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बारिश और ओलावृष्टि से रबी फसल बर्बादी के कगार पर, गेहूं की फसल खेत में ही गिरी
अंचल में लगातार हो रही बारिश व ओलावृष्टि के चलते फसलें जहां पहले ही बर्बाद हो चुकी हैं, वहीं अब आम जनजीवन पर भी इसका भारी असर पड़ने लगा है। बिना कामकाज के ही लोग घरों में दुबके हुए हैं। खरीफ सीजन में उत्पादित धान की बिक्री नहीं कर पाने का मलाल किसानों में बना हुआ है और यह प्राकृतिक आपदा किसानों के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है। फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। काम की तलाश में भी लोग बड़े पैमाने पर अन्य प्रदेश में पलायन करने लगे हैं।
10 मार्च से अंचल में लगातार ओलावृष्टि के साथ बारिश हो रही है। इस तरह की प्राकृतिक आपदा के चलते और रबी सीजन की एक भी फसल उपयोगी साबित नहीं हो रही है। किसान खेतों में फसल को छोड़ चुके हैं। ज्यादातर किसान मवेशियों के लिए चारे की समस्या से परेशान हैं। इस संबंध में ग्राम केवाछि के अरुण वर्मा ने बताया कि उनके द्वारा 35 एकड़ में चने की खेती की गई, लेकिन लगातार बारिश के कारण फसल पूरी तरह से खेत में खराब हो चुकी है। किसान परेशान हैं।
बेमौसम बारिश से खेतों में भरा पानी, फसल बचाने जतन कर रहे किसान
सहसपुर लोहारा| सहसपुर लोहारा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले तीन दिनों से हो बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ गई है। शुक्रवार को नगर में जमकर बारिश हुई। कहीं कही पर ओले भी गिरे। इससे खेतों में पानी भर गया। बेमौसम बारिश से रबी फसल को नुकसान हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा चना, सरसों की फसल खराब हुई है। होलिका दहन के बाद रात क्षेत्र में प्रतिदिन बारिश हो रही है। गुरुवार को दिनभर मौसम साफ रहा। लेकिन रात में आधे घंटे तक तेज आंधी तूफान के साथ बारिश हुई। किसान गोवर्धन ने बताया कि उनकी 4 एकड़ चने की फसल खराब हो गई। प्रदीप कुमार ने बताया कि अगर इसी तरह की स्थिति बनी रही तो अाने वाले दिनों में रबी फसल के साथ ही सब्जी को भी नुकसान होगा। सुखराम ने बताया कि 6 एकड़ में मिर्ची, अदरक की फसल ली है। लेकिन खेतों में बारिश का पानी भर गया है। किसान फसल को बचाने के लिए खेतों में भरे पानी को नाली बनाकर बाहर निकाल रहे हैं।
बारिश इतनी ज्यादा कि अब सर्वे की जरूरत भी नहीं
अंचल में करीब 2 महीने से रुक-रुककर हो रही है। अतिवृष्टि के चलते अब रबी सीजन वाली फसलों के सर्वे की जरूरत ही नहीं है। किसान शासन-प्रशासन व बीमा कंपनी से राशि की मांग करने लगे हैं। करीब पौने तीन लाख हेक्टेयर जमीन पर इस वर्ष रबी फसल ली जा रही है। लेकिन बारिश व ओलावृष्टि के बाद भी बीमा कंपनी ने एक भी बार गांव में सर्वे नहीं किया है। इस सीजन में किसानों के हितों की कृषि विभाग ने भी अनदेखी की है। दूसरी ओर टोकन प्राप्त कर चुके किसानों के धान का तौल कराने की घोषणा सरकार ने की, लेकिन अब तक समितियों को इसे लेकर आदेस नहीं दिए गए हैं। ऐसे में खरीदी व्यवस्था पूरी तरह ठप है।
उत्पादन में अंतर आएगा
सिर्फ चना ही नहीं बल्कि गेहूं की फसल की भी बुरी स्थिति है। अब गेहूं की फसल पक कर कटने के लायक है। मौसम खुलते ही किसान इसे काटने की तैयारी में थे, लेकिन बारिश के कारण अब गेहूं की फसल भी खेतों में खराब होने के कगार पर है। ऐसे में गेंहूं की फसल के गिर जाने से भी उत्पादन में अंतर आ सकता है।
बेमेतरा.गेहूं की फसल भी बारिश के कारण खेत में गिरने लगी है। इससे नुकसान होने की आशंका है।