साइबर विशेषज्ञाें काे संदेह, उत्तर काेरिया ने भारत का मून मिशन हैक िकया

Koria News - एजेंसी|प्याेंगयांग/ नई दिल्ली भारत जब अपना महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह पर उतारने की काेशिश कर...

Nov 09, 2019, 07:36 AM IST
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एजेंसी|प्याेंगयांग/ नई दिल्ली

भारत जब अपना महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह पर उतारने की काेशिश कर रहा था, उस समय उत्तर काेरिया के साइबर हैकर्स भारत की स्पेस एजेंसी इसराे में सेंध लगा रहे थे। साइबर विशेषज्ञाें काे अाशंका है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसराे) देश का पांचवां एेसा सरकारी संस्थान है जिस पर साइबर हमला हुअा है। अाशंका है िक इसराे कर्मचारियाें ने उत्तर काेरिया के स्पैमर्स द्वारा भेजा गया िफशिंग ई-मेल खाेला अाैर उनके िसस्टम पर मालवेयर इंस्टाल हाे गया। हालांिक अधिकारियाें ने इस बात से इनकार िकया है िक साइबर हमले से मून मिशन प्रभावित हुअा है, जिसके कारण चंद्रयान-2 की लैंडिंग असफल हुई। हालांिक तमिलनाडु स्थित देश के सबसे बड़े परमाणु रिएक्टर में साइबर हमले के बाद इस खुलासे से खतरे की घंटी जरूर बज गई है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपाेर्ट के मुताबिक, सितंबर माह में चंद्रयान-2 िमशन के दाैरान इसराे काे साइबर हमले काे लेकर चेतावनी दी गई थी। तब इसराे ने दृढ़तापूर्वक कहा था िक उसके सिस्टम की हैकिंग की काेशिश सफल नहीं हुई। हालांिक भारत के अंतरिक्ष अभियान काे उस समय झटका लगा था जब बेंगलुरू स्थित कंट्राेल स्टेशन का चंद्रयान-2 से संपर्क टूट गया था। शेष|पेज 11

मालूम हाे, इस वर्ष मार्च में भारत ने अंतरिक्ष में ही सैटेलाइट काे मार िगराया था। इसके साथ ही भारत, अमेरिका, रूस अाैर चीन के बाद एेसा करने वाला चाैथा देश बन गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने भी भारत काे सुपर पावर बताया था। िपछले हफ्ते, भारत के ऊर्जा प्रमुखाें ने स्वीकारा था िक कुडनकुलम परमाणु रिएक्टर पर साइबर हमला हुअा था। हालांिक शुरुअात में वे इससे इनकार कर रहे थे। हालांिक रिएक्टर के अफसराें ने बताया िक मालवेयर का निशाना प्लांट कंट्राेल सिस्टम के बजाय प्रशासकीय कंप्यूटर था। साइबर विशेषज्ञाें का मानना है कि यह हमला डीट्रैक का इस्तेमाल करके किया गया। यह एक प्रकार का मालवेयर हाेता है, जाे हैकिंग समूह लैजारस से जुड़ा है। अमेरिकी मानता अा रहा है कि लैजारस काे उत्तर काेरिया सरकार नियंित्रत करती है।



क्या है कुडनकुलम परमाणु रिएक्टर का मामला

दक्षिण कोरिया के एक गैर लाभकारी खुफिया संगठन इशू मेकर्स लैब (आईएमएल) ने हाल ही में दावा िकया था कि उत्तरी काेरिया के कुछ हैकर भारत के तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम परमाणु रिएक्टर में इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक और डिजाइन चुराना चाहते हैं। इसके लिए वे कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों को निशाना बना चुके हैं। इनमें एटॉमिक एनर्जी कमीशन के पूर्व चेयरमैन व भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के पूर्व डायरेक्टर अनिल काकोडकर और एटॉमिक एनर्जी रेग्युलेटरी बोर्ड के पूर्व चेयरमैन एसए भारद्वाज शामिल हैं। अाईएमएल ने दावा िकया था िक रिएक्टर पर हुआ मालवेयर हमला उत्तर काेरिया ने किया था। संगठन ने दावे से जुड़े दस्तावेज भी जारी किए थे। दरअसल उत्तर काेरिया थोरियम आधारित न्यूक्लियर पावर में रुचि ले रहा है, जो यूरेनियम आधारित न्यूक्लियर पावर की जगह ले सकता है। भारत थोरियम आधारित न्यूक्लियर पावर तकनीक में अग्रणी है।

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