इमरजेंसी ड्यूटी पर सिर्फ एक डॉक्टर तैनात थे। सिविल सर्जन डॉ. सुजाॅय मुखर्जी को फोन लगाने पर उन्होंने कॉल अटेंड नहीं किया। इस पर सीएमएचओ डॉ. एसके तिवारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने माहाैल शांत कराने की कोशिश की। इस दौरान परिजन ने बताया कि प्रसूति वार्ड में ड्यूटी कर रहा गार्ड नशे में था। एक महिला गार्ड थी, जिन्हाेंने प्रसूति वार्ड से महिला परिजन को धक्के मारकर बाहर निकालने कोशिश की, जिससे बखेड़ा खड़ा हाे गया। इस दौरान करीब 3 घंटे तक नवजात बच्चे का शव एसएनसीयू में ही था।

प्रसव पीड़ा बढ़ने पर लाए थे अस्पताल: शहर के वार्ड- 21 निवासी जनक जायसवाल की प|ी अंबालिका गर्भ से थी। 10 मार्च की सुबह करीब 10 बजे प्रसव पीड़ा होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया था। देर शाम साढ़े 7 बजे उसकी जचकी हुई। प्रसव के दौरान बच्चे की मौत हो गई। जानकारी मिलने पर परिजन बच्चे को देखने अंदर गए तो गार्ड ने बदसलूकी की।

घटना की रात डॉ. पुरुषोत्तम राजपूत ड्यूटी पर थे। होली के पूरे दिन मारपीट व सड़क दुर्घटना के 13 केस आए थे। इन सभी का जिम्मा अकेले डॉक्टर पर था।

मातृ-शिशु अस्पताल पंडरिया में अब तक उपकरण ही मिला

नगर पंचायत पंडरिया में 8.23 करोड़ रुपए मातृ-शिशु हेल्थ केयर (एमसीएच) का निर्माण किया गया है। लेकिन अब तक यहां सिजेरियन प्रसव शुरू नहीं हुआ है, क्योंकि डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इसलिए यहां आने वाले सिजेरियन प्रसव के केस को जिला अस्पताल ही रेफर कर दिया जाता है। सिजेरियन प्रसव के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध हो चुके हैं। हॉस्पिटल के प्रथम तल में लेबर रूम, ओटी (ऑपरेशन थियेटर), सोनोग्राफी मशीन, प्रसूति वार्ड समेत अन्य उपकरण पहुंच चुके हैं। सिजेरियन प्रसव के लिए यहां डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई है। इसलिए यह बेकार साबित हो रहे हैं। यहां स्त्रीरोग विशेषज्ञ की तैनाती जरूरी है।

वर्ष 2019 में प्रसव के दौरान 122 नवजात की मौत

सरकारी अस्पतालों में स्त्रीरोग विशेषज्ञों के 7 पद हैं, इनमें से 6 पद रिक्त हैं। 10 साल में यहां स्त्रीरोग विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं हुई है। नतीजा वर्ष 2019 में सरकारी अस्पतालों में 10 हजार से अधिक गर्भवतियों की जचकी हुई। इनमें लगभग 122 नवजात शिशुओं की मौत हो गई।

{जिला अस्पताल में तैनात गार्ड ने पीड़ित परिजन से बदसलूकी की, अापने क्या कार्रवाई की?

- जो हुआ, वह गलत है। गार्ड हो या अस्पताल को काेई स्टाफ, मरीज के साथ आए परिजन से ऐसा सलूक नहीं करना चाहिए।

{जब घटना हुई, तो सीएस ने कॉल अटेंड नहीं किया, ऐसा क्यों ?

- जिला अस्पताल की हर घटना का दायित्व सीएस पर है। घटना के वक्त उन्हें आना चाहिए था।

{मामले में क्या संबंधित गार्ड व स्टाफ पर कार्रवाई होगी?

-इस संबंध में सिविल सर्जन से बात की जाएगी।

{मातृ-शिशु अस्पताल पंडरिया में स्त्रीरोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई ?

- अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के लिए जरूरी उपकरण पहुंच चुके हैं। जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. हिना खान की वहां सेवाएं ली जाएगी। इसे लेकर प्रक्रिया चल रही है।

परिजन से ऐसा सलूक नहीं करना चाहिए



डॉ. एसके तिवारी, सीएमएचओ, कबीरधाम**

कवर्धा.जिला अस्पताल में पीड़ित परिजन।
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