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जिंदगी बहुत कीमती है,इसे पूरी तरह जिएं

एक वर्ष पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु [raghu@dbcorp.in]

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए 9190000071 पर मिस्ड कॉल करें।


य दि आपके आसपास कोई बच्चा अवसाद ग्रस्त हो और आप उसे प्रेरित करना चाहते हैं, तो आप उसे वियतनाम के 10 वर्षीय डांग वान ख्यूएन की कहानी सुना सकते हैं, जो अब तक की सबसे अच्छी कहानी है।

दो साल पहले 15 नवंबर को डांग उत्तरी तुयेन क्वांग प्रोविंस स्थित अपने स्कूल में पढ़ रहा था, तभी उसके चाचा दौड़ते हुए कक्षा में आए और बताया कि उसके पिता का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया है। डांग कांपने लगा और अपने आंसू रोक लिए। सिर झुकाए उसने शिक्षक से तीन दिन की छुट्टी मांगी। फिर उसने अपनी पुरानी साइकिल से तीन किलोमीटर तक का पहाड़ी रास्ता पार किया। घर पर उसके चाचा और पड़ोसियों ने उसके पिता की फोटो ढूंढने में मदद की।

कुछ लोगों का कहना है कि कम उम्र में ही उसकी मां की मृत्यु हो गई थी, जबकि कुछ का कहना है कि उसकी मां ने पिता से अलग होने के बाद दोबारा शादी कर ली थी और उनके गांव से 60 किलोमीटर दूर चली गई थी। इसलिए उसे अपनी दादी के साथ रहना पड़ा, जबकि उसके पिता शहर में दूर मजदूरी करने जाते थे। गांव से दूर काम करते हुए उन्हें पांच साल हो गए थे। डांग अपनी जरूरतों के लिए आर्थिक रूप से अपने पिता पर और दैनिक भोजन के लिए दादी पर निर्भर था। कुछ समय बाद उसकी दादी का निधन हो गया। उसकी देखभाल करने के लिए कोई नहीं होने से वह घर में अकेला रह गया। पिता के निधन की खबर ने उसे पूरी तरह अकेला कर दिया। वह अपने चाचाओं को परेशान नहीं करना चाहता था, क्योंकि वे भी गरीब ही थे। ऐसे में शहर से शव लाने और अंतिम संस्कार के लिए उसके शिक्षकों ने पैसे इकट्‌ठा किए थे। दादी व पिता की मृत्यु के बाद उसने जल्द ही सभी काम खुद करना सीख लिया था।

रोजाना सुबह पांच बजे उठकर वह पिता की तस्वीर देखता है, कंबल और चटाई तह करके कोने में रख देता है। उसके घर में इसके अलावा और कुछ नहीं है। छत और फर्श में छेद हैं। उसकी संपत्ति में कुछ बर्तन, टोकरी और अन्य लोगों द्वारा हाल में दिए गए कटोरे शामिल हैं। पैसे कमाने के लिए फावड़ा लेकर वह पांच किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर जाता है। वहां कसावा की जड़ें खोदता है और उसे बेचता है। अपने में रहना और स्वयं के खाने के लिए सब्जियां उगाना, यह समय के साथ उसकी आदत बन गई है। वह आसपास उपलब्ध खेतों में काम करता है, भोजन के लिए सब्जियां उगाता है और खाने की अन्य चीजें खोजता है। ऐसा कई बार होता है जब ठंडी, तूफानी हवाएं उसके छोटे से घर की दीवारों से टकराती हैं और रात हो या दिन, वह अपनी चटाई पर पड़ा कांपता रहता है। डांग को पड़ोसी, परिचितों और अजनबियों से भी उसे गोद लेने के प्रस्ताव आ चुके हैं, लेकिन वो हमेशा इनकार कर देता है।

डांग के शिक्षक ने सोशल मीडिया पर उसकी कहानी और वीडियो को शेयर किया जो वायरल हो गया। इससे दुनियाभर के लोगों का ध्यान उसकी ओर आकर्षित हुआ। वीडियो वायरल होने के बाद से कई लोगों ने उसे आर्थिक मदद और वस्तुएं उसे भेजी हैं। उसने यह दान स्वीकार कर लिया, लेकिन गोद लिए जाने प्रस्ताव को इनकार कर दिया। उसे लगता है कि वह स्वयं अपनी देखभाल करने में सक्षम है। इस तरह जीना वाकई में कठिन है, लेकिन डांग इसका आदी हो चुका है। अच्छी बात यह है कि इतना कठिन जीवन जीने के बावजूद उसने एक भी दिन स्कूल मिस नहीं किया। वह रोजाना जल्दी उठकर अपने काम निपटाता है, फिर साइकिल से स्कूल जाता है। घर लौटकर रोजमर्रा के काम करता है। इतनी कम उम्र में ही डांग काफी जिम्मेदार बन गया है।

फंडा यह है कि डांग जानता है कि जिंदगी बहुत कीमती है और इसमें उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इन सबसे लड़ना और जिंदगी पूरी तरह से जीना एक अच्छे इंसान की निशानी है।

मैनेजमेंट फंडा**
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