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जिस रूट पर हाथियों ने जाना बंद कर दिया, अफसर वहीं बना रहे 50 लाख रुपए से स्टाप डैम, इंजीनियर की नहीं ली सलाह

एक वर्ष पहले
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वनमंडल कोरबा के कुदमुरा परिक्षेत्र में हाथियों के साथ ही जंगली जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था करने के नाम पर ग्राम पंचायत अमलडीहा के पास 50 लाख की लागत से स्टाप डैम का निर्माण कराया जा रहा है। जिसकी गुणवत्ता को लेकर पहले से ही सवाल उठने लगे हैं।

वन विभाग के पास इंजीनियर ही नहीं हैं। विभाग के अफसर ही इंजीनियर बनकर काम करा रहे हैं। पिछले एक साल से इस रूट में हाथियों ने आना-जाना भी बंद कर दिया है। इसके बाद भी स्टाप डैम का निर्माण इसी रूट पर कराया जा रहा है। जो लोगों के काम भी नहीं आएगा। इसके पहले भी मदनपुर में स्टाप डैम का निर्माण किया गया है। जो कोई काम का नहीं है। खनिज न्यास मद से चार स्टाप डैम बनाने की मंजूरी दी गई थी। इस क्षेत्र में हाथियों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन दो साल से हाथियों ने अलग-अलग रूट बना लिया है। अमलडीहा गांव से पहले सड़क से 100 मीटर की दूरी पर श्यांग नाला में स्टाप डैम का निर्माण कराया जा रहा है। हाथी अब 10 किलोमीटर पहले से ही लौट जाते हैं। इसकी वजह से स्टाप डैम निर्माण पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग ने कभी ग्रामीणों से चर्चा नहीं की। जंगल में जहां जगह मिलती है, वहां निर्माण करा दिया जाता है। हाथी लंबे समय से यहां नहीं आ रहे हैं। इसके बाद भी वन विभाग के अधिकारी 50 लाख से स्टाप डैम बनवा रहे हैं। स्थल चयन में भी लापरवाही सामने आ रही है। बारिश के समय स्टाप डैम नहीं टिक पाएगा। यह बारहमासी नाला है। बारिश के समय बाढ़ भी आता है। यहां कभी इंजीनियर को नहीं देखा गया। कभी-कभी वन विभाग के कर्मचारी मौके पर दिखते हैं। डीएफओ गुरुनाथन एन के मोबाइल नंबर 75870-12300 में जानकारी लेने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।

इंजीनियर रखने का है प्रावधान: सीसीएफ

मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर अनिल सोनी का कहना है कि निर्माण कार्यों के लिए इंजीनियर रखने का प्रावधान है। अगर बिना इंजीनियर के काम चल रहा है तो इसकी जानकारी लूंगा। अगर गड़बड़ी है तो जांच के बाद कार्रवाई भी की जाएगी।

एक्सपर्ट व्यू: जानवर जहां पानी पीते हैं, वहां बने

न विभाग के रिटायर्ड एसडीओ नटवर अग्रवाल का कहना है कि हाथी या जंगली जानवरों का एक निश्चित स्थान होता है। जहां के नदी-नालों में जाकर पानी पीते हैं। वहां स्टाप डैम बनाने से लाभ मिलेगा, लेकिन अपने हिसाब से कहीं तालाब या स्टापडैम बनाते हैं तो इसका कोई अर्थ नहीं है। पैसे की ही बर्बादी है।

वन विभाग के पास इंजीनियर ही नहीं हैं, इसलिए अफसर खुद मनमाने तरीके से करा रहे निर्माण

निर्माण कार्य में जंगल से निकाल रहे रेत और गिट्‌टी

वन विभाग ने स्टाप डैम बनाने के लिए ठेका दिया है, लेकिन निर्माण कार्यों में जंगल से ही रेत व गिट्टी का उपयोग किया जा रहा है। इस क्षेत्र के आसपास कोई रेत खदान नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि गिट्टी को जंगल से ही तोड़कर लाया जा रहा है। इसके पहले सड़क निर्माण में लगे ठेका कंपनी के खिलाफ जुर्माना वसूलने की कार्रवाई की गई थी। इस क्षेत्र में खनिज विभाग के अधिकारी भी नहीं जाते, जिसकी फायदा उठा रहे हैं।

ईई बोले- हमसे तो विभाग ने कभी पूछा ही नहीं

और न ही अब तक मामले में कोई पत्र मिला है

जल संसाधन विभाग के ईई सीके धाकड़ का कहना है कि वन विभाग ने कभी स्टाप डैम निर्माण के संबंध में पूछा ही नहीं है और न ही काेई पत्र अभी तक मिला है। किस तरह स्टाप डैम का निर्माण हो रहा है। इसकी जानकारी नहीं है। दौरे के समय कोटमेर में एक निर्माणाधीन स्टाप डैम को जरूर देखा हूं। यहां कैसे और कौन बनवा रहा है। इसकी जानकारी नहीं है।

रेंजर ने कहा- सिंचाई विभाग को लिखा है पत्र

कुदमुरा के रेंजर वी मरावी से पूछे जाने पर कहा कि अमलडीहा में 50 लाख की लागत से स्टाप डैम का निर्माण कराया जा रहा है। आरईएस के इंजीनियर समय-समय पर जाते हैं। सिंचाई विभाग को इंजीनियर उपलब्ध कराने के लिए डीएफओ ने पत्र लिखा है। अब तक इसका जवाब नहीं आया है। निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान रखा जा रहा है। समय-समय पर स्वयं भी निरीक्षण करने जाता हूं।

निर्माणाधीन स्टाप डैम में काम कर रहे लोग।
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