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साढ़े पांच महीने बाद सावेल मशीन बनी, बढ़ेगा उत्पादन
सितंबर 2019 की आखिर में मानसून के दौरान तेज बारिश से दीपका खदान में पानी भर गया था। इस घटना में खदान के भीतर करोड़ों की मशीनें डूब गईं थी। कोयला उत्पादन भी ठप हो गया था।
पानी निकालने में 2 माह से अधिक का समय लग गया था। पानी निकालने के बाद मशीनों को निकालने का काम किया गया। मशीनों में आई खराबी दूर की गई। इसी कड़ी में खदान में पीएचएंड कंपनी की हैवी सावेल मशीन क्रमांक 229 करीब साढ़े पांच माह बाद उत्पादन में आ गई है। दो दिन पहले ही खदान ही यह मशीन उत्पादन में आ गई। बिलासपुर से एक टीम दीपका आयी थी जिसने मॉनिटरिंग कर सावेल मशीन को चालू करने हरी झंडी दी। उसके बाद ओबी पहला लोड लेकर ऑपरेटर वीरेंद्र कुमार राठौर लेकर गए। दीपका परियोजना के महाप्रबंधक शशांक कुमार देवांगन ने बताया कि सावेल क्रमांक 229 चालू होने से उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। अभी मिट्टी उत्खनन कार्य में मशीन लगी है। 10 मार्च को होली के दिन सावेल खदान में मार्च करना प्रारम्भ कर दिया। 29 सितंबर को अत्यधिक जलभराव कारण लीलागर नदी का पानी खदान में भर गया था। इससे मशीन डूब गया था। अब स्थिति पहले से उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।