उत्पादन 35 लाख क्विं. खरीदी सिर्फ 9.88 लाख किसान बाेले- सरकार अब बचा धान कहां बेचें

Korba News - जिले के 42 केन्द्रों में धान खरीदी बंद होने के बाद किसान सवाल उठा रहे हैं कि प्रशासन हमें बताए कि बचा धान कहां...

Feb 22, 2020, 07:26 AM IST
Korba News - chhattisgarh news production 35 lakh q bought only 988 lakh farmers

जिले के 42 केन्द्रों में धान खरीदी बंद होने के बाद किसान सवाल उठा रहे हैं कि प्रशासन हमें बताए कि बचा धान कहां बेचें। ढाई महीने तक छोटे व्यवसायी भी फुटकर धान नहीं खरीद रहे थे। शासन ने मोटा व सरना धान का मूल्य प्रति किलो 18 रुपए 15 पैसे निर्धारित किया है, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई के डर से व्यवसायी 12 रुपए में भी धान खरीदने तैयार नहीं हैं। इसकी वजह से किसान परेशान हैं।

आने वाले समय में गांवों में वैवाहिक सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में जो किसान धान नहीं बेच पाए हैं, वे सस्ते दाम में बेचने मजबूर होंगे। जिले में धान की फसल का रकबा 95 हजार हेक्टेयर है। एक हेक्टेयर में 30 से 35 क्विंटल तक धान का उत्पादन होता है। इस हिसाब से हर साल 35 लाख क्विंटल धान उत्पादन होता है। जिले में किसानों की संख्या 1 लाख 24 हजार 988 है। जिसमें से 75 प्रतिशत किसान सीमांत हैं। सीमांत का अर्थ जिनके पास 5 एकड़ से भी कम जमीन है। इसी वजह से धान बेचने के लिए मात्र 27 हजार 928 किसानों ने पंजीयन कराया था। उसमें से भी 23 हजार 832 किसानों ने ही 9.88 लाख धान बेचा। नियमत: 18 लाख धान बेचने के लिए किसानों ने पंजीयन कराया था। लेकिन रकबा घटाने व उत्पादन कम बताने की वजह से अधिकांश किसान पूरा धान नहीं बेच पाए। अब उन्हें बिचौलियों का सहारा लेना ही पड़ेगा। प्रशासन के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जहां वे धान बेच सकें। फुटकर में ग्रामीण चाय, शक्कर, नमक, तेल व किराना सामान की खरीदारी करते हैं। लेकिन प्रशासन की छापामार कार्रवाई के बाद वह भी बंद है।

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नियम के अनुसार बेच सकते हैं अपना धान

एडीएम व धान खरीदी के प्रभारी अधिकारी संजय अग्रवाल का कहना है कि धान खरीदी अब बंद हो गई है। बिचौलिए समितियों में धान न बेचें इसके लिए कार्रवाई की जा रही थी। किसान नियम के अनुसार अपना धान बेच सकते हैं। कहीं कोई रोक नहीं है। धान खरीदी नियमों के तहत की गई है। मंडी लाइसेंस लेने के बाद ही धान का व्यवसाय करने का नियम है।

84 राइस मिल, लेकिन अभी खरीदी नहीं

जिले में 84 राइस मिल हैं। जिसमें से 74 ने मार्कफेड के पास धान लेने के लिए पंजीयन कराया है। अभी पौने 3 लाख धान समितियों में जाम है। जब तक वे धान का उठाव नहीं कर लेते तब तक किसानों का धान नहीं खरीदेंगे। एक राइस मिलर ने बताया कि धान के हिसाब से खरीदी करते हैं। भले ही प्रशासन ने जो भी मूल्य तय किया है लेकिन मंडी में जो भी दर तय होता है उसके हिसाब से खरीदी करते हैं।

जिले में धान उत्पादन व खरीदी में अंतर

{ 95 हजार हेक्टेयर में धान की खेती

{1 लाख 24 हजार 988 किसान जिले में

{ हेक्टेयर में 30 से 32 क्विंटल धान उत्पादन

{ लगभग 35 लाख क्विंटल जिले में धान का उत्पादन

{ 27 हजार 928 किसानों ने कराया धान बेचने पंजीयन

{ 49 हजार 816 हेक्टेयर का धान बेचना था

{ 18 लाख 43 हजार क्विंटल धान बेचने हुआ था पंजीयन

{ 23 हजार 832 किसानों ने ही धान बेचा

{ 9.88 क्विंटल हुई धान की खरीदी

केंद्र बंद हुए तो छोटे दुकानदार चिल्हर में खरीदी करने लगे फिर भी भय कायम

दुलौरिन बाई जो अपना पूरा धान नहीं बेच पाईं। कुंजबिहारी जिनका 24 क्विंटल धान घर में ही रह गया

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