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जिस गांव को विष्णुदेव साय ने गोद लिया वहां के ग्रामीण कहते हैं \"हमन कभु सांसद ला देखे नी अन\"

2 वर्ष पहले
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  • भाजपा सांसद साय के गोद लिए भकुर्रा गांव में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं,
  • चार साल पहले सांसद आदर्श ग्राम योजना में केंद्रीय मंत्री ने लिया था गोद

रायगढ़. देश के ग्रामीण इलाकों की दशा और दिशा सुधारने के लिए सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की गई थी पर चार साल बीतने के बाद इसमें गांवों की सूरत नहीं बदली। कुछ ऐसी ही स्थिति भाजपा सांसद विष्णुदेव साय द्वारा गोद लिए डेढ़ हजार आबादी वाले गांव भकुर्रा की है, जहां ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पाई है। 

1) डेढ़ हजार की आबादी वाले गांव में सड़क, नाली, स्कूल तक नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना में जब सांसद साय ने लैलूंगा ब्लॉक के भकुर्रा गांव को गोद लिया तो लोगों में गांव की सूरत बदल जाने की उम्मीदें बढ़ गई लेकिन समय बीतने के साथ सारी योजनाएं धरी की धरी रह गई। चार साल बीतने के बाद भी गांव का सूरत जस की तस है।

भाजपा सांसद द्वारा गोद लिया यह गांव लैलूंगा विधान सभा क्षेत्र में आता है। उस समय भाजपा की सुनीति सत्यानंद राठिया विधायक होने के साथ साथ भाजपा की सरकार में संसदीय सचिव भी थीं। सांसद विष्णुदेव साय केंद्र में इस्पात राज्य मंत्री भी हैं। इसके बावजूद गांव में नाली, सड़क, अस्पताल या अच्छे विद्यालय जैसी कोई सुविधा नहीं है। 

ग्रामीणों को इस बात का मलाल है कि सांसद ने गांव को गोद तो ले लिया, लेकिन उसे देखने तक नहीं आए। सांसद निधि से विकास के लिए अभी तक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। गांव वालों ने बताया कि उन्हें लोग बताते हैं कि सड़क और अन्य कुछ कार्यों के लिए प्रस्ताव बनाए गए हैं, लेकिन धन कब मिलेगा, इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता। 

सांसद की ओर से आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिए गांव भकुर्रा के माध्यमिक विद्यालय के दिन नहीं बदले। चार वर्ष पूर्व गोद लिए इस स्कूल की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं आया है। यहां शिक्षकों की कमी है और विद्यालय भवन जर्जर हो गया है।

भास्कर टीम ने आदर्श गांव घोषित हुए भकुर्रा में जाकर वस्तुस्थिति जानी तो पाया कि छठवीं कक्षा के कमरे का प्लास्टर उखड़ कर नीचे गिर रहा है। डर के साए में बच्चे पढ़ने को मजबूर है। वर्तमान में यहां पहली से दसवीं तक 300 छात्र पढ़ रहे है। हाई स्कूल में व्याख्याता के पद भी खाली हैं। 

सांसद के गोद लिए गांव में कियोस्क बैंक की सुविधा तक नहीं है, जिससे लोगों को सहूलियत हो सके। इसके चलते ग्रामीणों को पेंशन से लेकर कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए 15 किमी का सफर तय कर लैलूंगा तक जाना पड़ता है। 

कहने को तो भकुर्रा सांसद आदर्श ग्राम है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर जीरो है। यहां से 5 किमी दूर एक उप स्वास्थ्य केंद्र है। जिसमें चिकित्सा सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। ग्रामीणों को करीब 15 किमी दूर लैलूंगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक का सफर करना पड़ता है। 

इस गांव में पीने की पानी के लिए 2 ट्यूबेवल, एक बड़ा व एक छोटा पानी टंकी के साथ 10 हैंडपंप है, लेकिन वर्तमान में 5 हैंडपंप खराब पड़े हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी के दिनों में जल स्तर नीचे चले जाने से पानी के लिए मारामारी होती है। ग्रामीणों को ढोंढी की पानी पीना पड़ता है। 

बीते दो तीन सालों से यहां महिलाओं को प्रशिक्षित करने के लिए 11.22 लाख रुपए की लागत से प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण चल रहा है, लेकिन आज तक पूरा नहीं हुआ है। प्रशासन की मंशा थी कि यहां महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों को ट्रेनिंग दी जाएगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की मंशा थी। मगर प्रशिक्षण केंद्र का काम अधर में लटका हुआ है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब तीन साल पहले मनरेगा के तहत ग्रामीणों ने सड़क निर्माण व स्टॉप डैम निर्माण कार्यों में मजदूरी किया था। इसमें आज तक करीब डेढ़ सौ मजदूरों का 16 लाख रुपए भुगतान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने कई दफा इसकी शिकायत तात्कालीन विधायक व संसदीय सचिव सुनीति राठिया के साथ जपं सीईओ लैलूंगा से भी की।

 

 

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