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3 सौ रुपए के कंबल 594 में खरीदे लोगों को बांटे भी नहीं, 2000 डंप
{5 जनपदों में से कोरबा व कटघोरा में ही ढाई हजार कंबल की सप्लाई
भाजपा शासन काल में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि का दुरुपयोग करने का मामला सामने आया था। आदिवासी विकास विभाग के कार्यों की तो ईओडब्ल्यू जांच कर रही है। लेकिन प्रदेश में सत्ता बदलते ही कांग्रेस के शासनकाल में भी डीएमएफ की राशि का मनमाना उपयोग शुरू हो गया है।
जिले के खनिज प्रभावित बुजुर्ग, नि:शक्त, पिछड़ी जनजाति व कमजोर वर्ग के लोगों को ठंड से बचाने के लिए 69 लाख 40 हजार 811 रुपए का कंबल खरीदने हाथकरघा निगम को ऑर्डर कर दिया गया था। निगम ने 46 लाख 27 हजार 601 रुपए कीमत के 8 हजार कंबल की सप्लाई भी कर दी, लेकिन नगरीय निकायों को जरूरतमंद लोग ही नहीं मिले। निगम में ही 2 हजार कंबल डंप हैं। खदान प्रभावित क्षेत्र के लोग भी कंबल मिलने से इनकार कर रहे हैं। खास बात यह रही जो कंबल 594 रुपए रेट में खरीदे गए हैं, वह बाजार में 3 सौ रुपए में मिल रहे हैं।
नगरीय निकायों के साथ पांचों जनपद पंचायत से कंबल के लिए ऑर्डर मिला था, लेकिन कोरबा ब्लॉक में 4 हजार के ऑर्डर पर 2 हजार कंबलों की सप्लाई की गई। जिनकी कीमत 11 लाख 32 हजार 120 रुपए है। कटघोरा में 1 हजार कंबल के बदले 500 की सप्लाई हो पाई। बाकी जनपद करतला, पोड़ी-उपरोड़ा व पाली में सप्लाई ही नहीं की गई। निगम कोरबा में कंबल कबाड़ के सामान की तरह रखे हैं। निगम क्षेत्र में ही उपनगरीय क्षेत्र बांकीमोंगरा, कुसमुंडा, आनंद नगर, जमनीपाली के लोग भू-विस्थापित हैं। आनंद नगर के कमल महंत ने बताया कि हमें तो कंबल बांटने की जानकारी नहीं मिली। कई लोगों को ठंड के समय स्वयंसेवी संस्थाओं ने कंबल उपलब्ध कराया। शहर में बीपीएल वर्ग के लोगों को कंबल बांटना था, लेकिन वह भी निगम के अधिकारियों को नहीं मिले। इस तरह लाखों के कंबल पड़े हैं। ठंड के बाद अधिकारी उसका क्या करेंगे यह भी नहीं बता पा रहे हैं।
अफसरों के अलग-अलग बोल
जितने जरूरतमंद लोग मिले उन सबको बांटा गया कंबल: निगम आयुक्त
निगम आयुक्त राहुल देव का कहना है कि नगर निगम ने अपने स्तर पर 500 कंबल जरूरतमंदों को बांटे हैं। साथ ही गोठान में भी कंबल दिए गए हैं। जो कंबल बच गए हैं वह रखे हैं। लोग मिलते जाएंगे उसके हिसाब से वितरण किया जाएगा।
नगरीय निकायों व जनपदों में कहां
कितनी हुई सप्लाई
निकाय/जनपद डिमांड आपूर्ति कीमत
कोरबा निगम 2000 2000 11.32 लाख
कटघोरा पालिका 1000 1000 5.94 लाख
दीपका पालिका 1000 1000 5.94 लाख
पाली पंचायत 1000 1000 5.94 लाख
छुरी पंचायत 500 500 2.83 लाख
कोरबा जनपद 4000 2000 11.32 लाख
कटघोरा जनपद 1000 500 2.97 लाख
करतला जनपद 1000 निरंक ऑर्डर निरस्त
पाली जनपद 2000 निरंक ऑर्डर निरस्त
पोड़ी-उपरोड़ा जनपद 2000 निरंक ऑर्डर निरस्त
लोगों को ठंड से बचाने हथकरघा निगम को मिली थी कंबल खरीदने की जिम्मेदारी
1 हजार कंबल के बदले 500 की सप्लाई हो पाई। बाकी जनपद करतला, पोड़ी-उपरोड़ा व पाली में सप्लाई ही नहीं की गई। निगम कोरबा में कंबल कबाड़ के सामान की तरह रखे हैं। निगम क्षेत्र में ही उपनगरीय क्षेत्र बांकीमोंगरा, कुसमुंडा, आनंद नगर, जमनीपाली के लोग भू-विस्थापित हैं। आनंद नगर के कमल महंत ने बताया कि हमें तो कंबल बांटने की जानकारी नहीं मिली। कई लोगों को ठंड के समय स्वयंसेवी संस्थाओं ने कंबल उपलब्ध कराया। शहर में बीपीएल वर्ग के लोगों को कंबल बांटना था, लेकिन वह भी निगम के अधिकारियों को नहीं मिले। इस तरह लाखों के कंबल पड़े हैं। ठंड के बाद अधिकारी उसका क्या करेंगे यह भी नहीं बता पा रहे हैं।
हथकरघा शासन की एजेंसी, अन्य कंपनी से की होगी सप्लाई
डीएमएफ से जाे कंबल खरीदी की गई है उसकी कीमत 594 रुपए है। बाजार में वही कंबल लगभग 300 रुपए में मिल जाएगा। शहर के एक व्यवसायी ने बताया कि हाथकरघा निगम राज्य शासन की एजेंसी है। वह भी किसी दूसरी कंपनी से लेकर सप्लाई की होगी, लेकिन रेट का इतना अंतर समझ से परे है।
जनवरी में सप्लाई, इसके पहले लगी थी आचार संहिता
नगरीय निकायों के साथ ही जनपदों में कंबल की सप्लाई जनवरी में की गई है। इसके पहले चुनाव आचार संहिता लागू थी। इसके कारण कंबल बांटना ही संभव नहीं था। इसके ठीक बाद पंचायत की आचार संहिता लागू हो गई। ऐसे में कंबल आपूर्ति का ऑर्डर क्यों दिया गया, इसकी जांच कराने से गड़बड़ी का खुलासा हो सकता है।
कंबल वितरण का काम विभागों का: सहायक संचालक
हाथकरघा निगम के सहायक संचालक योगेश्वर प्रसाद बंजारे का कहना है कि कंबल सप्लाई के लिए जो भी डिमांड आई थी उसे पूरी कर ली गई है। कंबल वितरण का काम संबंधित विभागों का है। जहां जितनी जरूरत थी। वहां उतनी सप्लाई की गई है। इससे अधिक जानकारी नहीं है।
प्रभावितों काे नहीं बांटे, गड़बड़ी की आशंका: उपाध्यक्ष
जिपं उपाध्यक्ष रीना अजय जायसवाल का कहना है कि मेरे क्षेत्र में सभी गांव खदान प्रभावित हैं। कई पंचायतों मेंे लोगों ने बताया कि चार-पांच कंबल ही मिले थे और जरूरतमंदों को बांटे ही नहीं गए। गड़बड़ी करने के लिए ही खरीदी की गई है। जो कंबल ढाई से तीन सौ में मिल जाता है, उसे 594 रुपए में खरीदी की गई है।
नगर निगम कोरबा के दफ्तर में रखा कंबल।
69 लाख रुपए के कंबल खरीदे, 46 लाख की सप्लाई, अफसरों ने आचार संहिता बताया कारण