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बिजली बिल हाफ योजना का 8 से 10 महीने की रीडिंग लेकर बिल भेजने से उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा लाभ

Korba News - प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनते ही बिजली बिल हाफ की योजना लागू की गई है, लेकिन बिजली अफसरों की लापरवाही के कारण...

Jan 16, 2020, 07:20 AM IST
Korba News - chhattisgarh news consumers are not getting the benefit of sending bills after reading 8 to 10 months of electricity bill half plan
प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनते ही बिजली बिल हाफ की योजना लागू की गई है, लेकिन बिजली अफसरों की लापरवाही के कारण उपभोक्ताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक साथ 8 से 10 महीने का रीडिंग लेकर 10 से 50 हजार तक बिल थमाया जा रहा है। साथ ही यूनिट को बढ़ाने से उपभोक्ता परेशान हैं। इसकी शिकायत करने पर भी निराकरण नहीं हो रहा है। अधिकारी समस्या सुनने का दावा कर रहे हैं। वह भी आंकड़ेबाजी में ही हो रहा है।

शहर में बिजली बिल में गड़बड़ी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद इसमें और इजाफा हुआ है। बिजली अधिकारी अपने दफ्तरों से निकलकर फील्ड में झांकने भी नहीं जाते। उपभोक्ताओं को दफ्तरों का चक्कर काटना पड़ रहा है। रीडिंग नहीं लेने की शिकायत के बाद स्पॉट बिलिंग शुरू की गई है। वह भी समय पर नहीं हो पाती। एवरेज बिल भेजने की वजह से जो उपभोक्ता हर महीने बिजली बिल का भुगतान करते हैं। उन्हें भी एक साथ डेढ़ से दो हजार यूनिट का बिल थमाया जा रहा है। इसमें जेई से लेकर एसई भी जिम्मेदार है जो उपभोक्ताओं की समस्या को सुनकर अनदेखा कर देते हैं। यहीं नहीं सुधारने की बात कहकर घुमाते रहते हैं। बिजली विभाग के एसई पीवी संजीव, ईई राजेश ठाकुर, एई टीआर कोसरिया व पाड़ीमार के प्रभारी एई आरएल वर्मा हैं। जिनका कहना है कि समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। लेकिन चारों अधिकारियों के दावे को उपभोक्ता झूठा बता रहे हैं।

लापरवाही
भास्कर न्यूज | कोरबा

प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनते ही बिजली बिल हाफ की योजना लागू की गई है, लेकिन बिजली अफसरों की लापरवाही के कारण उपभोक्ताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक साथ 8 से 10 महीने का रीडिंग लेकर 10 से 50 हजार तक बिल थमाया जा रहा है। साथ ही यूनिट को बढ़ाने से उपभोक्ता परेशान हैं। इसकी शिकायत करने पर भी निराकरण नहीं हो रहा है। अधिकारी समस्या सुनने का दावा कर रहे हैं। वह भी आंकड़ेबाजी में ही हो रहा है।

शहर में बिजली बिल में गड़बड़ी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद इसमें और इजाफा हुआ है। बिजली अधिकारी अपने दफ्तरों से निकलकर फील्ड में झांकने भी नहीं जाते। उपभोक्ताओं को दफ्तरों का चक्कर काटना पड़ रहा है। रीडिंग नहीं लेने की शिकायत के बाद स्पॉट बिलिंग शुरू की गई है। वह भी समय पर नहीं हो पाती। एवरेज बिल भेजने की वजह से जो उपभोक्ता हर महीने बिजली बिल का भुगतान करते हैं। उन्हें भी एक साथ डेढ़ से दो हजार यूनिट का बिल थमाया जा रहा है। इसमें जेई से लेकर एसई भी जिम्मेदार है जो उपभोक्ताओं की समस्या को सुनकर अनदेखा कर देते हैं। यहीं नहीं सुधारने की बात कहकर घुमाते रहते हैं। बिजली विभाग के एसई पीवी संजीव, ईई राजेश ठाकुर, एई टीआर कोसरिया व पाड़ीमार के प्रभारी एई आरएल वर्मा हैं। जिनका कहना है कि समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। लेकिन चारों अधिकारियों के दावे को उपभोक्ता झूठा बता रहे हैं।

जानिए उपभोक्ता किस तरह हो रहे हैं परेशान

हर महीने बिल जमा किया अब यूनिट बढ़ा दिया

एमपी नगर के उपभोक्ता दिनेश कुमार ने बताया कि मैं हर महीने बिजली बिल जमा करता हूं। इस महीने यूनिट बढ़ाने के साथ ही 22 हजार का बिल भेज दिया गया है। अगर हर महीने रीडिंग होती तो मुझे भी बिजली बिल हाफ का लाभ मिलता।

केस 1

यूनिट बढ़ाकर लाइन लॉस कम बताने का खेल

बिजली विभाग के अधिकारी हर साल दिसंबर तक एवरेज बिल भेजते रहते हैं। जैसे ही जनवरी शुरू होता है लाइन लॉस कम बताने का खेल शुरू हो जाता है। अधिकारी यूनिट को बढ़ाकर बिल भेजने लगते हैं। उच्च अधिकारियों को यह बताते हैं कि खपत बढ़ गई है। इससे लाइन लॉस कम हो जाता है।

बिल में एक महीने में 2200 यूनिट खपत बताया

पथर्रीपारा की उपभोक्ता एस मन्नेवार ने बताया कि हर महीने बिजली बिल जमा करता हूं, लेकिन इस महीने 2200 से अधिक यूनिट की बिजली खपत बताकर बिल भेजा गया है। यह बिजली अधिकारियों की लापरवाही है। कार्रवाई होनी चाहिए।

केस 2

कर्मचारी 8 महीने से नहीं आया रीडिंग लेने

सीएसईबी के रिटायर्ड कर्मचारी खरमोरा निवासी ब्रम्हदेव प्रसाद ने बताया कि मैं 8 महीने पहले नए मकान में शिफ्ट हुआ हूं। यहां घरेलू बिजली कनेक्शन लिया हूं, लेकिन तीन बार शिकायत करने के बाद भी कोई भी रीडिंग लेने नहीं आया। इससे उनकी समस्या बनी हुई है।

केस 3

जानकारी लेने के बाद कार्रवाई होगी: एमडी

बिजली वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) मो. कैसर अब्दुल हक का कहना है कि शासन की योजना का लाभ हर उपभोक्ता को मिलना चाहिए। अगर लाभ नहीं मिल रहा है या किसी तरह की समस्या हो रही है तो इस संबंध में जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी।

जिम्मेदारों की लापरवाही से उपभोक्ता परेशान

कंपनी के डायरेक्टर की भी नहीं सुनते कर्मचारी

बिजली विभाग के अधिकारी अपने डायरेक्टर एचआर नरवरे की भी नहीं सुन रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रवास से पहले कोरबा में रहकर अधिकारियों की डायरेक्टर ने बैठक ली थी। जिसमें बिल की समस्याओं काे प्राथमिकता से निराकरण करने कहा था, लेकिन उसका भी किसी भी अधिकारी पर असर नहीं हुआ।

अंबिकापुर रीजन की तरह कार्रवाई की जरूरत

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिजली अफसरों की लापरवाही के कारण चार ईई समेत अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। हालांकि बाद में बहाल कर दिया गया। यहां के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत है। शहर के उपभोक्ता सबसे अधिक परेशान हैं।

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