बांदा की खुली जेल में सभी को रखा गया था, रबर बुलेट की भी पड़ी थी मार

Korba News - अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद 1992 में अयोध्या में हुई कार सेवा की याद उसमें शामिल अनेक कार...

Bhaskar News Network

Nov 10, 2019, 07:21 AM IST
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अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद 1992 में अयोध्या में हुई कार सेवा की याद उसमें शामिल अनेक कार सेवकों को आ गई।

साध्वी उमा भारती को भी गिरफ्तार किए गए कार सेवकों के साथ रखा गया था। बांदा की उस खुली जेल से फिर उमा भारती गायब हो गई और 6 दिसंबर को अयोध्या में सामने आईं। इस कार सेवा के बाद भाजपा शासित मध्यप्रदेश, राजस्थान व हिमाचल प्रदेश की सरकारें बर्खास्त कर दी गई। तब न तो छत्तीसगढ़ बना था और न ही बिलासपुर से अलग होकर कोरबा जिला। नगर निगम बनने से पहले यहां साडा (विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण) था। उस समय उसके अध्यक्ष बनवारी लाल अग्रवाल थे। सरकार बर्खास्त होने के बाद राजनैतिक परिस्थितियां भी बदल गई। पूरा दिसंबर माह हलचल भरा रहा था। आरएसएस के प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य व इन दिनों सरस्वती शिक्षा संस्था का कार्य देख रहे जुड़ावन सिंह ठाकुर तब विभाग कार्यवाहक थे। उन्होंने 1990 व 1992 की कार सेवा को याद करते हुए बताया कि तब बिलासपुर अविभाजित जिला था। उन्हें रतनपुर से लेकर कोरबा व सक्ती, जांजगीर तक ग्रामीण क्षेत्र से कार सेवकों को ले जाना था। किशोर बुटोलिया को शहरी क्षेत्र की कमान दी गई थी। इसके अलावा अब स्वर्गीय हो चुके कटघोरा के कृष्णा महाराज, रविन्द्र चौरसिया, चंद्रकिशोर श्रीवास्तव, राजकुमार अग्रवाल, देवनारायण राठौर, विभूतिभूषण पांडे, प्रवीण देशपांडे, सदानंद, भोजराम देवांगन, शैलेन्द्र नामदेव, सुखसागर कौशिक सहित बड़ी संख्या में कार सेवक गए थे। जुड़ावन सिंह का कहना है कि 90 की कार सेवा के दौरान सुरक्षा बलाें के रूप में अनेक असामाजिक तत्व भी सक्रिय थे। जिन्होंने कार सेवकों को रोकने बल प्रयोग किया, वहीं जब 1992 में जब हम कार सेवा के लिए गए तब पहले से माहौल कहीं अलग ही था। सुरक्षा बलों में शामिल सिपाही व अधिकारी भी संवेदनशील थे। कार सेवा की योजना अचानक बदल दी गई। जिसके कारण 1 दिसंबर से ही यहां से जत्थे जाने लगे।

बनवारी लाल अग्रवाल, छेदीलाल अग्रवाल, रामगोपाल पांडे भी अलग दस्तों में कार सेवा के लिए गए थे। कार सेवकों को अपने साथ 3-4 दिन का सूखा भोजन ही साथ लेने कहा गया था। हर कोई दृढ़ संकल्प के साथ गया था। कार सेवकों को बांदा में रोक लिया गया। इससे पहले कार सेवकों को रोकने रबर बुलेट भी चलाई गई थी जो अनेक लोगों को लगी। रेलवे स्टेशन के पास नवीन इंटर कॉलेज बांदा में खुली जेल में कार सेवकों को रखा गया। यहीं साध्वी उमा भारती को भी रखा गया था। बाद में वे गायब हो गईं और 6 दिसंबर के दिन एक अलग रूप में ही सामने आई। उनका यह वाक्या भी तब काफी चर्चा में रहा था। किशोर बुटोलिया ने कहा कि हम संघ के प्रतिबद्ध हैं। जो कार्य सौंपा गया वह किया और भूल गए। चंद्रकिशोर श्रीवास्तव ने बताया कि उस समय का उत्साह ही कुछ और था। कार सेवा कर लौटे सदस्यों का अलग-अलग स्थानों पर स्वागत अभिनंदन हुआ था। ऐसा ही एक कार्यक्रम बुधवारी बाजार में भी हुआ था। बनवारी लाल अग्रवाल साडा अध्यक्ष थे। बाद में जब मध्यप्रदेश की पटवा सरकार को बर्खास्त कर दिया गया तब साडा अध्यक्ष ही अन्य साडा सदस्य भी अपने पद से हट गए। 6 दिसंबर की घटना के बाद कोरबा में भी एक माह तक सरगर्मी बनी रही थी। मगर जहां पूरे देश में घटनाएं हुई। वहीं तब भी कोरबा परस्पर भाईचारे व आपसी प्रेम, सद्भाव की मिसाल बनकर उभरा था।

कार सेवकों के सम्मान में बुधवारी बाजार में हुए कार्यक्रम में जुड़ावन सिंह ठाकुर, प्रदीप देशपांडे सहित अन्य।

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