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960 बोतलें पहले जिस ट्रांसपोर्टर के घर मिली थीं वहीं 4320 नशीली दवा की बोतलें जब्त

दवा के प्रभाव : दवा सेवन करने से पसीना सिरदर्द, चक्कर, नींद, उल्टी, कमजोरी, डिहाइड्रेशन, मदहोशी, सूजन, अनीमिया जैसे...

Dainik Bhaskar

Nov 05, 2018, 02:50 AM IST
Raigarh - 4320 drug bottles seized while the 960 bottles were earlier found in the house of the transporter
दवा के प्रभाव : दवा सेवन करने से पसीना सिरदर्द, चक्कर, नींद, उल्टी, कमजोरी, डिहाइड्रेशन, मदहोशी, सूजन, अनीमिया जैसे दुष्प्रभाव शरीर पर पड़ते है।

मेन सप्लायर विकास अग्रवाल फरार हुआ।

भास्कर न्यूज | रायगढ़

कोतरा रोड चूना भट्टी स्थित दिलीप अग्रवाल के घर के बाहर खड़ी दो गाड़ियों से क्राइम ब्रांच ने प्रतिबंधात्मक कोडीन फास्फेट की 4320 बोतलें जब्त की है। घर के अंदर सप्ताह भर से माल पड़ा हुआ था। क्राइम ब्रांच की टीम ने अंदर कमरे में भी तलाशी ली, लेकिन कमरे से सारा माल निकाला जा चुका था। 2017 अक्टूबर में भी इन्हीं के घर से ड्रग इंस्पेक्टर और कोतवाली पुलिस ने 960 कोडीन फास्फेट की बॉटल जब्त की थी। कोरबा, जांजगीर और घरघोड़ा से आरोपी माल की डीलिंग के लिए पहुंचे हुए थे। यहां पर चार आरोपियों को पुलिस ने दबोच लिया। मगर घरघोड़ा का मेन सप्लायर विकास अग्रवाल फरार हो गया।

दरअसल शनिवार की देर शाम एसपी दीपक झा को वाट्सअप पर कोतरा रोड सोनिया नगर के पास स्थित दिलीप अग्रवाल के घर के बाहर सीजी 13 सी 8672 मारुति वेन और एक बोलेरो में सीजी 13 यू एफ 9997 कोडीन फास्फेट की बड़ी खेप शहर से बाहर ले जाने की सूचना मिली। सूचना पर एसपी ने क्राइम ब्रांच टीआई एसएन सिंह की टीम को मौके पर भेजा। क्राइम ब्रांच की टीम ने मौके से दोनों गाड़ियों में 30 कार्टून माल को जब्त किया। वहीं मौके पर डीलिंग के लिए पहुंचे चार आरोपियों को अपनी हिरासत में लिया।

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माल को अलग-अलग जिलों में सप्लाई के लिए लेकर जाने की तैयारी थी। जिनके घर में दवाएं रखी थी। वह दिलीप अग्रवाल का घर है। भास्कर की टीम ने जाकर मौके पर आसपास के लोगों से बात भी की। दिलीप अग्रवाल का एक और घर यहां से कुछ दूरी पर है। जहां अक्टूबर 2017 में कोतवाली पुलिस ने छापेमार कार्रवाई में कोडीन फास्फेट की 960 बोतलें जब्त की थी। पकड़े गए आरोपियों में कृष्णा कुमार साहू निवासी कोरबा हालमुकाम जांजगीर, तसलीम खान घरघोड़ा, प्रेमशंकर चौहान, मनोज कुमार केंवट है। आरोपियों के विरुद्ध कोतवाली थाने में 21 एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।

घरघोड़ा क्षेत्र में सप्लाई करने के लिए मंगवाया था माल

बीते वर्ष हुई कार्रवाई में यह बता सामने आई थी कि संतोषी ट्रांसपोर्टर ने बिना नाम और बिल के दवा सप्लाई की थी। दवा की पेटियां खान नामक व्यक्ति को देने की बात सामने आई थी। मगर खान का नाम स्पष्ट नहीं हुआ। इस बार हुई कार्रवाई में भी तसलीम खान का नाम सामने आया है। आरोपी घरघोड़ा का है। आरोपी विकास अग्रवाल निवासी घरघोड़ा के लिए माल लेकर जा रहे थे। विकास ही घरघोड़ा सहित आसपास के गांव-देहात के इलाके में माल सप्लाई करवाता है।

घरघोड़ा-लैलूंगा क्षेत्र में धड़ल्ले से बिक रहा कोडीन फास्फेट

घरघोड़ा-लैलूंगा क्षेत्र में लगभग सभी मेडिकल में कोडीन की दवाएं मिल जाएंगी। बीते कई सालों से इस क्षेत्र में माल की सप्लाई हो रही है। आरोपी कृष्ण कुमार साहू ने भी बताया कि वह इससे पहले कई बार घरघोड़ा के विकास अग्रवाल को माल डिलीवर कर चुका है। एच-वन शेड्यूल की दवाएं खरीदने- बेचने का पूरा रिकार्ड मेंटेन रखना पड़ता है। ड्रग्स एंड कास्मेटिक एक्ट 18 बी के तहत ड्रग इंस्पेक्टर इन रिकार्ड की जांच करते है। मगर इस क्षेत्र में कभी मेडिकल पर कार्रवाई नहीं हुई।

5.53 में एसपी को वाट्सअप में कोडीन फास्फेट के स्टॉक की सूचना मिली, आधे घंटे में पकड़ाई नशीली कोडीन फास्फेट के 30 कार्टून से भरी दो गाडिय़ां

10 मिलीग्राम से अधिक मात्रा रखना दंडनीय

ड्रग इंस्पेक्टर अमित कुमार राठौर ने बताया कि ऐसे कफ सिरप जिसमें कोडीन फास्फेट की मात्रा 10 मिलीग्राम या उससे अधिक हो, उसके परिवहन या बिक्री पर वैधानिक कार्रवाई का प्रावधान है। कोडीन फास्फेट नामक पदार्थ मिश्रित कफ सिरप के परिवहन को नारकोटिक ड्रग व साइको टॉपिक सबस्टेंस एक्ट (एनडीपीएस एक्ट) के तहत दंडनीय अपराध माना जाता है।

कोडीन से शरीर में होने वाले नुकसान

नशे के लिए करते है दुरुपयोग: कोडीन अधिक मात्रा में शरीर के भीतर पहुंचने पर मनुष्य मदहोश हो जाता है। नशे के आदि इसका सेवन शराब की तरह करते है। इसलिए इसे एचवन शेड्यूल में शामिल किया गया है।

रासायनिक क्रिया: हाइड्रो काडोन कोडाइन का प्राप्त रूप है। दर्द के संकेतों को मस्तिष्क तक पहुंचने नहीं देता, रोक देता है,या ब्लॉक कर देता है जिससे दर्द महसूस नहीं होता।

डॉक्टर इसलिए लिखते हैं दवा: दर्द व सूखी खांसी के लिए डॉक्टर सेवन की सलाह देते हैं। बच्चों किशोरों को अधिक मात्रा में नहीं दी जाती है।

कोरियर का बहाना

मामले में डमरू ट्रांसपोर्ट व संतोषी ट्रांसपोर्ट का नाम सामने आया है। आरोपियों ने कोरियर से माल रायगढ़ के लिए डिलीवर होने का पर्ची दिखाकर बचने की कोशिश की है। मगर माल गोडाउन में रखने और मकान से माल सप्लाई करवाने को लेकर पुलिस कार्रवाई कर सकती है।

नाम अलग, फार्मूला एक

एच-वन शेड्यूल में शामिल होने के बाद इसे बिना डॉक्टरी सलाह के नहीं दे रहे हैं। इसे दूसरे तरीके से बेच रहे हैं। यह रिलैक्स कफ सिरप, फैंसी ड्रिल, कोरेक्स, कोडी स्टार, आरसी कफ,कोडेक्स, ओजोन व ग्लियंटीसाइड के नाम से बिक रहा है। सभी में कोडीन फास्फेट की 10 मिग्रा से अधिक मात्रा है। पकड़ाई दवाइयां आरसी कफ सीरप है।

जांजगीर के लिए आई दवा

कृष्ण कुमार साहू की जांजगीर जिले के पामगढ़ स्थित ससहा नामक जगह में मेडिकल की दुकान है। मेडिकल के दुकान के लिए आरोपी ने अंश इंटरप्राइजेस रायपुर से माल बुक किया था। माल बुक करने के बाद उसकी फोन पर विकास अग्रवाल से डील हुई। रायपुर से माल बुक जांजगीर के लिए हुआ था। मगर कोरियर से सेटिंग करके आरोपियों ने डिलवरी की जगह रायगढ़ करवा दी। रायगढ़ में दिलीप अग्रवाल के घर में माल को रखवाया गया और यहीं से माल की डिलवरी हो रही थी।

कीमत 6 लाख से अधिक

दवा 30 कार्टून में कुल 4320 बोतलें मिली हैं। एक बोतल की कीमत लगभग Rs.120 और एक कार्टून में इसकी संख्या 120 है। बाजार में इसे दो से ढाई सौ रुपए में बेचा जाता है। पुलिस ने इसका आंकलन Rs.120 प्रति नग के हिसाब से करीब ‌‌‌Rs.6 लाख किया है।

सब पर कार्रवाई करेंगे


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