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कोल क्षेत्र में कमर्शियल माइनिंग व एफडीआई का रास्ता साफ, राज्य सभा में भी प्रस्ताव पारित

एक वर्ष पहले
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संसद ने खान और खनिज कानून 1957 और कोयला खान कानून 2015 में संशोधन करते हुए खनिज पदार्थ कानून (संशोधन) विधेयक 2020 को मंजूरी दे दी है। लोकसभा में 6 मार्च को यह पारित हो गया था। गुरुवार को राज्य सभा में भी यह पारित हो गया। कमर्शियल माइनिंग और कोल सेक्टर में एफडीआई जैसे निर्णयों को लेकर श्रमिक संगठन लगातार विरोध जताते रहे हैं।

हालांकि इसका कोई असर नहीं पड़ा। सरकार ने इसे संसद में पारित करा लिया। इसके साथ ही कोयला क्षेत्र में कमर्शियल माइनिंग और एफडीआई का रास्ता साफ हो गया है। अब कोयला व खनन क्षेत्र में निजी क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ेगी। संशोधित प्रावधानों में व्यवस्था दी गई है कि ऐसी कंपनियां जिनके पास देश में कोयला खनन का अनुभव नहीं है या उन्‍हें अन्‍य खनिज पदार्थों खनन का अनुभव है वे भी कोयले व लिग्नाइट ब्लॉकों की नीलामी में भाग ले सकती हैं। इससे कोयला क्षेत्र में एफडीआई नीति के कार्यान्वयन को सरल बनाया जा सकेगा। विधेयक में कोयला, लिग्नाइट के लिए लाइसेंस और खनन पट्टे (पीएल-और-एमएल) की इजाजत देने की व्यवस्था है। सफल बोलीकर्ताओं, आवंटियों को अब इसके किसी भी प्‍लांट अथवा इसकी सहायक कंपनी अथवा होल्डिंग (नियंत्रक) कंपनी में खनन किए गए कोयले का इस्‍तेमाल करने का अधिकार होगा। नए नियमों के तहत अब अन्य कई प्रावधान किए गए हैं।

निजी क्षेत्रों की बढ़ेगी भागीदारी, श्रमिक संगठन कर रहे थे इस निर्णय का विरोध

यूनियन सरकारी नीतियों का विरोध कर रहे

इधर ट्रेड यूनियन कोल क्षेत्र मे कमर्शियल माइनिंग और एफडीआई जैसी नीतियों का लगातार विरोध कर रहे हैं। एटक नेता दीपेश मिश्रा का कहना है कि सरकार कॉरपोरेट सेक्टर को फायदा पहुंचाने के लिए इस तरह के निर्णय ले रही है। इसका नुकसान कोल इंडिया को होगा। सीटू नेता वीएम मनोहर ने भी कोल सेक्टर के लिए नियम को श्रमिक विरोधी बताया है।

सफल बोलीकर्ताओं, आवंटियों को अब इसके किसी भी प्‍लांट अथवा इसकी सहायक कंपनी अथवा होल्डिंग (नियंत्रक) कंपनी में खनन किए गए कोयले का इस्‍तेमाल करने का अधिकार होगा। नए नियमों के तहत अब अन्य कई प्रावधान किए गए हैं।


ट्रेड यूनियनों के आंदोलन के बीच लिया था निर्णय

सरकारी नीतियों के खिलाफ केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने 8 जनवरी को राष्ट्रव्यापी काम बंद हड़ताल किया था। एटक, इंटक, सीटू व एचएमएस ने कोयला खदानों में भी हड़ताल की थी। इस दिन यूनियन जहां खदानों में हड़ताल सफल करने में जुटे हुए थे तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने यूनियनों के विरोध को दरकिनार करते हुए कोल सेक्टर के लिए कानून में बदलाव के प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी थी।

खनन क्षेत्र में बदलाव और उत्पादन बढ़ोतरी का दावा

खनिज पदार्थ कानून (संशोधन) विधेयक, 2020 को लेकर कोयला मंत्रालय का कहना है कि इस विधेयक के पारित हो जाने से देश के खनन क्षेत्र में बदलाव आने के साथ कोयला उत्पादन बढ़ेगा। इसके साथ ही आयात पर निर्भरता कम होगी। कोयला उत्पादन में देश की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और कोयले का आयात रुकेगा।

एसईसीएल कोयला खदान
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