वर्ल्ड फोटोग्राफी-डे पर विशेष: जिले के जंगलों में भी खोज करने की जरूरत: प्रो. निधि

Korba News - बच्चे हों या बड़े, डिस्कवरी देखना किसे पसंद नहीं। चारों ओर जंगल, दूर आसमान तक दिखाई देते पहाड़ और यहां-वहां भागते...

Bhaskar News Network

Aug 19, 2019, 07:10 AM IST
Korba News - chhattisgarh news special on world photography day need to search in the jungles of the district prof fund
बच्चे हों या बड़े, डिस्कवरी देखना किसे पसंद नहीं। चारों ओर जंगल, दूर आसमान तक दिखाई देते पहाड़ और यहां-वहां भागते जीव-जंतुओं की तस्वीर सबको भाती हैं। सोचने वाली बात यह है कि आम दुनिया से छिपे दुर्लभ जीवों तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। पिछले कई साल से इस चुनौती को अपना पैशन बनाकर जूलाॅजी की एक प्रोेफेसर न सिर्फ जूझ रही हैं वरन उनके कैमरे में वह खजाना कैद है, जिसे देखकर कोरबा के लोग अचंभित रह जाएंगे कि वाकई हमारे इतने नजदीक ऐसी दुनिया भी है। घंटों घने जंगलों की खाक छानकर वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी के माध्यम से उन्होंने कई बार साबित किया है कि कोरबा के जंगलों में भी काफी कुछ डिस्कवर करने की जरूरत है। क्षेत्र में हाल ही में किंग कोबरा मिला था, जिसकी खासियत यह है कि वह रेड डाटा बुक में वर्गीकृत है। अर्थात यह जीव विशिष्ट और संवेदनशील है। इसके संरक्षण की जरूरत है। टीम ने एक लाल मेंढक, गीको व बैंबू पिट वाइपर के साथ सर्पों की एलबिनो प्रजातियां खोज निकाली हैं।

जूलाॅजी की प्रोफेसर ने कैमरे में कैद की दुर्लभ जीव- जंतुओं की तस्वीरें

इन्हें देखकर कर बैठेंगे जीवों से प्यार

दर्री डेम के पुल से आप न जाने कितने बार गुजरे हों पर आपने ध्यान नहीं दिया होगा कि पुल के नीचे पक्षियों का बसेरा है। ये पक्षी घास-फूस नहीं मिट्‌टी से घोसला बनाते हैं। ये पक्षी निगले हुए कीड़ों के साथ कीचड़ का उपयोग मिट्‌टी के छर्रे बनाते हैं। उनके घोसले में करीब 1 हजार तक मिट्‌टी के छर्रे होते हैं।

आनुवांशिक लक्षणों के कारण बदलाव

दूधीटांगर व पुटका पहाड़ क्षेत्र में सर्पों की ऐसी प्रजातियां पाई गई हैं, जिनके अनुवांशिक लक्षणों में परिवर्तन के स्वरूप वे अपने प्राकृतिक रंग में जन्म नहीं लेकर सफेद रंग के हो जाते हैं। इस लक्षण को अलीबनिज्म या रंगहीनता कहा जाता है। सांपों में यह लक्षण शोध का विषय है।

छिपकली की तरह दिखने वाले लेपर्ड गेको

लेपर्ड गेको (छिपकली की तरह दिखने वाला) यहां देखा गया है। भारत में लेपर्ड गेको की दो प्रजाति हैं ईस्ट इंडियन लेपर्ड गेको व वेस्ट इंडियन लेपर्ड गेको। कोरबा के दूधीटांगर व पुटका में मिली प्रजाति वेस्ट इंडियन हैं। लाल मेंढक फुनगोइड के भी इस क्षेत्र में होने की पुष्टि प्रो. निधि ने की है, जिसकी अब तक किसी ने रिपोर्ट नहीं की थी।

बारिश में खोज करना चुनौतीपूर्ण: प्रो. निधि

छत्तीसगढ़ विज्ञानसभा कोरबा इकाई की सदस्य प्रो. निधि सिंह केएन कॉलेज में जूलाॅजी पढ़ाती हैं। उनका मानना है कि अपने स्टूडेंट्स को सही ज्ञान देने खुद हमें भी विज्ञान को बारीकी से समझना जरुरी है। यही वजह है कि विज्ञानसभा के जरिए वे मूसलाधार बारिश हो या चिल-चिलाती धूप, कई बार 8-8 घंटे जंगलों मेंे घूमती रहती हैं। अपनी अनवरत खोज में उन्होंने सरीसृप के विषय को लेकर शोध कार्य भी कर रही हैं। उनकी वर्षों की मेहनत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके कैमरे में अब तक 250 से ज्यादा दुर्लभ जीवों को सुंदरता से कैद किया है। पहाड़ों पर ट्रेकिंग जैसे कई अभियान में शामिल होते हुए वे प्रकृति के संरक्षण की दिशा में भी लोगों को जागरूक करने जुटी रहती हैं।

Korba News - chhattisgarh news special on world photography day need to search in the jungles of the district prof fund
Korba News - chhattisgarh news special on world photography day need to search in the jungles of the district prof fund
Korba News - chhattisgarh news special on world photography day need to search in the jungles of the district prof fund
X
Korba News - chhattisgarh news special on world photography day need to search in the jungles of the district prof fund
Korba News - chhattisgarh news special on world photography day need to search in the jungles of the district prof fund
Korba News - chhattisgarh news special on world photography day need to search in the jungles of the district prof fund
Korba News - chhattisgarh news special on world photography day need to search in the jungles of the district prof fund
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना