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200 साल से खरहरी और धमनागुड़ी में होलिका दहन नहीं, जोगीपाली में होली अाज
जिले में चार गांव ऐसे हैं, जहां पर्व को लेकर अलग परंपरा है। करतला ब्लाॅक के ग्राम खरहरी व धमनागुड़ी में पिछले दो सदी से होलिका दहन ही नहीं होता। इस दिन रंग-गुलाल भी नहीं खेला जाता।
घरों में मिठाइयां जरूर बनती है। ग्रामीण इस परंपरा को आगे भी कायम रखना चाहते हैं। युवाओं का कहना है कि इस परंपरा को कायम रखने में कोई नुकसान नहीं है। बल्कि लकड़ी व पानी की बचत होती है। रंग-गुलाल अब केमिकलयुक्त बिकने लगे हैं। त्योहार की खुशी पकवान बनाकर होती है। इस वजह से आगे भी परंपरा को कायम रखेंगे। कोरबा ब्लाॅक के ग्राम बासीन में शुक्रवार को त्योहार मनाने की परंपरा है। इस वजह से यहां दो दिन बाद 13 मार्च को होली का पर्व मनाया जाएगा। गांव के बुजुर्ग मनीराम कंवर ने बताया कि कोई भी त्योहार हो शुक्रवार को ही मनाते हैं। भले ही होलिका दहन सोमवार रात को होगा, लेकिन त्योहार शुक्रवार को ही मनाया जाएगा। इस दिन महुआ का भोग लगाकर देवी देवता को मनाते हैं।
युवा बोले- परंपरा से ही बनी पहचान, पेड़ काटने बंद हुए
खरहरी गांव जहां होलिका दहन नहीं होता। जोगीपाली में फाग गाते ग्रामीण, फाग सुनने एकत्रित होते हैं बड़ी संख्या में लोग।
धमनागुड़ी: होली के दिन देवी की पूजा कर भजन-कीर्तन करेंगे
करतला ब्लाॅक के ही ग्राम पठियापाली का आश्रित ग्राम है धमनागुड़ी। यहां भी 200 वर्षों से अधिक समय से होलिका दहन की परंपरा नहीं है। इस दिन लोग गांव में डंगाही देवी की पूजा करते हैं। गांव के उजित राम के मुताबिक लोग पेड़-पौधों को होलिका में काटकर डाल देते थे। इसी वजह से वनदेवी नाराज होतीं थी। गांव के बैगा ने बताया कि लकड़ी काटने से अपशगुन हो रहा है। तब से होलिका दहन नहीं होता। इस दिन ग्रामीण भजन-कीर्तन कर पूजा करते हैं। गांव के पास ही देवी चौरा है। ग्रामीणों ने बताया कि आसपास गांव के लोग भी इस दिन धमनागुड़ी नहीं आते हैं।
जोगीपाली: सोमवार को होलिका दहन कर लगाएंगे रंग-गुलाल
करतला ब्लाॅक के ग्राम जोगीपाली में सोमवार को ही त्योहार मनाने की परंपरा है। गांव के खोलबहरा मांझी व संतराम राठिया ने बताया कि लोग सोमवार को त्योहार मनाना शुभ मानते हैं। यह परंपरा 100 साल पहले से चली आ रही है। आदिवासी बाहुल्य गांव में रविवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार व शनिवार को अगर कोई त्योहार पड़ रहा है तो सोमवार के दिन ही पर्व मनाते हैं। इस बार होलिका दहन सोमवार रात को होगा। मंगलवार को त्योहार मनाया जाएगा। लेकिन जोगीपाली में एक दिन पहले रंग-गुलाल खेलेंगे।
खरहरी: होलिका दहन के दिन घरों में लग गई थी आग
ग्राम पंचायत पुरैना का आश्रित ग्राम है खरहरी। मड़वारानी पहाड़ के नीचे स्थित गांव की आबादी 430 है। जहां कंवर व धनुहार आदिवासियों की बाहुलता है। गांव के बुजुर्ग पूर्व सरपंच कन्हैया कंवर ने बताया कि होली के दिन अपशब्दों का प्रयोग होता था। इससे मां मड़वारानी नाराज हो गईं थी। इस वजह से घरों में आग लग गई। यहां के बैगा को स्वप्न आया कि होलिका दहन न करें साथ ही रंग-गुलाल भी न खेलें। तब से यह परंपरा चली आ रही है। गणेश कंवर (60) ने बताया कि परंपरा को आगे रखने के दो फायदे हैं। होली के लिए पेड़ कटाई नहीं होती। पानी भी बचता है।