निकायों के महापौर, अध्यक्ष और पार्षदों को 80 प्रतिशत राशि जारी, वहीं निगम को मिले 120 लाख

Korba News - निकाय चुनाव के पहले राज्य शासन ने महापौर व पार्षद निधि की बकाया राशि जारी कर दी है। पहले सिर्फ 20 प्रतिशत राशि जारी...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:21 AM IST
Korba News - chhattisgarh news mayors presidents and councilors of bodies released 80 percent amount while corporation got 120 lakh
निकाय चुनाव के पहले राज्य शासन ने महापौर व पार्षद निधि की बकाया राशि जारी कर दी है। पहले सिर्फ 20 प्रतिशत राशि जारी होने से कामों की मंजूरी नहीं मिल पा रही थी।

हर साल महापौर को डेढ़ करोड़ व पार्षदों को 7 लाख निधि में मिलते है, जिससे वे विकास कार्य कराते हैं। शासन ने 14 निगमों को 1064 लाख, 43 नगर पालिका को 9 करोड़ व 109 नगर पंचायतों को 1008 लाख जारी किए हैं। कोरबा निगम को 1 करोड़ 20 लाख की राशि मिली है। दीपका व कटघोरा पालिका को 20-20 लाख, नगर पंचायत छुरी व पाली को 8-8 लाख दिए गए हैं। नगरीय निकाय चुनाव नवंबर-दिसंबर में प्रस्तावित है। इससे निकायों में विकास कार्य कराकर कांग्रेस लीड लेना चाह रही है। दो दिन पहले ही अधोसंरचना मद से नगर निगम को 5 करोड़ के कार्यों की मंजूरी मिली थी। बुधवार को महापौर, अध्यक्ष व पार्षदों की निधि के लिए राशि जारी की गई है। पिछले महीने 20 प्रतिशत राशि जारी हुई थी। नगर निगम में 67 वार्ड हैं। पार्षद निधि में 20 प्रतिशत की राशि 55.67 लाख मिली थी। एक पार्षद के खाते में सिर्फ 88 हजार आ रहे थे। इसी तरह महापौर निधि में सिर्फ 30 लाख मिले थे। चुनावी वर्ष होने से सभी पार्षद अपनी निधि को खर्च करने पहले ही कामों का प्रस्ताव दे चुके हैं। अब राशि जारी होने से काम कराने में आसानी होगी। साथ ही विपक्षी पार्षद यह आरोप नहीं लगा पाएंगे कि सरकार ने निधि को दबाकर रख दिया है।

20 लाख से अधिक के काम की अब ई-टेंडरिंग

नगरीय प्रशासन व विकास विभाग ने निर्माण कार्यों के टेंडर में बदलाव किया है। पहले 5 लाख से अधिक के कामों के लिए ई-टेंडरिंग से निविदा जारी करने का निर्देश था। उसमें संशोधन करते हुए 20 लाख के ऊपर काम के लिए ई-टेंडर से निविदा भरी जाएगी। इससे छोटे निर्माण कार्यों के लिए अधिक समय नहीं लगेगा।

शासन के आदेश का पालन होना चाहिए

नगर निगम कांट्रेक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष असलम खान ने कहा छोटे कामों के लिए भी पहले ई-टेंडर होता था। इसमें लंबा समय लगता था। पुराने आदेश का पालन नहीं हो रहा था। इससे कांट्रेक्टरों को परेशानी हो रही थी। अब शासन का नया आदेश आया है। इसका पालन होना चाहिए। इससे काम में आसानी होगी। समय भी कम लगेगा।

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