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100 प्रतिशत प्लास्टिक कचरे की खपत का प्लान सड़क बनाने व सीमेंट फैक्ट्री में किया जाएगा उपयोग

एक वर्ष पहले
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नगर निगम ने शहर से रोजाना निकलने वाले 5 टन प्लास्टिक के कचरे का डिसमेंटल करने के लिए नया प्लान बनाया है। पहले सड़क बनाने में इसका उपयोग किया गया था। अब सीमेंट फैक्ट्री भी प्लास्टिक कचरा लेने तैयार हैं। निगम ने 5 ट्रक कचरे की बिक्री 200 रुपए टन के हिसाब से की है। आने वाले समय में इसके उपयोग को कम करने के साथ ही शत-प्रतिशत डिस्पोज होने लगेगा।

निगम के 67 वार्डों से 100 टन कचरा निकलता है, जिसमें 5 टन प्लास्टिक का कचरा होता है। अब तक निगम के पास डिस्पोजल करने का कोई साधन नहीं था। सफाई मित्र डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने के बाद एसएलआरएम सेंटर में इसकी छंटाई करती हैं। प्लास्टिक का जो कचरा कबाड़ में बेचने लायक होता था। उसे रखकर निगम को दे देते थे। शहर में भले ही प्लास्टिक मुक्त करने का अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन इसके उपयोग को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता। केवल उन्हीं प्लास्टिक पर प्रतिबंध है, जिसे पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए पर्यावरण विभाग ने मापदंड तय किया है

प्लास्टिक कचरे को पूरी तरह करेंगे डिस्पोज: सारस्वत

नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी वीके सारस्वत का कहना है कि प्लास्टिक कचरे का पूरी तरह डिस्पोज करने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले दिनों में सफलता भी मिलेगी। लोग कम से कम प्लास्टिक के थैले का उपयोग करें इसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोग जागरूक भी हुए हैं।

प्लास्टिक के उपयोग को कम करने तीन तरह के प्रयास

{कम से कम उपयोग: दुकानों के साथ ही बाजार में लोगों को कम से कम प्लास्टिक के थैले में सामान देने प्रेरित किया जा रहा है। इसके स्थान पर कागज के थैले का उपयोग करने कहा जा रहा है।

{रिसाइकिलिंग: प्लास्टिक को इकट्ठा कर रिसाइकिलिंग करने का भी प्रावधान है, लेकिन इसके लिए अभी निगम के पास मशीनें नहीं हैं। आने वाले दिनों में योजना बनाई जा सकती है।

{डिस्मेंटल करना: प्लास्टिक को एकत्र करना भी बड़ी चुनौती है। अब सीमेंट फैक्ट्रियों से भी मांग आने लगी है। साथ ही सड़क बनाने में उपयोग करने की शुरुआत हो चुकी है।

पीएम सड़कों में उपयोग किया गया

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सबसे पहले रिस्दी से कनबेरी तक 6 किलोमीटर बनी सड़क में प्लास्टिक के कचरे का उपयोग किया गया। अब 15 प्रस्तावित सड़कों में भी प्लास्टिक वेस्ट का प्रावधान किया गया है। ईई कमल साहू ने बताया कि प्लास्टिक को डामर प्लांट में प्रोसेस किया जाता है। इसके बाद सड़कों में डाला जाता है। इसे बारीक कर उपयोग होता है। निगम को इसके लिए कहा गया है।

कबाड़ से बचे कचरे को डिस्पोज करने के लिए जरूरी था नया प्लान, शुरू हुईं तैयारियां

रिस्दी से कनबेरी सड़क जिसमें प्लास्टिक कचरे का हुआ उपयोग।

तुलसी नगर एसएलआर सेंटर में प्लास्टिक कचरे की होती है छंटाई

200 रुपए टन के हिसाब से की गई कचरे की बिक्री

प्लास्टिक के कचरे को 200 रुपए टन के हिसाब से सीमेंट फैक्ट्री मेें दी गई है। इससे निगम की कमाई भी हो रही है। साथ ही प्लास्टिक कचरे की खपत भी हो रही है। हर महीने निगम क्षेत्र से ही लगभग 150 टन कचरा निकलता है। उसमें से 8 से 10 टन ही कबाड़ में बेचने लायक होता है।
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