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पीले वस्त्र में गायत्री परिवार, श्वेत-हरे में इस्लाम तो पीली पगड़ी के साथ सिख समाज ने निकाली शहर में शोभायात्रा

Korba News - रविवार की सुबह से देर शाम तक पूरा शहर धार्मिक सदभावना में डूबा रहा। उल्लास का कारण धर्म विशेष में अलग-अलग रहे पर...

Nov 11, 2019, 07:15 AM IST
रविवार की सुबह से देर शाम तक पूरा शहर धार्मिक सदभावना में डूबा रहा। उल्लास का कारण धर्म विशेष में अलग-अलग रहे पर मकसद सभी का एक ही रहा। सबने अपने-अपने आराध्य को पूजने अपने-अपने स्तर पर आयोजन किए। शांति, अमन व भाईचारे का संदेश लिए सभी धर्मों का पर्व उत्साह के साथ मना।

रविवार की सुबह शहर के दो छोर से हरे ध्वज व सफेद व काले परिधानों में ईस्लाम धर्मावलंबियों ने जुलूस निकालकर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का जन्मदिन की खुशी मनाए तो हिंदू धर्म से जुड़े गायत्री परिवार के लोगों ने पीले वस्त्र धारण नगर में दो दिशाओं से कलश यात्रा निकालकर 251 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ करने का संदेश शहरवासियों को दिया। गुरुनानक देव का 550वां जन्म शताब्दी समारोह सिक्ख समुदाय 12 नवंबर को मनाएगा। सफेद परिधान व पीली पगड़ी में सजे धजे अनुयायियों ने नगर कीर्तन किया।

ईस्लाम धर्मावलंबियों ने ईदमिलामुन्नबी की खुशी रविवार को मनाए। निहारिका व तुलसीनगर की ओर से जुलूस की शक्ल में लोग निकलकर टीपीनगर स्थित मस्जिद पहुंचें। जहां से तय कार्यक्रमानुसार हाथों में खुशी का ध्वज लहराते व नारा लगाते हुए उत्साही गीतों के साथ टीपीनगर से पावर हाउस रोड होते हुए पुराना बस स्टैंड, फिर पुरानी बस्ती स्थिति रानीगेट के पास मस्जिद पहुंचकर पूरी हुई। इसके पहले लोग एक दूसरे से मिलकर ईद मिलादुन्नबी की बधाईयां देते रहे। दोपहर 12 बजे से सीबीएसबी पूर्व कालोनी निहारिका स्थित गायत्री शक्तिपीठ व दूसरी टोली रानी रोड स्थित गायत्री मंदिर से कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा में शामिल देवी देवताओं की जीवंत झांकी लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र रही। दोनों ही कलश यात्रा टीपीनगर चौक पहुंचकर एक साथ मिलीं जहां से यज्ञ स्थल इंदिरा स्टेडियम पहुंचकर पूर्ण हुई। यज्ञ स्थल पर कलश स्थापना व पूजन किया गया। देर शाम पुरानी बस्ती स्थित गुरुद्वारा से सिक्ख समाज के लोगों ने गुरुनानक देव की शोभायात्रा निकाली।

गायत्री परिवार ने कलश यात्रा, मुस्लिमों ने पैगंबर हजरत मोहम्मद व सिख समाज ने गुरुनानक देव की जयंती पर निकाली शोभायात्रा

निहारिका क्षेत्र से जुलूस निकालते समाज के अनुयायी। फोटो: संजय चौहान

भास्कर न्यूज | कोरबा

रविवार की सुबह से देर शाम तक पूरा शहर धार्मिक सदभावना में डूबा रहा। उल्लास का कारण धर्म विशेष में अलग-अलग रहे पर मकसद सभी का एक ही रहा। सबने अपने-अपने आराध्य को पूजने अपने-अपने स्तर पर आयोजन किए। शांति, अमन व भाईचारे का संदेश लिए सभी धर्मों का पर्व उत्साह के साथ मना।

रविवार की सुबह शहर के दो छोर से हरे ध्वज व सफेद व काले परिधानों में ईस्लाम धर्मावलंबियों ने जुलूस निकालकर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का जन्मदिन की खुशी मनाए तो हिंदू धर्म से जुड़े गायत्री परिवार के लोगों ने पीले वस्त्र धारण नगर में दो दिशाओं से कलश यात्रा निकालकर 251 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ करने का संदेश शहरवासियों को दिया। गुरुनानक देव का 550वां जन्म शताब्दी समारोह सिक्ख समुदाय 12 नवंबर को मनाएगा। सफेद परिधान व पीली पगड़ी में सजे धजे अनुयायियों ने नगर कीर्तन किया।

ईस्लाम धर्मावलंबियों ने ईदमिलामुन्नबी की खुशी रविवार को मनाए। निहारिका व तुलसीनगर की ओर से जुलूस की शक्ल में लोग निकलकर टीपीनगर स्थित मस्जिद पहुंचें। जहां से तय कार्यक्रमानुसार हाथों में खुशी का ध्वज लहराते व नारा लगाते हुए उत्साही गीतों के साथ टीपीनगर से पावर हाउस रोड होते हुए पुराना बस स्टैंड, फिर पुरानी बस्ती स्थिति रानीगेट के पास मस्जिद पहुंचकर पूरी हुई। इसके पहले लोग एक दूसरे से मिलकर ईद मिलादुन्नबी की बधाईयां देते रहे। दोपहर 12 बजे से सीबीएसबी पूर्व कालोनी निहारिका स्थित गायत्री शक्तिपीठ व दूसरी टोली रानी रोड स्थित गायत्री मंदिर से कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा में शामिल देवी देवताओं की जीवंत झांकी लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र रही। दोनों ही कलश यात्रा टीपीनगर चौक पहुंचकर एक साथ मिलीं जहां से यज्ञ स्थल इंदिरा स्टेडियम पहुंचकर पूर्ण हुई। यज्ञ स्थल पर कलश स्थापना व पूजन किया गया। देर शाम पुरानी बस्ती स्थित गुरुद्वारा से सिक्ख समाज के लोगों ने गुरुनानक देव की शोभायात्रा निकाली।

गुरुनानक देव की शोभायात्रा में अगुवाई करतीं युवतियां।

भगवान के वििवध स्वरूपों में सजे बच्चे

कलश यात्रा में गायत्री परिवार द्वारा शामिल झांकी।

कांवर में रखे ग्रंथ तो सिर पर रखा कलश

कांवर में ग्रंथ लेकर चलती महिलाएं।

जैन व इसाई समाज के लोगों में दिखा उत्साह

जैन मिलन समिति व सकल जैन समाज महावीर दिगंबर जैन मंदिर बुधवारी में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान कर रहा है। जो 13 नवंबर तक चलेगा। यहां प्रतिनिदि जैन समाज के लोग अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम, पूजन अभिषेक शांतिधारा, विधान व शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। जबकि ईसाई धर्म बड़ा दिन मनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दिया। रविवार को चर्चों में विशेष प्रार्थना की गई। जिसमें लोग शामिल होकर प्रभु यीशु का आशीष लिए।

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