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मारवाड़ी समाज ने कंडों से होलिका दहन कर कायम रखी दशकों से चली आ रही परंपरा
सोमवार को पूरे जिले में होलिका दहन को लेकर उत्साह रहा। गांव-गांव, शहरी के मोहल्लों, गलियों में बच्चों ने होलिका की डांग सजाई थी।
इससे अलग मारवाड़ी समाज की होलिका दहन की पुरानी परंपरा आज भी लोगों के लिए पर्यावरण संरक्षण देने वाली रही। यह समाज दशकों से चली आ रही कंडा से होली जलाने की रस्म पूरी की। यह समाज होलिका दहन में लकड़ी का उपयोग नहीं करता है। पुराना बस स्टैंड में मारवाड़ी समाज की सुबह से गोबर के कंडों की होलिका की महिलाओं ने परिक्रमा और पूजा की। कच्चे धागे से होलिका को बांधकर पूजा विधान पूरा किया। शहरी क्षेत्र में रहने वाले मारवाड़ी समाज के लोगाें ने एकत्र होकर पूजा-अर्चना की। खासबात यह रही कि हर परिवार के लोग सामूहिक रूप से होलिकोत्सव स्थल पहुंचते रहे और परिक्रमा के साथ पूजा विधि करते रहे। महिलाएं गोबर से बने कंडे, माला, रोली, कुमकुम, फूल व चावल से होलिका पूजन कीं। वहीं देर शाम मुहूर्त के अनुसार दहन किया गया। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजे से 8 बजकर 52 मिनट तक था। इसके कारण लोगों ने अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार दहन की रस्म पूरी की।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजे से रात 8.52 बजे तक रहा, लोगों ने दिखाया उत्साह
नई बहुओं के लिए शुभकारी
मारवाड़ी समाज में के लोग सोमवार की शाम होलिका दहन के साथ चना, जौ, गेहूं आदि को सेंककर प्रसाद के रूप में ग्रहण किए। मारवाड़ी समाज में होलिका दहन नवविवाहित महिलाओं के लिए शुभकर है। होलिका की परिक्रमा कर नवविवाहिता सुखमय जीवन की कामना करती हैं। समाज की महिलाओं ने बताया कि होलिका दहन के बाद गणगौर उत्सव होगा। महिलाएं माता गणगौरी की पूजा के लिए होलिका की राख अपने घर लेकर गईं।
होलिका की परिक्रमा करने पहुंचीं महिलाएं
आज मनाया जाएगा रंगोत्सव
सोमवार को होेलिका दहन के बाद मंगलवार को रंगोत्सव की खुशियां मनाई जाएंगी। इसमें पूरा शहर अबीर-गुलाल से सराबोर रहेगा। शहर की कई काॅलोनियों की महिला मंडल ने सूखी होली खेलने का संकल्प लिया। इसके पीछे का उद्देश्य पानी का संरक्षण व उसके लिए लोगों को जागरूक करने का संदेश देना रहा है।