शाला त्यागी बच्चों का भविष्य सुधारने स्कूल की प्रधान पाठिका कर रहीं प्रयास, घर-घर पहुंचकर दे रहीं समझाइश

Korba News - गांव व श्रमिक बस्तियों में माता-पिता के काम में व्यस्त रहने के कारण बच्चे विद्यालय की पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:16 AM IST
Korba News - chhattisgarh news school teachers are making efforts to improve the future of school children
गांव व श्रमिक बस्तियों में माता-पिता के काम में व्यस्त रहने के कारण बच्चे विद्यालय की पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं ऐसे बच्चों को शाला त्यागी कहते हैं। इनमें ज्यादातर बालिका होती है। परिजनों के अशिक्षित या कम पढ़े-लिखे होने के कारण बच्चों को दोबारा विद्यालय भेजने में रुचि नहीं ली जाती है। ऐसे बच्चे आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते हैं जिससे उनके भविष्य पर असर पड़ता है।

बालकोनगर के फायर काॅलोनी बेलगरी बस्ती स्थित प्राथमिक विद्यालय की प्रधान पाठिका कमला राठौर ने ऐसे शाला त्यागी बच्चों का भविष्य संवारने पहल शुरू की है। वह बेलगरी बस्ती व परसाभाठा में घर-घर पहुंचकर वहां रहने वाले बच्चे और उनकी शिक्षा की जानकारी जुटा रही है। किसी घर में पढ़ाई छोड़ चुके बच्चे मिल रहे हैं तो वहां परिजनों को समझाइश दे रही है। साथ ही बच्चों का प्रेरित करके उन्हें आगे की पढ़ाई पूरी करने को तैयार कर रही है।

ज्यादातर परिवार आर्थिक स्थिति कमजोर होने की बात कहते हैं तो वे उन्हें समझाइश देकर बच्चों को आवासीय विद्यालय भेजने को तैयार कर रही है। प्रधान पाठिका कमला राठौर ने बताया कि बच्चे बीच में पढ़ाई छोड़ देते हैं जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। इसलिए उन्होंने अपने विद्यालय के आसपास बस्ती में ऐसे बच्चों को खोजकर उन्हें आवासीय विद्यालय भेजने का प्रयास शुरू किया है। इसके लिए परिजनों को भी वह समझाइश देकर तैयार कर रही है।

पढ़े-लिखे नहीं होने के कारण अिभभावक बच्चों को स्कूल भेजने में कम लेते हैं रुचि

पढ़ाने भेजने के लिए परिजनों से चर्चा करतीं प्रधान पाठिका कमला राठौर।

पिछले सत्र में बच्चों को मिली निशुल्क ट्यूशन

पिछले सत्र में प्राथमिक विद्यालय में कमला राठौर शिक्षिका के पद पर पदस्थ थी। उस दौरान भी उन्होंने बच्चों को बेहतर रूप से शिक्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बच्चे पढ़ाई में मजबूत हो इसके लिए स्कूल के बाद के समय में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब परिवार के बच्चों के लिए उन्होंने बेलगरी बस्ती में निशुल्क ट्यूशन की व्यवस्था की थी। साथ ही प्राथमिक पढ़ाई पूरी कर चुके बच्चों को नवोदय स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए निशुल्क कोचिंग दी थी।

जागरूक वर्ग जुड़ रहे शिक्षिका के अभियान से

एक ओर जहां समय निकालकर शाला त्यागी बच्चों की खोज करते हुए उन्हें पढ़ाई के लिए तैयार करने में प्रधान पाठिका जुटी है तो दूसरी ओर वह जागरूक लोगों से नि:स्वार्थ रूप से बच्चों का भविष्य संवारने के लिए आगे आकर मदद करने की अपील भी कर रही है। उनके अभियान से जागरूक वर्ग जुड़ने लगा है। चरामेति परिवार ने उनके तैयार किए बच्चों की मदद शुरू की है।

स्कूल से छुट्टी के बाद रोज 2-3 घंटे करती हैं सर्वे

कमला राठौर नियमित समय पर प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाने पहुंच जाती है। जहां छुट्टी होने के बाद वे प्रतिदिन बेलगरी-परसाभाठा में 2-3 घंटे तक सर्वे करके शाला त्यागी बच्चों की जानकारी जुटाती है। इस दौरान यदि पढ़ाई में कमजोर बच्चे मिलते हैं तो उन्हें भी नि:शुल्क ट्यूशन की सुविधा उपलब्ध कराती है। चाहे बच्चे प्राथमिक विद्यालय स्तर के ऊपर के ही क्यों न हो।

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