शतमुख कोटि हरिहरात्मक महायज्ञ में देंगे सवा सौ करोड़ आहुतियां

Korba News - अर्द्धशतमुख कोटि हरिहरात्मक महायज्ञ, नवंबर-दिसंबर 2012 से भी भव्य रूप में शतमुखकोटि हरिहरात्मक महायज्ञ आयोजन की...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:10 AM IST
Katghora News - chhattisgarh news satmukh koti will give 125 billion sacrifices in demeaning mahayagya
अर्द्धशतमुख कोटि हरिहरात्मक महायज्ञ, नवंबर-दिसंबर 2012 से भी भव्य रूप में शतमुखकोटि हरिहरात्मक महायज्ञ आयोजन की तैयारियां चल रही हैं।

आयोजन स्थल पर यज्ञशाला, स्टाल, संतों के ठहरने व उनके पूजन के लिए कक्ष, श्रद्धालुओं के साथ वीआईपी व संतों के लिए भोजन कक्ष बनाए जा रहे हैं। यज्ञशाला की अंतिम रूप में है तो श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के लिए पंडाल लगाने का काम तेजी से हो रहा है। 9 दिन तक चलने वाली महायज्ञ में प्रतिदिन 108 जोड़ा हवनकुंड में आहुतियां डालेंगे। यज्ञ के दौरान सवा सौ करोड़ आहुतियां सनातन धर्म की रक्षा व विश्व कल्याणार्थ दी जाएगी। श्री देवी संपद मंडल का दिव्य सनातन संस्कार आध्यात्मिक आयोजन शतमुख कोटि हरिहरात्मक महायज्ञ का आयोजन परमाराध्य सदगुरु श्री स्वामी भजनानंद सरस्वती की स्मृति में शिवोपासक, श्रीराम भक्त परमहंस स्वामी शारदानंद सरस्वती जी महाराज्य के सानिध्य व मार्गदर्शन में 16 से 25 नवंबर तक आयोजित है। आयोजन स्थल में चल रही तैयारियों का निरीक्षण स्वामी शारदानंद सरस्वती ने स्वयं लेते हुए दिशा निर्देश दे रहे हैं।

यज्ञशाला जिसमें बने कुंड में 108 जोड़ा प्रतिदिन करेंगे हवन।

10 हजार के लिए भोजन की व्यवस्था

शतमुख कोटि हरिहरात्मक महायज्ञ स्थल पर दूर दूर से संतों के साथ-साथ श्रद्धालु पहंुंचेंगे। जिनके लिए भोजन की व्यवस्था भी महायज्ञ समिति द्वारा की जा रही है। आयोजकों की मानें तो यह के दौरान प्रत्येक दिन 10000 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था रहेगी।

5000 लोग एक साथ सुन सकेंगे श्रीमद् भागवत कथा

यज्ञ के साथ साथ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ कथा का वाचन कथा व्यास पं.अतुल कृष्ण दुबे, मैनपुरी सुनाएंगे। इसके लिए बनाए जा रहे पंडाल में एक साथ 5000 लोग बैठकर कथा सुन सकेंगे। जिसमें महिलाओं, पुरुषों के लिए अलग-अलग बैठक व्यवस्था रहेगी। विशिष्ट अतिथियों के लिए भी अलग से स्थान सुरक्षित रहेगा।

मेजबान समेत अन्य राज्यों से आएंगे 29 संत

यज्ञ के दौरान देश के विभिन्न राज्यों के 29 विद्वान संतों का सानिध्य जिले के लोगों को मिलेगा। ये संत यूपी, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, उड़ीसा, बिहार व हरियाणा से होंगे। प्रमुख रूप से वाराणसी से स्वामी विशोकानंद भारती, ओंकारेश्वर से स्वामी सच्चिदानंद गिरी, हरिद्वार से अर्जुनपुरी महाराज, दिल्ली से अनुभूतानंद गिरी आदि यज्ञ में शामिल रहेंगे।

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