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बारिश से दर्री बरॉज में बहा राखड़, फिर मिट्टी से किया समतल

एक वर्ष पहले
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बिजली उत्पादन कंपनी के दर्री स्थित एचटीपीपी प्लांट से निकलने वाले राखड़ को दर्री बरॉज के किनारे डूबान क्षेत्र में पाटकर मिट्टी से ढंका जा रहा है। दो दिन पहले हुई बारिश की वजह से राखड़ का बड़ा हिस्सा बह गया।

सोमवार को ठेकेदार पुन: मिट्टी पाटकर समतलीकरण में लगा रहा। सिंचाई विभाग के एसडीओ एसएन साय का कहना है कि जहां से प्लांट को पानी दिया जाता है। उसके डाउन लेवल में राखड़ भरा होगा। अभी जमीन के दस्तावेज की जांच की जा रही है। दर्री बरॉज के डूबान क्षेत्र में सीएसईबी के अधिकारी राखड़ डंप करने में लगे हैं। इसकी वजह से दर्री बरॉज का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। प्लांट से निकलने वाले राखड़ को बाहर भेजने के लिए परिवहन का ठेका होता है। ठेकेदार अधिक दूरी न जाना पड़े, इसके लिए जहां पाते हैं। वहां राखड़ डंप कर देते हैं। एचटीपीपी प्लांट के सामने ही दर्री बरॉज से पानी लेने के लिए इंटेकवेल चैनल बना हुआ है। प्लांट में पानी सीधे बरॉज से जाता है। इसी जगह पर 8 एकड़ की जमीन है। जहां धनुहारपारा के आदिवासी खेती कर रहे थे।

बरॉज के डूबान का सिंचाई विभाग ढूंढ रहा रिकार्ड

बरॉज के डूबान का सिंचाई विभाग रिकार्ड ढूंढ रहा है। 200 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है। लोगों ने यहां मकान के साथ दुकान भी बना ली हैं। इसमें अधिकारियों व पटवारी की भूमिका भी संदिग्ध है। समय रहते न ही नोटिस जारी किया गया और न ही अतिक्रमण हटाया। मामला राज्य स्तर तक पहुंचने पर अब रिकार्ड ढूंढा जा रहा है।

जमीन पर सीएसईबी कर रहा दावा: एसडीओ

हसदेव दर्री बरॉज उपसंभाग के एसडीओ एसएन साय का कहना है कि जिस जमीन पर राखड़ पाटा गया है उस जमीन पर सीएसईबी प्रबंधन दावा कर रहा है। हमारे पास अभी तक कोई रिकॉर्ड नहीं है। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय कितनी जमीन सीएसईबी को दी गई थी यह स्पष्ट नहीं है। मामले की जांच की जा रही है।
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