महापौर बनने अब दिग्गज लड़ेंगे पार्षद का चुनाव, तलाशने लगे सुरक्षित वार्ड

Korba News - सीएम भूपेश बघेल ने शनिवार को यहां संकेत दिया कि महापौर व निकायों के अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया में बदलाव हो सकता...

Oct 13, 2019, 07:11 AM IST
Korba News - chhattisgarh news now veterans will contest election of councilor to become mayor started searching for safe ward
सीएम भूपेश बघेल ने शनिवार को यहां संकेत दिया कि महापौर व निकायों के अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है। उन्होंने कहा कि लोगों की मंशा है कि जिला पंचायत व जनपद के अध्यक्ष जिस तरह निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने जाते हैं वैसे ही चुने गए पार्षद महापौर या अध्यक्ष का चुनाव करें। हमने मंत्रियों की सब कमेटी भी बना दी है। इसकी रिपोर्ट आते ही निर्णय लेंगे।

प्रक्रिया में बदलाव के बावजूद महापौर या अध्यक्ष का जो आरक्षण हुआ है वह यथावत रहेगा। जहां कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया में इस बदलाव में कुछ भी गलत नहीं मान रही है। वहीं भाजपा नेता इसे कांग्रेस द्वारा सत्ता का उपयोग कर नगरीय निकाय पर कब्जा करने की रणनीति मान रहे हैं। महापौर व अध्यक्ष का चुनाव सीधे न होकर पार्षदों के वोट से चुने जाने की चर्चा के बीच राजनीतिक दलों में सरगर्मी तेज हो गई है। यदि ऐसा हुआ तो वे बड़े नेता जो अब तक अपने आप को सीधे महापौर टिकट का दावेदार बता रहे थे, उन्हें वार्ड पार्षद के लिए चुनाव लड़ते देखा जाएगा। अब तक दोनों ही प्रमुख दल कांग्रेस व भाजपा में महापौर की दावेदारी करने वाले नेता अब तक यहां से राजधानी तक नेताओं के आगे-पीछे होने लगे थे। अब वे भी सोच में पड़ गए है कि व्यवस्था बदली तो पहले पार्षद टिकट पाने की जुगत बैठानी होगी। वार्डों का आरक्षण बदल गया है ऐसे में पहले से सक्रिय नेता भी परेशान है। पार्षद चुनाव तो जितना ही होगा तब ही वे महापौर की दौड़ में आ पाऐंगे। अनेक ऐसे चेहरे है जो पिछले विधानसभा चुनाव में विधायक टिकट की व अब महापौर या अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी कर रहे थे, अब अपने लिए वार्ड की तलाश में जुट गए है।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मध्यप्रदेश में यह व्यवस्था लागू कर दी है। यहां सीएम ने भी इसी दिशा में बढ़ने के संकेत दे दिए है। दरअसल महापौर व अध्यक्ष पद के अनेक दावेदार होते हैं। जिसे टिकट नहीं मिली वह विरोध पर उतर जाता है। ऐसे में प्रभावी उम्मीदवार भी चुनाव हार जाते हैं। गुटीय राजनीति से दूर रहकर सामंजस्य के साथ विकास के लिए भी पार्षदों द्वारा महापौर या अध्यक्ष का चुना जाना ठीक रहेगा। इधर भाजपा के नेता वैसे तो घोषित तौर पर चुनाव प्रक्रिया में बदलाव का विरोध कर रहे हैं। कुछ ने तो अभी से कहना शुरू कर दिया है कि पार्षद बनकर ही क्षेत्र का विकास करना चाहते हैं। सच्चाई यह है कि जब पार्षद बनेंगे तब ही महापौर बन सकेंगे।

इसमें आखिर दिक्कत क्या है: राजकिशोर

शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजकिशोर प्रसाद ने कहा कि यदि नगरीय निकाय के चुनाव त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के जैसे होते हैं तो इसमें आखिर क्या दिक्कत है। महापौर या अध्यक्ष पार्षदों के बीच से ही आऐंगे। वे ज्यादा परस्पर सामंजस्य के साथ काम करेंगे। भाजपा नाहक ही विरोध कर रही है।

मैदान से भाग रही है कांग्रेस: चावलानी

जिला भाजपा अध्यक्ष अशोक चावलानी ने कहा कि अध्यक्ष व महापौर के चुनाव प्रक्रिया में बदलने का आशय है कि कांग्रेस मैदान से भाग रही है। चूंकि शहरी मतदाता कांग्रेस के विकास के सपने की सच्चाई जान चुके हैं। यदि प्रत्यक्ष चुनाव होते हैं तो प्रदेश के अधिकांश नगरीय निकाय में भाजपा को ही जीत मिलेगी।

X
Korba News - chhattisgarh news now veterans will contest election of councilor to become mayor started searching for safe ward
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना